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Gold Price: सोना ₹1.48 लाख के पार, दशहरे पर फीकी पड़ी ज्वेलरी की चमक; अब धनतेरस से उम्मीद

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • सोने की कीमत दशहरे के दौरान करीब ₹1.48 लाख प्रति 10 ग्राम पहुंच गई, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 35% अधिक है
  • महंगे सोने के कारण दशहरे पर ज्वेलरी की बिक्री में खास बढ़ोतरी नहीं हुई
  • ज्वेलर्स को अब धनतेरस पर बिक्री में तेजी की उम्मीद है

सोने की आसमान छूती कीमतों ने इस त्योहारी सीजन में ग्राहकों की खरीदारी का तरीका बदल दिया है। दशहरे पर सोने की ज्वेलरी की बिक्री पिछले साल के लगभग बराबर रही, लेकिन कीमतों में तेज उछाल के कारण ग्राहक अब भारी गहनों के बजाय हल्की ज्वेलरी, कम कैरेट वाले सोने और डायमंड डिजाइन को प्राथमिकता दे रहे हैं। ज्वेलरी इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, इस बार खरीदार शुभ अवसर पर सोना खरीदने की परंपरा तो निभाना चाहते हैं, लेकिन अपने बजट का भी पूरा ध्यान रख रहे हैं। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

इस साल दशहरे के दौरान सोने की कीमत करीब 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसी मौके पर यह लगभग 1.10 लाख रुपये थी, यानी एक साल में कीमत करीब 35% बढ़ गई। महंगे सोने का असर इससे पहले गणेश चतुर्थी पर भी दिखाई दिया था, जब सोने की बिक्री की मात्रा सालाना आधार पर 15% घट गई थी। अब ज्वेलर्स को उम्मीद है कि धनतेरस पर खरीदारी में तेजी आएगी और त्योहारी सीजन की बिक्री को सहारा मिलेगा।

महंगे सोने ने बदली ग्राहकों की पसंद

सोने की कीमतें बढ़ने के बावजूद ग्राहक ज्वेलरी खरीदने से पूरी तरह पीछे नहीं हट रहे हैं। इसके बजाय वे ऐसे डिजाइन चुन रहे हैं, जिनकी कीमत कम हो और जिन्हें त्योहारों के साथ डेली यूज में भी पहना जा सके।

कामा ज्वेलरी (Kama Jewelry) के मैनेजिंग डायरेक्टर कॉलिन शाह के मुताबिक, हल्की ज्वेलरी और 9 कैरेट सोने के गहनों की मांग बढ़ी है। खासकर युवा और पहली बार ज्वेलरी खरीदने वाले ग्राहक इस तरह के विकल्प पसंद कर रहे हैं। इसके अलावा 1.5 लाख से 3 लाख रुपये के बजट में नेचुरल और लैब-ग्रोन डायमंड वाली ज्वेलरी में भी दिलचस्पी बढ़ी है। कंपनी के अनुसार, दशहरे पर बिक्री की कुल वैल्यू पिछले साल के लगभग बराबर रही। इससे संकेत मिलता है कि सोने की ऊंची कीमतों के बीच ग्राहक खरीदारी का बजट और गहनों का वजन सोच-समझकर तय कर रहे हैं।

9 और 14 कैरेट सोने के गहने क्यों हो रहे हैं लोकप्रिय?

महंगे सोने के बीच 9 कैरेट और 14 कैरेट की ज्वेलरी ग्राहकों के लिए अपेक्षाकृत किफायती विकल्प बन रही है। कम कैरेट वाले सोने में शुद्ध सोने का अनुपात कम होता है, इसलिए समान वजन और अन्य परिस्थितियों में इसकी कीमत 22 या 24 कैरेट के सोने से कम हो सकती है।

ज़ेन डायमंड इंडिया (Zen Diamond India) के मैनेजिंग डायरेक्टर नील सोनावाला के मुताबिक, ग्राहक अब ऐसे गहने खरीदना चाहते हैं, जिन्हें वे किसी खास समारोह के अलावा ऑफिस, पार्टी या रोजमर्रा में भी पहन सकें। डायमंड स्टड, हल्के पेंडेंट, एक साथ पहनी जाने वाली अंगूठियां और साधारण डिजाइन वाले ईयररिंग इसी बदलती पसंद का हिस्सा हैं।

कंपनी के कुल ज्वेलरी कैटलॉग में हल्की और स्टडेड ज्वेलरी की हिस्सेदारी करीब 65-70% है। कंपनी के मुताबिक, त्योहारी सीजन में इन डिजाइन की मांग ने कारोबार को सहारा दिया। हालांकि, कम कैरेट की ज्वेलरी खरीदते समय ग्राहकों को हॉलमार्क, सोने की शुद्धता, मेकिंग चार्ज और बायबैक की शर्तें जरूर जांचनी चाहिए। कम कीमत का मतलब यह नहीं है कि हर डिजाइन में ग्राहक को समान मूल्य या रीसेल वैल्यू मिलेगी।

पुराने सोने के बदले नए गहने खरीद रहे ग्राहक

ज्वेलरी खरीदने में गोल्ड एक्सचेंज और फाइनेंसिंग स्कीम भी अहम भूमिका निभा रही हैं। इन योजनाओं के जरिए ग्राहक अपने पुराने गहनों के बदले नए डिजाइन खरीद सकते हैं या भुगतान को किस्तों में कर रहे हैं। ज्वेलर्स के मुताबिक, ग्राहक अब पुराने और भारी गहनों को बदलकर हल्के और आधुनिक डिजाइन अपना रहे हैं। यह बदलाव केवल युवाओं तक सीमित नहीं है। 55 साल से अधिक उम्र के ग्राहक भी अपने पुराने गहनों को नए डिजाइन में बदलने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

महंगे सोने के दौर में ऐसी योजनाएं खरीदारी को आसान बना सकती हैं। हालांकि, एक्सचेंज करते समय पुराने गहनों की शुद्धता, वजन, कटौती और नए गहनों के मेकिंग चार्ज का हिसाब समझना जरूरी है।

लैब-ग्रोन डायमंड की बिक्री में 3 गुना उछाल

इस त्योहारी सीजन में लैब-ग्रोन डायमंड ज्वेलरी भी ग्राहकों को आकर्षित कर रही है। लाइमलाइट लैब ग्रोन डायमंड्स (Limelight Lab Grown Diamonds) की मैनेजिंग डायरेक्टर पूजा माधवन के मुताबिक, दशहरे के दौरान कंपनी की बिक्री पिछले साल की तुलना में 3 गुना हो गई। इसी अवधि में कंपनी ने अपने स्टोर नेटवर्क का भी विस्तार किया।

कंपनी के अनुसार, ग्राहक अब डायमंड ज्वेलरी को केवल निवेश या खास मौकों के लिए रखी जाने वाली चीज के रूप में नहीं देख रहे। वे इसे अपनी पसंद, रोजमर्रा के इस्तेमाल और शादी जैसे अवसरों के लिए भी खरीद रहे हैं। छोटे शहरों में भी लैब-ग्रोन डायमंड की मांग बढ़ रही है। लैब-ग्रोन डायमंड प्रयोगशाला में तैयार किए जाते हैं और उनके कई भौतिक व रासायनिक गुण प्राकृतिक हीरों जैसे होते हैं। आम तौर पर उनकी कीमत प्राकृतिक हीरों से कम होती है, लेकिन दोनों की रीसेल वैल्यू और बाजार की मांग अलग हो सकती है।

अब धनतेरस पर टिकी ज्वेलर्स की उम्मीदें

दशहरे पर बिक्री में बड़ी बढ़ोतरी नहीं होने के बाद ज्वेलरी कारोबारियों की नजर अब धनतेरस पर है। भारत में इस दिन सोना, चांदी और दूसरे कीमती सामान खरीदना शुभ माना जाता है, इसलिए यह ज्वेलर्स के लिए साल के सबसे महत्वपूर्ण बिक्री अवसरों में से एक है। हालांकि, सोने की ऊंची कीमतें इस बार भी ग्राहकों के बजट को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में हल्की ज्वेलरी, किफायती कैरेट विकल्प, डायमंड स्टडेड डिजाइन और पुराने सोने के एक्सचेंज जैसी सुविधाएं खरीदारी को बढ़ावा देने में अहम हो सकती हैं।

महंगे सोने ने खरीदारी की रफ्तार को प्रभावित जरूर किया है, लेकिन ग्राहकों की पसंद में बदलाव ने ज्वेलरी बाजार के लिए नए अवसर भी पैदा किए हैं। अब देखना होगा कि धनतेरस पर खरीदारी में कितनी तेजी आती है और क्या यह ज्वेलर्स के लिए त्योहारी सीजन की बिक्री को मजबूत कर पाती है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN