Source :- LIVE HINDUSTAN
टेंडर डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक CBSE के तकनीकी मूल्यांकन में Coempt Edu Teck को 100 में से 91 अंक मिले, जबकि TCS को 89 अंक प्राप्त हुए।
CBSE की उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल स्कैनिंग और ई-वैल्यूएशन (ऑन-स्क्रीन मार्किंग) यानी OSM के लिए दिए गए ठेके को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। टेंडर रिकॉर्ड के अनुसार हैदराबाद की कंपनी Coempt Edu Teck Pvt Ltd ने टेक्निकल और फाइनेंशियल इवैल्युएशन में देश की दिग्गज आईटी कंपनी TCS को पीछे छोड़ दिया।
हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के मतुाबिक CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम में आई तकनीकी दिक्कतों और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में हुई देरी के बाद इस ठेके की जांच और चयन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।
तकनीकी मूल्यांकन में Coempt को मिली बढ़त
टेंडर डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक तकनीकी मूल्यांकन में Coempt Edu Teck को 100 में से 91 अंक मिले, जबकि TCS को 89 अंक प्राप्त हुए। दोनों कंपनियों को कर्मचारियों की संख्या, सुरक्षा मानकों, ISO और CMMI सर्टिफिकेशन, सॉल्यूशन स्ट्रक्चर, प्रशिक्षण व्यवस्था और डिजास्टर रिकवरी जैसे मानकों पर लगभग समान अंक मिले। हालांकि सबसे बड़ा अंतर पिछले अनुभव के आधार पर देखने को मिला।
Coempt को इस श्रेणी में 35 में से 32 अंक मिले, जबकि TCS को केवल 25 अंक प्राप्त हुए। विशेष रूप से “डिजिटल मूल्यांकन के लिए उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग और वितरण” के अनुभव में Coempt को पूरे 10 अंक मिले, जबकि TCS को इस कैटेगरी में शून्य अंक दिए गए।
वित्तीय बोली में TCS से 60% सस्ती निकली Coempt
वित्तीय बोली में दोनों कंपनियों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला। Coempt ने प्रति उत्तर पुस्तिका ₹24.75 से ₹25.74 तक का रेट दिया, जबकि TCS ने ₹53 से ₹65 प्रति कॉपी तक की बोली लगाई। इस आधार पर Coempt की कुल बोली लगभग ₹384.6 करोड़ रही, जबकि TCS की बोली करीब ₹951.3 करोड़ थी। यानी Coempt का प्रस्ताव TCS से लगभग ₹566 करोड़ सस्ता था।
QCBS पद्धति से हुआ चयन
CBSE ने इस ठेके के लिए QCBS पद्धति अपनाई थी। इसमें तकनीकी अंकों को 70 प्रतिशत और वित्तीय बोली को 30 प्रतिशत वेटेज दिया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में यदि कोई कंपनी तकनीकी रूप से पात्र हो और उसकी वित्तीय बोली काफी कम हो, तो उसे निर्णायक बढ़त मिल जाती है।
CBSE ने चयन प्रक्रिया का किया बचाव
CBSE अधिकारियों का कहना है कि चयन पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुरूप किया गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि Coempt ने टेंडर की सभी पात्रता शर्तें पूरी की थीं और उसे किसी राज्य सरकार या परीक्षा बोर्ड ने ब्लैकलिस्ट नहीं किया है। इसलिए कंपनी को केवल सार्वजनिक धारणा के आधार पर अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता था।
OSM सिस्टम पर पहले से विवाद
यह ठेका CBSE की डिजिटल स्कैनिंग और ई-वैल्यूएशन प्रणाली से जुड़ा है। इसी वर्ष बोर्ड ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग व्यवस्था को पूरी तरह लागू किया था। हालांकि कक्षा 12वीं के रिजल्ट के बाद रि-वैल्युएशन पोर्टल शुरू होने में देरी और तकनीकी समस्याओं के कारण इस व्यवस्था की आलोचना हुई। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया और चयनित कंपनी की भूमिका भी चर्चा में आ गई है।
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