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Amarnath Gufa History: आखिर अमरनाथ गुफा में कैसे बन जाता है बर्फ का शिवलिंग? जानें रहस्य

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमरनाथ यात्रा की शुरुआत श्रद्धालु कर चुके हैं और 3 जुलाई से दर्शन भी शुरू हो जाएंगे। इसी क्रम में आज हम आपको अमरनाथ गुफा की पौराणिक कहानी और शिवलिंग कैसे बनता है, उसके बारे में विस्तार से बताएंगे।

Amarnath Gufa History: अमरनाथ यात्रा की शुरुआत हो चुकी है और 3 जुलाई से अमरनाथ गुफा में श्रद्धालु दिव्य बर्फ शिवलिंग के दर्शन कर सकेंगे। भगवान शिव के इस अद्भुत स्वरूप के दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु लंबी और कठिन यात्रा तय कर यहां पहुंचते हैं। हर साल अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाला बर्फ का शिवलिंग लोगों के बीच आस्था और जिज्ञासा का विषय बना रहता है। इसके बनने को लेकर धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ वैज्ञानिक कारण भी बताए जाते हैं। आज इस लेख में हम आपको बताएंगे कि अमरनाथ गुफा में बर्फ का शिवलिंग कैसे बनता है, इसके पीछे क्या मान्यता और विज्ञान है, साथ ही भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ी पौराणिक कथा के बारे में भी विस्तार से जानेंगे।

क्या है अमर कथा?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव से मां पार्वती ने अमरत्व का रहस्य जानने की इच्छा जाहिर की। शिव जी को पता था कि अगर अमरत्व की कथा को कोई और सुन लेना, तो वह भी मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर धरत पर अमर हो जाएगा। यही कारण था कि भगवान शिव ने माता पार्वती को कथा सुनाने के लिए एकांत स्थान चुना। इस स्थान का नाम था अमरनाथ गुफा। कथा सुनाने से पहले भगवान शिव ने माता से कहा कि ध्यान रखें कि कथा सुनने के दौरान आपके साथ कोई न हो। फिर भगवान शिव माता पार्वती को कथा सुनाने लगे, जिससे सुनते-सुनते उन्हें नींद आ गई। जब महादेव की आंख खुली तो उन्होंने देखा कि कबूतर का जोड़ा वहां बैठा है, उन्होंने क्रोथ जताया। लेकिन कबूतरों ने माफी मांगी और भोलेनाथ ने उन्हें माफ कर दिया और जीवनदान दिया। साथ ही वरदान दिया कि तुम दोनों हमेशा के लिए अमर हो गए हो और अब इसी जगह पर भगवान शिव और मां पार्वती के प्रतीक के रूप में निवास करोगे। अब ऐसा कहा जाता है कि सावन में कबूतरों का जोड़ा शिवलिंग के आस-पास दिखाई देता है।

बर्फ से शिवलिंग बनने की कहानी

दिलचस्प बात ये है कि हर साल यहां पर बर्फ की शिवलिंग बनकर तैयार हो जाती है और इस गुत्थी को आजतक साइंस भी नहीं सुलझा पाया कि ऐसा कैसे होता है। कहा जाता है कि इस शिवलिंग का निर्माण गुफा की छत से टपकती पानी की बूंदों से होता है। गिरने वाली बूंदे इतनी ठंडी होती है कि नीचे गिरते ही बर्फ का रुप लेकर ठोस हो जाती है। यह क्रम लगातार चलता रहता है और बर्फ का 12 से 18 फीट तक ऊंचा शिवलिंग बन जाता है। लगातार पानी टपकता रहता है, जिससे शिवलिंग ऊपर से गोल हो जाती है।

क्या कहता है साइंस

विज्ञान का मानना है कि पानी की बूंदों से बर्फ तभी जमेगी, जब तापमान करीब शून्य डिग्री हो लेकिन अमरनाथ यात्रा के समय इस स्थान का तापमान शून्य से उपर होता है। इस प्रक्रिया को प्राकृतिक बर्फ संचयन (Ice Stalagmite Formation) से जोड़ा जाता है। जिस तरह कुछ गुफाओं में खनिज पदार्थों की परतें जमकर संरचना बनाती हैं, उसी तरह यहां पानी की बूंदें जमकर बर्फ की आकृति तैयार करती हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN