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साल 2005 में फ़ेम गुरुकुल’ नाम का सिंगिग रियलिटी शो जीतकर सुर्ख़ियों में आए कश्मीर के क़ाज़ी तौक़ीर फिर से चर्चा में हैं.
इस बार वजह बिग बॉस है. क़ाज़ी इस रियलिटी शो में कश्मीरी गाने गाकर और वादी की ख़ूबसूरती बताकर टीवी के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी ख़ूब चर्चा बटोर रहे हैं.
डाउनटाउन के भीड़भाड़ वाले इलाक़े में उनका घर है.
उसी घर में मौजूद तौक़ीर के चाचा काज़ी रफ़ी ने बीबीसी से कहा, “इसी घर के एक कमरे से तौक़ीर के सफ़र की शुरुआत हुई थी. यहीं वो पढ़ाई करते थे और यहीं वो अभिनय और सिंगिंग की प्रैक्टिस करते थे. क़ाज़ी बचपन से ही बहुत डांस किया करते थे और गाना गाते थे. पूरा परिवार हमेशा से सपोर्ट करता था.”
“तौक़ीर ने ‘टेक ऑफ’ और ’30 मिनट’ फ़िल्मों में लीड अभिनेता के तौर पर अभिनय किया है. हालांकि ये फ़िल्में अभी तक पूरी नहीं हुई हैं.”
जब जीता था फ़ेम गुरुकुल
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क़ाज़ी रफ़ी बताते हैं, “सबसे पहले तौक़ीर ने अपनी मां को ‘फेम गुरुकुल’ के बारे में बताया था और जब मैं ऑफिस के लिए निकल रहा था तो उन्होंने मुझे बताया कि मैंने रियलिटी प्रोग्राम के लिए अप्लाई किया है और मैं वहां जा रहा हूं. मैंने उनसे पूछा कि कौन से प्रोग्राम में अप्लाई किया है, तो जवाब दिया कि ये सिंगिंग प्रोग्राम है. मैं यहां जाऊंगा और जीतकर आऊंगा.”
तौक़ीर के क्रेज़ के बारे में बताते हुए क़ाज़ी रफ़ी कहते हैं, “2005 में एक एसएमएस मैसेज भेजने के लिए तीन से चार रुपये ख़र्च होते थे, लेकिन आप मानोगे नहीं, उस समय पूरे भारत से 40 लाख वोट मिले थे और उन्होंने ट्रॉफी अपने नाम की थी. पूरी दुनिया को पता है कि साल 2005 में कश्मीर के हालात ख़राब थे. लेकिन संस्कृति के हिसाब से कश्मीर सूफ़ी संस्कृति को फॉलो करता है, यहां के लोग संगीत को सुनते हैं और सराहते हैं. एक वजह यही रही कि लोगों ने तौक़ीर को सपोर्ट किया.”
कश्मीर के अशांत माहौल के बीच तौक़ीर की पॉपुलैरिटी के बारे में बात करते हुए राजनीतिक विश्लेषक प्रोफ़ेसर नूर मोहम्मद बाबा ने कहा, “पिछले कई दशकों में कश्मीर में जो हिंसा का दौर रहा है, उस वजह से वो नेचुरल प्रोसेस प्रभावित हुआ है, जिससे कलाकार तैयार होते थे. इन हालातों के लिए अंदरूनी और बाहरी ताक़तें दोनों ज़िम्मेदार रहीं. इसी वजह से आर्टिस्टिक अपॉर्चुनिटी कम होती चली गई.”
नूर मोहम्मद कहते हैं, “जबसे फ़िल्म और टीवी में जॉब के ज़्यादा ऑप्शन खुले, उसमें कश्मीरी कलाकारों की भागीदारी थोड़ी कम रही है. लेकिन कश्मीर में काफ़ी टैलेंट उभरा है. व्यक्तिगत तौर पर कई कलाकारों ने अपनी जगह भी बनाई है. इसमें क़ाज़ी तौक़ीर का नाम है.”
क़ाज़ी पर क्या बोले कश्मीरी युवा
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श्रीनगर अपटाउन में कैफ़े चलाने वाली स्थानीय नागरिक अनम ख़ान का कहना है, “कश्मीरियों ने पिछले कई सालों में कई बार बहुत कुछ झेला है, लेकिन आज टेलीविज़न के प्राइम टाइम शो बिग बॉस में क़ाज़ी तौक़ीर सलमान ख़ान के बराबर खड़े हैं. लोकल कश्मीरी जो 2005 से तौक़ीर को देख रहे हैं, अब दोबारा उन्हें टीवी पर देखकर नॉस्टेलजिक फील कर रहे हैं.”
अमन ख़ान ने कहा, “क़ाज़ी यहां का है तो कश्मीरियों के लिए पर्सनल भी है और क़ाज़ी को जीतना ही पड़ेगा, इसके अलावा कोई और ऑप्शन नहीं है. ये काफ़ी ऐतिहासिक है, क्योंकि पूरे देश की निगाहें हम पर हैं. चाहे कोई भी कारण हो, हम बहुत ज़रूरी लोग हैं, वैसे ये मुद्दा ही इंटरनेशनल है.”
एक युवा लड़की ने कहा, “मैं क़ाज़ी तौक़ीर की बहुत बड़ी फैन हूं और मैं चाहती हूं कि वो जीतें. आप एक रियलिटी शो में पॉलिटिकल समस्याओं पर बहस नहीं कर सकते हैं. तौक़ीर वहां पर कश्मीर की अच्छी चीज़ों के बारे में बात करते हैं और यहां की स्थानीय भाषा बोलते हैं.”
फ़िल्म निर्माता रोहित शेट्टी ने इस वीकेंड बिग बॉस को होस्ट किया और यहां उन्होंने तौक़ीर के काम की तारीफ़ की. साथ ही इस दौरान उन्होंने क़ाज़ी को अपनी आने वाली फ़िल्म में एक रोमांटिक गाना देने का वादा भी किया.
क़ाज़ी से बात करते हुए रोहित शेट्टी ने कहा, “आपका समय आ गया है क़ाज़ी. जब तुम यहां से निकलोगे तो बहुत काम मिलेगा, बहुत प्यार मिलेगा. सोलो एल्बम मिलने शुरू हो जाएंगे. आप बिग बॉस के घर में बहुत अच्छा कर रहे हैं. लेकिन सावधान रहना.”
2005 के ‘फेम गुरुकुल’ में अरिजीत सिंह भी एक दावेदार थे, लेकिन फ़ाइनल से पहले ही वो वोटिंग के आधार पर बाहर हो गए थे. क़ाज़ी और रूपरेखा बनर्जी ने संयुक्त तौर पर ‘फेम गुरुकुल’ का सीज़न जीता था. ‘बिग बॉस 20’ में क़ाज़ी की एंट्री के बाद अरिजीत ने उनका समर्थन किया है और उन्हें ‘अपना रॉकस्टार’ कहा था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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