Source :- LIVE HINDUSTAN
मुख्य बातें
- ईडी ने रिलायंस पावर के खिलाफ विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत जांच के सिलसिले में कंपनी की 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है
- इस खबर के अगले ही दिन रिलायंस पावर के शेयर बुरी तरह धाराशायी हुए
सप्ताह के चौथे दिन गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार गुलजार था। इस खरीदारी वाले माहौल में कुछ शेयर बुरी तरह बिखर गए। अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस पावर लिमिटेड के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। गुरुवार को इंट्रा-डे में यह शेयर करीब 5 पर्सेंट टूटकर 18.69 रुपये तक आ गया। यह शेयर के 52 हफ्ते का लो है। शेयर में यह गिरावट एक निगेटिव खबर की वजह से आई। आइए जानते हैं कि आखिर शेयर में गिरावट की निगेटिव खबर क्या है?
ईडी की कार्रवाई
दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बताया कि उसने अनिल अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस पावर के खिलाफ विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत जांच के सिलसिले में कंपनी की 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक बयान में कहा कि जब्त की गई संपत्ति में रिलायंस पावर के बैंक खातों में जमा राशि और सासन पावर लिमिटेड में उसकी हिस्सेदारी शामिल है।
ईडी ने 12 अक्टूबर को फेमा की धारा 37ए के तहत 2,032.81 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करने का आदेश जारी किया था। कंपनी ने ईडी की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह एजेंसी के आरोपों को विवादित मानती है और अपने हितों के साथ-साथ सभी शेयरधारकों, अन्य हितधारकों के हितों की रक्षा के लिए कानूनी सलाह के अनुसार सभी उचित कदम उठाएगी।
सेबी की कार्रवाई से शुरुआत
ईडी की जांच भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की उस कार्रवाई से शुरू हुई जो रिलायंस पावर की ऑडिटिंग में 2,101.46 करोड़ रुपये की राशि को बट्टे खाते में डालने या उसके लिए प्रावधान करने से संबंधित थी। एजेंसी के अनुसार, यह राशि ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (बीवीआई) और केमैन आइलैंड्स की कंपनियों में किए गए विदेशी निवेश तथा उन्हें दिए गए अग्रिम भुगतान से संबंधित थी। ईडी ने कहा कि रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड (जिसका बाद में रिलायंस पावर में विलय हो गया) ने 2006 में विदेशी मुद्रा में परिवर्तनीय बॉन्ड जारी कर 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर जुटाए थे। इसमें से 27.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निवेश उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सिंगापुर की सब्सिडयरी कंपनी रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज (सिंगापुर) प्राइवेट लिमिटेड (आरएनआरएल-एस) में किया गया था।
ईडी ने आरोप लगाया कि आरएनआरएल-एस ने यह राशि जिनेवा स्थित डॉयचे बैंक (स्विस) एसए में जमा कराई थी। इस जमा राशि का इस्तेमाल ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में रजिस्टर्ड कंपनियों को दिए गए लोन के लिए जमानत के रूप में किया गया था।” एजेंसी ने दावा किया कि जांच में पता चला कि इन बीवीआई कंपनियों का नियंत्रण और प्रबंधन भारत से रिलायंस अनिल अंबानी समूह द्वारा ऐसे लोगों के माध्यम से किया जाता था जो समूह के निर्देशों के अनुसार काम करते थे।
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