Source :- LIVE HINDUSTAN
मुख्य बातें
- पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) ने पेट्रोल-डीजल, एलपीजी और एटीएफ के ताजा आंकडे़ जारी किए हैं
- पेट्रोल की खपत 3.11 प्रतिशत बढ़कर 37.7 लाख टन हो गई
- वहीं, भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले डीजल की बिक्री 11.69 प्रतिशत बढ़कर 85.1 लाख टन पर पहुंच गई
भारत में अक्टूबर 2026 के दौरान पेट्रोल और डीजल की खपत में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि LPG की मांग में भारी गिरावट आई। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में पेट्रोल की खपत सालाना आधार पर 3.11 प्रतिशत बढ़कर 37.7 लाख टन हो गई। वहीं, भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले पेट्रोलियम प्रोडक्ट डीजल की बिक्री 11.69 प्रतिशत बढ़कर 85.1 लाख टन पर पहुंच गई। इसके उलट, LPG की खपत 12.11% घटकर 26.4 लाख टन रह गई।
अक्टूबर में ATF की खपत भी घटी
अक्टूबर में हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की मांग में भी गिरावट दर्ज की गई। इसकी खपत पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 1.34% घटकर 7.62 लाख टन रह गई। हालांकि, अप्रैल से अक्टूबर के दौरान ATF की कुल खपत 0.28% बढ़कर 52 लाख टन रही।
LPG की मांग क्यों घट रही है?
भारत में LPG की खपत में गिरावट की एक प्रमुख वजह पश्चिम एशिया में जारी संकट और आयात से जुड़ी मुश्किलें हैं। भारत अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। इसके अलावा, LPG की सप्लाई के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। फरवरी 2026 के आखिर से पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण इस मार्ग से होने वाली सप्लाई प्रभावित हुई है। इससे LPG की उपलब्धता पर दबाव पड़ा है।
सरकार भी रसोई गैस पर निर्भरता कम करने के लिए कदम उठा रही है। इसके तहत सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों को पाइप के जरिए घरों तक नेचुरल गैस (PNG) पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
साथ ही, जहां PNG कनेक्शन उपलब्ध हैं, वहां LPG उपभोक्ताओं को पाइप वाली गैस अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सप्लाई में दिक्कतों और PNG की ओर उपभोक्ताओं को ट्रांसफर करने की कोशिशों के बीच हाल के महीनों में LPG की खपत में तेज गिरावट देखने को मिली है।
अप्रैल से अक्टूबर के बीच LPG की खपत 14.5% घटी: चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से अक्टूबर 2026 के दौरान भी पेट्रोल और डीजल की खपत बढ़ी, जबकि LPG की मांग में गिरावट जारी रही।
PPAC के आंकड़े एक नजर में
पेट्रोल: खपत 6.53% बढ़कर 2.647 करोड़ टन हो गई, जो पिछले साल की समान अवधि में इससे कम थी।
डीजल: मांग 5.91% बढ़कर 5.644 करोड़ टन पर पहुंच गई।
LPG: खपत 14.52% घटकर 1.631 करोड़ टन रह गई। पिछले साल इसी अवधि में यह 1.909 करोड़ टन थी।
एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF): खपत 0.28% बढ़कर 52 लाख टन हो गई।
क्या संकेत देते हैं ये आंकड़े?
अक्टूबर के आंकड़े बताते हैं कि देश में परिवहन से जुड़े फ्यूल की मांग मजबूत बनी हुई है। पेट्रोल और डीजल की खपत में बढ़ोतरी इसका संकेत देती है। दूसरी ओर LPG की खपत में लगातार गिरावट रसोई गैस की सप्लाई में आ रही चुनौतियों और PNG की ओर बढ़ते बदलाव को दिखाती है। आने वाले महीनों में LPG की खपत का ट्रेंड काफी हद तक पश्चिम एशिया के हालात, आयात की उपलब्धता और घरेलू स्तर पर PNG कनेक्शन के विस्तार पर निर्भर करेगा।
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