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इजरायल में अरब पार्टियां बन सकती हैं किंगमेकर, नेतन्याहू की राह में नया रोड़ा; जानें पूरा गणित

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Source :- LIVE HINDUSTAN

इजरायल चुनाव में अरब पार्टियों के शानदार प्रदर्शन ने सरकार गठन का गणित दिलचस्प बना दिया है। जॉइंट लिस्ट और राम पार्टी को करीब 19 सीटें मिलने का अनुमान है। क्या ये पार्टियां नेतन्याहू की सत्ता को चुनौती देकर नई सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं?

इजरायल में मंगलवार को हुए चुनाव में अरब पार्टियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। देश की दो प्रमुख अरब पार्टियां संसद में करीब 19 सीटें जीतने की ओर बढ़ रही हैं। यह इजरायल की संसद में उनके मौजूदा प्रतिनिधित्व के मुकाबले लगभग दोगुना है। इस प्रदर्शन के बाद अरब पार्टियां सरकार गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।

अरब पार्टियों का यह प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है, जब इजरायल में नई सरकार बनाने को लेकर राजनीतिक समीकरण अहम हो गए हैं। हालांकि, सरकार गठन में उनकी भूमिका इस बात पर निर्भर करेगी कि दूसरे राजनीतिक दल उनके समर्थन को किस तरह स्वीकार करते हैं।

दो प्रमुख अरब पार्टियों को मिल सकती हैं करीब 19 सीटें

इजरायल में अरब समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली दो प्रमुख पार्टियां हैं- यूसुफ जबरीन के नेतृत्व वाला जॉइंट लिस्ट गठबंधन और मंसूर अब्बास के नेतृत्व वाली राम पार्टी (Ra’am)। मतगणना के रुझानों के अनुसार, दोनों पार्टियां मिलकर करीब 19 सीटें जीत सकती हैं। इनमें जॉइंट लिस्ट को लगभग 12 सीटें मिलने का अनुमान है।

जॉइंट लिस्ट के नेता यूसुफ जबरीन ने कहा कि उनकी पार्टी इन सीटों का इस्तेमाल बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार को सत्ता से हटाने और इजरायल की राजनीतिक स्थिति में बदलाव लाने के लिए करना चाहती है।

हालांकि, जबरीन ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी आइजनकोट के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल नहीं हो सकती। इसकी वजह गाजा में इजरायल के सैन्य अभियान और दक्षिणी लेबनान पर कब्जे को लेकर आइजनकोट के रुख का समर्थन करना है।

इसके बावजूद उन्होंने आइजनकोट के राजनीतिक गठबंधन को बाहर से समर्थन देने की संभावना खुली रखी। ऐसा करके जॉइंट लिस्ट विश्वास मत के दौरान अल्पमत सरकार को समर्थन दे सकती है।

जबरीन ने कहा कि उनकी पार्टी की मांगों में अरब समुदाय के हितों की रक्षा करना, उसके अधिकारों को आगे बढ़ाना और समानता को बढ़ावा देना शामिल है। उन्होंने अरब शहर उम्म अल-फहम स्थित अपने घर से यह बात कही।

मंसूर अब्बास ने सरकार में शामिल होने के दिए संकेत

दूसरी प्रमुख अरब पार्टी राम के नेता मंसूर अब्बास ने अपनी पार्टी को गठबंधन की राजनीति में अधिक स्वीकार्य बनाने की कोशिश की है। उन्होंने अपनी पार्टी के उम्मीदवारों की सूची में एक पूर्व यहूदी पुलिस अधिकारी को भी शामिल किया है।

अब्बास ने कहा है कि उनकी पार्टी आइजनकोट के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल हो सकती है। मंगलवार रात मतदान समाप्त होने के बाद इजरायली टेलीविजन से बातचीत में अब्बास ने कहा कि उनका मानना है कि मुश्किलों को दूर किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आइजनकोट के गठबंधन को वोट देने वाले ज्यादातर मतदाता राम पार्टी को सरकार में देखना चाहते हैं।

अब्बास के मुताबिक, चुनाव से पहले ही आइजनकोट के गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं ने उनके साथ संभावित समझौते पर चर्चा की थी। उन्होंने दावा किया कि उनसे केवल बदलाव के पक्ष वाले गठबंधन के नेता ही नहीं, बल्कि दक्षिणपंथी खेमे के एक बेहद वरिष्ठ नेता ने भी संपर्क किया था।

आइजनकोट और नेतन्याहू की पार्टियों का क्या है रुख?

