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CIA चीफ की रूस में सीक्रेट एंट्री…मॉस्को में ‘गुप्त’ वार्ता, आखिर बंद कमरे में क्या हुआ?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

क्रेमलिन ने पुष्टि की कि सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने रूस के खुफिया विभाग के समकक्षों से बातचीत के लिए मास्को का दौरा किया। यूक्रेन युद्ध को लेकर वाशिंगटन और मास्को के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बीच एक गुप्त मुलाकात हुई।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच मॉस्को से एक बड़ी खबर सामने आई है। क्रेमलिन ने बुधवार को पुष्टि की कि सीआईए चीफ जॉन रैटक्लिफ ने रूस के खुफिया अधिकारियों से बातचीत के लिए मास्को का गुप्त दौरा किया। यूक्रेन युद्ध के बीच दोनों देशों के तनावपूर्ण संबंधों में यह मुलाकात अहम मानी जा रही है। क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रैटक्लिफ ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात नहीं की, लेकिन रूसी नेता को इन चर्चाओं की जानकारी दे दी गई थी।

पेस्कोव के अनुसार, वार्ता ‘खुफिया एजेंसियों के स्तर पर’ हुई। उन्होंने बातचीत के विषय पर कोई जानकारी देने से इनकार करते हुए कहा कि बेशक, राष्ट्रपति पुतिन को हर बात की तुरंत जानकारी दी जाती है। हालांकि सीआईए ने इस पर कोई बयान जारी नहीं किया है। वाइट हाउस की ओर से भी तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

मंगलवार को उतरा था सैन्य विमान

रूसी सरकारी समाचार एजेंसियों के अनुसार, मंगलवार को एक अमेरिकी सैन्य विमान मास्को के वनुकोवो हवाई अड्डे पर उतरा और उसी दिन बाद में रवाना हो गया। एक वरिष्ठ यूक्रेनी अधिकारी ने न्यूज एजेंसी एपी को बताया कि वाशिंगटन ने कीव को सूचित किया था कि एक प्रतिनिधिमंडल रूसी राजधानी की यात्रा करेगा। अधिकारी के अनुसार, अमेरिका ने प्रतिनिधिमंडल के जाने तक मास्को, सेंट पीटर्सबर्ग और कुछ उत्तरी क्षेत्रों पर हमलों को स्थगित करने का अनुरोध किया था। हालांकि अन्य रूसी क्षेत्रों में हमले जारी रहे।

पेस्कोव ने कहा कि खुफिया एजेंसियों के बीच संपर्क अपने आप में एक सकारात्मक घटना है, लेकिन उन्होंने जोर दिया कि रूस-अमेरिका संबंध ‘गहरे संकट’ में हैं। उन्होंने कहा कि इस यात्रा का दोनों देशों के संबंधों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी।

हर साल नहीं होती ऐसी यात्राएं

वहीं, रूस की सुरक्षा सेवाओं के विशेषज्ञ आंद्रेई सोल्डातोव ने बताया कि रैटक्लिफ जैसी यात्राएं हर साल नहीं होती हैं। उन्होंने कहा कि मास्को और वाशिंगटन के बीच आधिकारिक संचार चैनल 1980 के दशक से मौजूद हैं, जो गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों या नागरिकों की जान के खतरे वाले मामलों में बातचीत की अनुमति देते हैं। सोल्डातोव के अनुसार, ऐसी बैठकें आमतौर पर तब होती हैं जब यह अमेरिकी राष्ट्रीय हितों में हो।

इससे पहले भी दोनों के बीच इस तरह की मुलाकात हुई थी। 2021 में पुतिन की सुरक्षा परिषद के सचिव निकोलाई पतरुशेव ने मास्को में तत्कालीन सीआईए निदेशक विलियम बर्न्स से मुलाकात की थी। नवंबर 2022 में बर्न्स ने तुर्की में रूस की विदेशी खुफिया एजेंसी के प्रमुख सर्गेई नारिशकिन से मुलाकात कर रूस को यूक्रेन में परमाणु हथियार तैनात न करने की चेतावनी दी थी।

सोल्डातोव का अनुमान है कि मंगलवार की बैठक में मध्य पूर्व में अमेरिकी कर्मियों और ठिकानों की सुरक्षा पर चर्चा हुई होगी। हालांकि यात्रा गुप्त रही और इसके परिणाम सार्वजनिक नहीं हुए, फिर भी इससे यह स्पष्ट होता है कि व्यापक संबंध गहरे संकट में होने के बावजूद दोनों पक्षों के बीच खुफिया संपर्क सक्रिय बने हुए हैं।

रूस-अमेरिका संबंध तनावपूर्ण

यहां बता दें कि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण मॉस्को और वाशिंगटन के बीच संबंध अच्छे नहीं है। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप जब सत्ता में लौटे तो इनमें सुधार की उम्मीद जगी थी। ट्रंप ने युद्ध को शीघ्र समाप्त करने का वादा किया था, पुतिन से कई बार फोन पर बात की और अलास्का में उनकी मेजबानी भी की थी। हालांकि, अमेरिका का ध्यान ईरान संघर्ष पर केंद्रित होने और दोनों पक्षों द्वारा लंबी दूरी के हमले तेज करने के कारण ये प्रयास लगभग ठप हो गए हैं। पुतिन ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की की तत्काल युद्धविराम की अपील को खारिज करते हुए कहा है कि रूस व्यापक समाधान चाहता है, अस्थायी युद्धविराम नहीं।

दूसरी ओर रूस ने ईरान के साथ अमेरिका और इजराइल के युद्ध में मध्यस्थता की पेशकश भी की है। फरवरी 2022 के बाद तेहरान ने रूस को शाहेद ड्रोन की आपूर्ति की और बाद में उनके उत्पादन का लाइसेंस जारी किया। जनवरी 2025 में मास्को और तेहरान ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी संधि पर हस्ताक्षर किए। साथ ही रूस इजराइल के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध भी बनाए हुए है। वहीं, मार्च में एपी ने अमेरिकी खुफिया जानकारी से परिचित अधिकारियों का हवाला देते हुए बताया था कि रूस ने ईरान को ऐसी जानकारी दी जिससे तेहरान को क्षेत्र में अमेरिकी संपत्तियों पर हमला करने में मदद मिल सकती थी। हालांकि पेस्कोव ने ईरान को सैन्य या खुफिया सहायता देने संबंधी सवालों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN