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ईरान पर कभी हां, कभी ना; कौन सा खेल खेल रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिए थे कि वे जल्द ही ईरान पर बड़ा हमला कर सकते हैं। वहीं ईरान ने कहा है कि वह धमकियों से डरने वाला नहीं है और किसी भी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने पश्चिम एशिया में एक बार अनिश्चितता पैदा कर दी है। बीते कई महीनों से ईरान संग युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि वे रविवार (अमेरिकी समयानुसार) को ईरान पर नए हमले नहीं करेंगें। इससे पहले उन्होंने कई बयानों में संकेत दिए थे कि अमेरिका ईरान पर हमले करने जा रहा है। उन्होंने शनिवार को भी एक बयान में कहा था कि अमेरिका करन पर कल ही हमला कर सकता है।

अब एक बयान में ट्रंप ने ईरान पर हमले की संभावना को खारिज कर दिया। हालांकि उन्होंने आने वाले दिनों में हमले की संभावना को खारिज नहीं किया। अल जजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक जब पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि क्या अमेरिका ईरान पर हमला करने जा रहा है, तो उन्होंने पहले मजाकिया लहजे में कहा, “क्या मैं आपको यह बताऊंगा?” लेकिन इसके वे खुद ही बोले, “जवाब ‘ना’ है। आज कोई हमला नहीं होगा।”

डील होगी या सैन्य कार्रवाई?

गौरतलब है कि इससे पहले रविवार को ही ट्रंप ने कहा था कि वे इस बात पर विचार कर रहे हैं कि तेहरान के साथ समझौता किया जाए या सैन्य कार्रवाई जारी रखी जाए। उन्होंने कहा था कि उन्हें फैसला करना है कि ‘काम पूरा किया जाए’ या डील की जाए। इससे पहले हमले की आशंका तब बढ़ गई जब अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपने कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी और कुछ राजनयिक मिशनों से अधिकारियों और उनके परिवारों को हटाना शुरू कर दिया था। खुफिया चेतावनियों में यहां ईरान की ओर से संभावित हमलों की आशंका जताई गई थी।

ईरान ने भी दी थी धमकी

इस बीच ईरान ने अमेरिका या इजराइल के किसी भी हमले का जवाब देने की चेतावनी दी थी। ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने चेतावनी दी कि देश की अखंडता का किसी भी तरह का उल्लंघन किए जाने पर ‘दुश्मन की कल्पना से परे करारा जवाब दिया जाएगा’। उन्होंने कहा कि युद्ध या हत्या की धमकियां देश को उसके अधिकारों और हितों से पीछे हटने पर मजबूर नहीं कर सकतीं हैं। ईरानी संसद सत्र की शुरुआत करते हुए गालिबाफ ने एक बयान में कहा, “हम डरने वाले नहीं हैं और अपने महान ईरान की क्षेत्रीय अखंडता के किसी भी उल्लंघन का दुश्मन की कल्पना से परे जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”

कालीबाफ ने आगे कहा कि अमेरिका अपनी ‘गलतफहमियों’ और ईरान के खिलाफ युद्ध के जरिए ‘खुद के पैदा किए गए संकट में फंस गया है’। उन्होंने तर्क दिया कि ईरान के बजाय अब अमेरिका को ‘खुद को इस स्थिति से बाहर निकालने के लिए कदम उठाने की जरूरत है’। उन्होंने कहा, “जब तक अमेरिकी अपना व्यवहार नहीं बदलते, तब तक उनका कोई भी दावा ईरान के लिए रत्ती भर भी विश्वसनीय नहीं होगा।”

बातचीत है जारी

हालांकि इस बीच दोनों देशों के बीच कूटनीति अभी भी जारी है। ईरान का कहना है कि मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के साथ राजनयिक संदेशों का आदान-प्रदान जारी है। सूत्रों के मुताबिक तनाव कम करने के लिए कतर के मध्यस्थ भी रविवार को तेहरान में मौजूद थे। वहीं पाकिस्तान में ईरान के राजदूत ने कहा है कि तेहरान ने पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए अमेरिका को संदेश भेजा है कि अगर अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से अपनी नाकेबंदी हटा लेता है, तो वे इस समुद्री मार्ग को फिर से खोलने के लिए तैयार हैं। हालांकि, ईरान की आईआरजीसी से जुड़ी एक एजेंसी ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कोई नया प्रस्ताव नहीं दिया गया है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN