Source :- LIVE HINDUSTAN
शाहबाज शरीफ ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने पीटीआई के साथ मामले को सुलझाने के लिए लगातार 48 घंटे तक मैराथन बातचीत की थी और एक ड्राफ्ट भी तैयार किया गया था जिसके तहत पीटीआई को अपना लॉन्ग मार्च वापस लेना था।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू करने के अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि आतंकवाद के खिलाफ अभियानों में असहयोग के कारण उनकी सरकार ऐसा करने के लिए मजबूर थी। पाकिस्तानी समाचार पत्र डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, शाहबाज शरीफ ने विपक्ष की अगुवाई करने वाली पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पर ठीकरा फोड़ते हुए यह सफाई दी है।
प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई प्रांतीय सरकार के अधिकार छीनने को एक अनिच्छा से उठाया गया कदम बताया। शाहबाज शरीफ ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने पीटीआई के साथ मामले को सुलझाने के लिए लगातार 48 घंटे तक मैराथन बातचीत की थी और एक ड्राफ्ट भी तैयार किया गया था जिसके तहत पीटीआई को अपना लॉन्ग मार्च वापस लेना था।
उन्होंने कहा कि सरकार ने कई प्रयास किए, लेकिन इसके जवाब में हर दूसरे दिन धमकियां और लंबे मार्च निकाले जा रहे थे। अपने भाई और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के कार्यकाल के दौरान डी-चौक पर दिए गए धरनों और पिछले साल हुए हिंसक प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए उन्होंने पीटीआई के रवैये को भयानक करार दिया।
क्या है पूरा मामला?
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 के तहत 11 अक्टूबर 2026 को खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल की घोषणा की थी। इस आदेश के तहत प्रांत की चुनी हुई सरकार को निलंबित कर सीधे गवर्नर रूल लागू कर दिया गया, जिससे सारी प्रशासनिक और राजनीतिक ताकत गवर्नर के हाथ में चली गई है। इसके बाद से पीटीआई के खिलाफ बड़े पैमाने पर दमनकारी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पूर्व मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी सहित कई प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है।
मानवाधिकार संस्था की कड़ी निंदा
इस बीच इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन ने पाकिस्तान के इस कदम को सैन्य समर्थित सत्ता हथियाने की साजिश करार दिया है। एक्स पर जारी एक बयान में संस्था ने प्रांत की सड़कों पर सैनिकों की तैनाती, पूर्व मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी की गिरफ्तारी और इंटरनेट बंद किए जाने की कड़ी निंदा करते हुए सभी हिरासत में लिए गए नेताओं की तुरंत रिहाई और लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली की मांग की है।
SOURCE : LIVE HINDUSTAN




