Home rss world hindi PoK में पाकिस्तानी सेना का कहर: ड्रोन और गोलियों से हमला, 3...

PoK में पाकिस्तानी सेना का कहर: ड्रोन और गोलियों से हमला, 3 की मौत, 18 घायल

6
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में हालात और तनावपूर्ण हो गए है। स्थानीय लोगों ने सेना पर आम लोगों के घरों पर ड्रोन हमला करने और अंधाधुंध गोली चलाने का आरोप लगाया गया है।

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में एक बार फिर हालात खराब हो गए हैं। रावलकोट शहर में पाकिस्तानी सेना और स्थानीय लोगों के बीच हिंसक टकराव की खबरें सामने आईं हैं। बताया जा रहा है कि सेना पर आम नागरिकों के घरों को निशाना बनाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया है। इतना ही नहीं, अंधाधुंध गोली चलाने का भी आरोप लगाया गया है। खबर है कि इस हिंसा में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। बताया जा रहा है कि इस घटना में 18 लोग घायल हो गए हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब 5 बजे से रावलकोट के उमर फारूक चौक और आसपास के इलाकों में गोलीबारी शुरू हो गई। बताया जा रहा है कि उस वक्त प्रदर्शनकारी और आम लोग सड़कों पर थे। उसकी वक्त सेना ने उन पर गोली चलानी शुरू कर दी। इस दौरान कई जगहों पर ड्रोन अटैक भी हुआ। इस घटना से कई घरों में आग लग गई।

पाकिस्तानी सेना पर गंभीर आरोप

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सेना ने जानबूझकर आम नागरिकों, महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाया। उनके अनुसार, वे सिर्फ अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे थे, लेकिन जवाब में हिंसा मिली। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। जब तक मांगें पूरी नहीं होगी, तब-तक विरोध-प्रदर्शन जारी रखेंगे।

लंबे समय से प्रदर्शन

बता दें कि रावलकोट में हुई यह हिंसा अचानक नहीं हुई। जून 2026 से पीओके के अलग-अलग इलाकों में विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इन महीनों में पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 153 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। हालांकि ये आंकड़े अभी तक सरकार की ओर से पुष्टि नहीं की गई है।

गौरतलब है कि पीओके महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा-सड़क को लेकर लोग लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि अब ये विरोध सिर्फ आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहा। प्रदर्शनकारी अब राजनीतिक और प्रशासनिक अधिकारों की भी मांग कर रहे हैं। उनकी मांगें हैं कि विधानसभा में उनका उचित प्रतिनिधित्व हो, स्थानीय संसाधनों पर उनका नियंत्रण हो और उन्हें प्रशासनिक स्वायत्तता (खुद के मामले खुद संभालने की आजादी) दी जाए।

दरअसल, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनके इलाके के पानी, खनिज और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल तो हो रहा है, लेकिन उनसे मिलने वाला फायदा आम लोगों तक नहीं पहुंच रहा। यही कारण है कि सड़क पर उतरना पड़ा। सरकार और प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर हैं। जबतक उनकी मांगें नहीं मानी जाएगी तब तक विरोध-प्रदर्शन जारी रहेगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN