Source :- LIVE HINDUSTAN
मुख्य बातें
- अगर आप भी पोस्ट ऑफिस की KVP और NSC स्कीम में ₹50,000 तक निवेश करने का प्लान कर रहे हैं और सोच रहे हैं कि कितना रिटर्न मिलेगा, तो यह खबर आपके लिए ही है
- आइए जरा विस्तार से दोनों स्कीमों के 5 साल की मैच्योरिटी का हिसाब समझते हैं
अगर आप ₹50,000 को सुरक्षित जगह निवेश करना चाहते हैं और 5 साल बाद किसी जरूरी काम के लिए रकम की जरूरत है, तो पोस्ट ऑफिस की दो सरकारी बचत योजनाएं आपके लिए उपयोगी हो सकती हैं। इनमें किसान विकास पत्र (KVP) और नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) शामिल हैं। दोनों योजनाओं में सरकार की ओर से तय नियमों के अनुसार ब्याज मिलता है, लेकिन इनकी मैच्योरिटी अवधि और टैक्स से जुड़े फायदे अलग-अलग हैं। ऐसे में सवाल है कि अगर आप आज ₹50,000 निवेश करते हैं, तो 5 साल बाद किस योजना से ज्यादा फायदा मिल सकता है? इसका जवाब सिर्फ ब्याज दर पर निर्भर नहीं करता। आपको यह भी देखना होगा कि पैसा कब तक निवेश रखना है और क्या आप इनकम टैक्स में छूट का लाभ लेना चाहते हैं। आइए जरा विस्तार से इसका कैलकुलेशन समझते हैं।
KVP vs NSC: दोनों स्कीम की ब्याज दर कितनी है?
अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) पर सालाना 7.7% और किसान विकास पत्र (KVP) पर 7.5% ब्याज दर है। दोनों योजनाओं में ब्याज की कैलकुलेशन सालाना चक्रवृद्धि आधार पर होती है। NSC की सबसे बड़ी खासियत इसकी 5 साल की तय मैच्योरिटी अवधि है। वहीं, KVP उन निवेशकों के लिए है, जो लंबी अवधि तक अपना पैसा निवेश रख सकते हैं। इस योजना में निवेश की रकम मैच्योरिटी पर दोगुनी हो जाती है। हालांकि, इसके लिए 5 साल से अधिक समय तक इंतजार करना पड़ता है।
₹50,000 निवेश करने पर कितना पैसा मिलेगा?
दोनों योजनाओं में निवेश करने से पहले इनके रिटर्न और समय की तुलना करना जरूरी है।
1- नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC)
- ब्याज दर:- 7.7% सालाना
- लगभग 72,400
- 5 साल बाद अनुमानित मैच्योरिटी राशि
2- किसान विकास पत्र (KVP)
- ब्याज दर:- 7.5% सालाना
- 1,00,000
- लगभग 9 साल 7 महीने में निवेश दोगुना
NSC की मैच्योरिटी राशि 7.7% सालाना चक्रवृद्धि ब्याज के आधार पर लगभग ₹72,400 बैठती है, यानी ₹50,000 के शुरुआती निवेश पर करीब ₹22,400 का ब्याज मिल सकता है। यह कैलकुलेशन अनुमानित है और वास्तविक राशि योजना के लागू नियमों के अनुसार होगी।
वहीं, KVP में ₹50,000 निवेश करने पर रकम दोगुनी होकर ₹1 लाख हो सकती है। लेकिन, इसके लिए लगभग 9 साल 7 महीने तक निवेश बनाए रखना होगा। इसलिए अगर आपको 5 साल बाद ही पैसों की जरूरत है, तो KVP की लंबी मैच्योरिटी अवधि आपके लक्ष्य के अनुकूल नहीं है।
NSC में टैक्स छूट का भी मिल सकता है फायदा
NSC की एक और खासियत यह है कि इसमें निवेश की गई रकम पर इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत निर्धारित शर्तों के अनुसार टैक्स कटौती का लाभ मिल सकता है। हालांकि, यह लाभ आपकी चुनी गई टैक्स व्यवस्था और लागू नियमों पर निर्भर करेगा। नई टैक्स व्यवस्था चुनने वाले टैक्सपेयर्स को सामान्य तौर पर सेक्शन 80C की इस कटौती का लाभ नहीं मिलता।
दूसरी ओर KVP में निवेश करने पर सेक्शन 80C के तहत निवेश की रकम पर सामान्य रूप से टैक्स कटौती नहीं मिलती। इसलिए अगर आपका उद्देश्य निवेश के साथ टैक्स बचाना भी है, तो NSC इस मामले में अधिक उपयोगी हो सकती है। ध्यान रखें कि दोनों योजनाओं से मिलने वाला ब्याज लागू इनकम टैक्स नियमों के अनुसार टैक्स के दायरे में आता है। इसलिए टैक्स कटौती या ब्याज की कैलकुलेशन करने से पहले अपनी टैक्स स्थिति को समझना जरूरी है।
5 साल के लक्ष्य के लिए KVP या NSC, कौन बेहतर?
अगर आप अपने बच्चे की पढ़ाई, घर के किसी जरूरी खर्च, शादी या 5 साल बाद होने वाली किसी बड़ी खरीदारी के लिए पैसा जमा कर रहे हैं, तो NSC आपके लिए ज्यादा व्यावहारिक विकल्प हो सकती है। इसकी मैच्योरिटी अवधि आपके वित्तीय लक्ष्य से मेल खाती है और इसमें KVP के मुकाबले पैसा पहले उपलब्ध हो जाता है।
| फीचर | NSC | KVP |
|---|---|---|
| निवेश | ₹50,000 | ₹50,000 |
| ब्याज दर | 7.7% / साल | 7.5%/ साल |
| मेच्योरिटी पीरियड | 5 साल | 115 महीना |
| मेच्योरिटी अमाउंट | ₹72,450 | ₹1,00,000 |
| लगभग ब्याज कमाई | ₹22,450 | ₹50,000 |
| सेक्शन 80C डिडक्शन | एलिजिबल, सब्जेक्ट टू कंडीशन | नॉट एलिजिबल |
वहीं, अगर आपके पास लंबी अवधि है और आपको निवेश की रकम जल्दी निकालने की जरूरत नहीं है, तो KVP पर विचार किया जा सकता है। इसमें निवेश दोगुना होने का स्पष्ट लक्ष्य मिलता है, लेकिन इसके लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। निवेश का फैसला करने से पहले अपनी जरूरत, निवेश की अवधि और टैक्स स्थिति जरूर देखें। ब्याज दरें सरकार की अधिसूचनाओं के अनुसार बदल सकती हैं। निवेश करने से पहले पोस्ट ऑफिस से मौजूदा दरों, मैच्योरिटी नियमों और समय से पहले निकासी की शर्तों की पुष्टि कर लें।
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