अरब पार्टियों के बेहतर प्रदर्शन के बावजूद सरकार गठन में उनकी राह आसान नहीं दिख रही है। आइजनकोट ने चुनाव प्रचार के दौरान किसी भी अरब पार्टी के साथ सरकार बनाने से इनकार किया था। इसके लिए उन्होंने दोनों पक्षों के बीच साझा मूल्यों की कमी का हवाला दिया था। उनके मुताबिक, इजरायल को एक यहूदी और लोकतांत्रिक देश के रूप में मान्यता देना इन साझा मूल्यों में शामिल है।

वहीं, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह सरकार बनाने के लिए किसी अरब पार्टी से बातचीत नहीं करेगी। पार्टी के प्रवक्ता गाइ लेवी ने यरुशलम स्थित पार्टी मुख्यालय में कहा कि अरब पार्टियों के साथ बातचीत की कोई संभावना नहीं है।

कौन हैं मंसूर अब्बास?

मंसूर अब्बास 52 वर्षीय अरब-इजरायली नेता, दंत चिकित्सक और राम पार्टी के प्रमुख हैं। वह 2019 में इजरायल की संसद के लिए चुने गए थे। उन्होंने अरब राजनीति में व्यावहारिक और घरेलू मुद्दों पर केंद्रित दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया है। व्यापक इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष को राजनीतिक भागीदारी की शर्त बनाने के बजाय, वह अरब नागरिकों के रोजमर्रा के मुद्दों पर ध्यान देने की वकालत करते रहे हैं। उनकी प्राथमिकताओं में अपराध पर अंकुश लगाना, सामाजिक-आर्थिक असमानता कम करना, बुनियादी ढांचे का विकास और नगरपालिकाओं को वित्तीय सहायता देना शामिल है। वह 2021 से 2022 के बीच इजरायल की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार में भी शामिल रहे थे।

क्या है जॉइंट लिस्ट गठबंधन?

जॉइंट लिस्ट इजरायल में अरब बहुल राजनीतिक दलों का गठबंधन है। इसकी स्थापना 2015 में अरब नागरिकों के वोटों को एकजुट करने के उद्देश्य से की गई थी। इस गठबंधन में अहमद तिबी की तआल पार्टी शामिल है। ऐतिहासिक रूप से इसमें धर्मनिरपेक्ष, राष्ट्रवादी और वामपंथी विचारधारा वाले दल भी रहे हैं, जिनमें हदाश प्रमुख है।

गठबंधन नागरिक समानता, अरब समुदायों में अपराध पर अंकुश लगाने और कब्जे को समाप्त करने जैसे मुद्दों पर जोर देता है। अतीत में यह सरकार में शामिल होने के बजाय बाहर से समर्थन देने की रणनीति अपनाता रहा है।

इजरायल की आबादी में अरब नागरिकों की कितनी हिस्सेदारी?

इजरायल के अरब नागरिक देश की कुल आबादी का करीब 20 फीसदी हैं। इनकी संख्या लगभग 21 लाख बताई गई है। इनमें से कई लोग खुद को अरब-इजरायली या इजरायल के फिलिस्तीनी नागरिक के रूप में पहचानते हैं।

देश के चिकित्सा क्षेत्र में भी अरब समुदाय की उल्लेखनीय भागीदारी है। इजरायल के स्वास्थ्य मंत्रालय और ताउब सेंटर फॉर सोशल पॉलिसी स्टडीज के आंकड़ों के मुताबिक:

  • देश के 20 फीसदी से अधिक डॉक्टर अरब समुदाय से हैं।
  • करीब एक चौथाई नर्सें अरब समुदाय से आती हैं।
  • लाइसेंस प्राप्त फार्मासिस्टों में लगभग आधे अरब समुदाय से हैं।

इसके अलावा, अरब समुदाय के दो नागरिक इजरायल के सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश रह चुके हैं। इंजीनियरिंग, शिक्षा, लेखन और खेल के क्षेत्र में भी अरब नागरिकों की उल्लेखनीय मौजूदगी है।

पहले भी सरकारों को समर्थन देती रही हैं अरब पार्टियां

इजरायल में अरब पार्टियां दशकों से सरकारों को बाहर से समर्थन देती रही हैं। हालांकि, कैबिनेट में उनका प्रतिनिधित्व सीमित रहा है और आमतौर पर कुछ व्यक्तिगत नियुक्तियों तक ही रहा है।

वर्ष 2001 में द्रूज सांसद सलाह तारीफ और 2007 में लेबर पार्टी के रालेब माजादेले को कैबिनेट में जगह मिली थी। बाद में इसावी फ्रेज और अयोब कारा जैसे नेताओं को भी सरकार में शामिल किया गया।

इस दिशा में बड़ा बदलाव 2021 में आया, जब मंसूर अब्बास की इस्लामवादी राम पार्टी नफ्ताली बेनेट और यायर लैपिड के सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल हुई। अब चुनाव में अरब पार्टियों के बेहतर प्रदर्शन ने एक बार फिर उन्हें इजरायल की सत्ता की राजनीति में अहम भूमिका निभाने का अवसर दिया है। हालांकि, उनके समर्थन से सरकार बन पाएगी या नहीं, यह दूसरे राजनीतिक दलों के रुख और सरकार गठन के लिए होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN