Source :- LIVE HINDUSTAN
अपने शुरुआती संबोधन में शी जिनपिंग ने अमेरिका आने की वजह भी बताई। उन्होंने कहा कि वे राष्ट्रपति ट्रंप के निमंत्रण पर अमेरिका आए हैं ताकि दोस्ती को आगे बढ़ाया जा सके और सहयोग का दायरा बढ़ाया जा सके।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इन दिनों अमेरिका पहुंचे हैं। जिनपिंग की 3 दिवसीय यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को वाइट हाउस में उनका औपचारिक स्वागत किया। इन दोनों नेताओं की बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), आपसी सहयोग और व्यापार जैसे बड़े मुद्दों पर खुलकर बात हुई। हालांकि ध्यान देने वाली बात यह रही कि इस पूरे द्विपक्षीय संवाद में सीधे तौर पर भारत का कोई जिक्र नहीं किया गया। गौरतलब है कि दोनों महाशक्तियों के बीच एआई तकनीक को नियंत्रित करने और हेल्दी कॉम्पीटीशन पर बनी सहमति का सीधा प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ेगा, जिसमें भारत भी शामिल है।
वाइट हाउस में बोलते हुए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सुरक्षा और उसके मानव नियंत्रण में रहने को लेकर एक बड़ा बयान दिया। शी ने अपने शुरुआती संबोधन में AI का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों की यह जिम्मेदारी है कि वे यह सुनिश्चित करें कि एआई हमेशा मानव के नियंत्रण में रहे। शी ने कहा, ”हमारे पास एआई को अच्छे कामों के लिए विकसित और प्रबंधन करने की क्षमता और जिम्मेदारी दोनों है। साथ ही, हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि एआई का विकास हमेशा मानव के नियंत्रण में रहे और उससे लोगों का कल्याण हो।”
शी जिनपिंग का संदेश
जिनपिंग ने अपने शुरुआती संबोधन में यह भी कहा कि दोनों देशों को आपस में जारी प्रतिस्पर्धा का जिक्र करने से बचने की जरूरत नहीं है, लेकिन यह सीमा के भीतर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रपति ट्रंप के निमंत्रण पर अमेरिका आए हैं ताकि दोस्ती को आगे बढ़ाया जा सके, सहयोग का दायरा बढ़ाया जा सके और दोनों देशों के लोगों के कल्याण को बढ़ावा दिया जा सके।”
शी ने वाइट हाउस के ग्रैंड फोयर में आयोजित समारोह में कहा, ”हमें शांति से साथ रहना चाहिए। जैसा कि मैंने कई बार कहा है, चीन और अमेरिका जैसे दो बड़े देशों को सहयोग से लाभ होगा और टकराव से दोनों का नुकसान होगा।” उन्होंने कहा कि दोनों देशों को ‘थ्यूसिडाइड्स ट्रैप’ से बचना चाहिए। बता दें केके यह एक ऐसा सिद्धांत है जिसके अनुसार, एक उभरती हुई ताकत और एक स्थापित ताकत के बीच युद्ध होने की संभावना होती है। शी ने कहा, ”हमें प्रतिस्पर्धा का जिक्र करने से बचने की जरूरत नहीं है, लेकिन हमारी प्रतिस्पर्धा स्वस्थ होनी चाहिए और एक दायरे में रहनी चाहिए। यह एक-दूसरे से आगे निकलने की दौड़ होनी चाहिए, न कि ऐसी कुश्ती जिसमें कोई एक जीतता है और दूसरा हारता है।”
उन्होंने कहा, ”चीन और अमेरिका को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे बीच कोई टकराव या संघर्ष न हो। हम निश्चित रूप से इस धरती पर दोनों महान देशों के मिलजुलकर रहने का सही रास्ता ढूंढ सकते हैं। हमारी सेनाओं को नियमित संवाद जारी रखना चाहिए और संकट के समय बातचीत व उसे रोकने के तरीकों को बेहतर बनाना चाहिए। ‘थ्यूसिडाइड्स ट्रैप’ से पार पाया जा सकता है।”
ट्रंप ने कह दी ‘गहरी दोस्ती’ वाली बात
इससे पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ और वाइट हाउस के अपने संबोधन में दोनों देशों के रिश्तों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए। वाइट हाउस में अपने शुरुआती संक्षिप्त संबोधन में, दूसरे विश्व युद्ध में अमेरिका की भूमिका को याद करते हुए ट्रंप ने कहा, ”जिस तरह हमारे लोगों ने उस युद्ध को जीतने के लिए मिलकर काम किया था, उसी तरह हम दोनों अमेरिका और चीन के बेहतर भविष्य के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे।” ट्रंप ने कहा कि 2016 में उनके पहले चुनाव के बाद से ही शी और उनके बीच ‘बहुत अच्छी दोस्ती’ हो गई थी, जो पारस्परिक सम्मान और दोनों देशों के अहम हितों पर आधारित है।
भारत का नहीं लिया नाम
AI को लेकर चल रही बातचीत में भारत का नाम नहीं लिया गया। हालांकि भारत इस मुलाकात पर पैनी नजर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को अमेरिका की तकनीकी पाबंदियों से मजबूती मिली है। अब अमेरिका-चीन में एआई और चिप्स को लेकर रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बनी रही तो भारत के लिए एक अल्टरनेटिव हब बनने का रास्ता खुल सकता है। समझौते की स्थिति भारत के लिए यह मौका छीन सकती है।
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