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EMI भरना भूल गए? जानिए कितना लग सकता है जुर्माना और कैसे बचाएं क्रेडिट स्कोर

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • पर्सनल लोन की EMI समय पर जमा न होने पर बैंक या NBFC लोन की शर्तों के अनुसार लेट पेमेंट चार्ज लगा सकता है
  • भुगतान में देरी क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्ट होने पर आपके क्रेडिट स्कोर पर भी निगेटिव असर पड़ सकता है
  • आइए जानते हैं कि EMI मिस होने पर क्या करें और क्या न करें?

अगर आपने पर्सनल लोन लिया है, तो हर महीने समय पर EMI चुकाना जरूरी है। लेकिन, कई बार सैलरी देर से आने, अचानक मेडिकल खर्च बढ़ने या बैंक खाते से ऑटो-डेबिट फेल होने के कारण किस्त समय पर जमा नहीं हो पाती। ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। एक EMI मिस होने पर बैंक या NBFC लेट पेमेंट चार्ज लगा सकता है। वहीं, भुगतान में देरी लंबे समय तक बनी रहने पर आपके क्रेडिट स्कोर (Credit Score) पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए समय रहते सही कदम उठाना जरूरी है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

EMI मिस होने पर कितना जुर्माना लग सकता है?

पर्सनल लोन की EMI तय तारीख तक जमा नहीं होने पर बैंक या NBFC आपके लोन एग्रीमेंट के मुताबिक लेट पेमेंट चार्ज या बकाया रकम पर लागू पेनल चार्ज लगा सकता है। इसकी राशि हर बैंक और लोन की शर्तों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए, यह मानकर न चलें कि एक किस्त देर से चुकाने पर सभी ग्राहकों को एक जैसा जुर्माना देना होगा।

अगर बकाया रकम समय पर नहीं चुकाई जाती, तो आपकी वित्तीय देनदारी बढ़ सकती है। इसके अलावा अगली EMI की तारीख आने पर आपको पिछली बकाया किस्त के साथ नई किस्त का भुगतान भी करना पड़ सकता है। इससे महीने का बजट बिगड़ सकता है। इसलिए EMI मिस होने का पता चलते ही अपने बैंक से संपर्क करें और बकाया रकम के साथ लागू चार्ज की जानकारी लें।

क्रेडिट स्कोर पर क्या पड़ेगा असर?

लोन की किस्त समय पर चुकाने का रिकॉर्ड आपके क्रेडिट स्कोर (Credit Score) को प्रभावित करने वाले अहम कारकों में शामिल है। बैंक और NBFC आमतौर पर ग्राहकों के भुगतान से जुड़ी जानकारी क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्ट करते हैं। अगर EMI का भुगतान देर से होता है और देरी रिपोर्ट की जाती है, तो आपके क्रेडिट रिकॉर्ड पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

कम क्रेडिट स्कोर (Credit Score) होने पर भविष्य में पर्सनल लोन, होम लोन या क्रेडिट कार्ड लेना मुश्किल हो सकता है। कुछ मामलों में कर्जदाता अधिक ब्याज दर या सख्त शर्तें भी लागू कर सकते हैं। हालांकि, एक EMI मिस होने से हर व्यक्ति का स्कोर एक निश्चित सीमा तक गिरेगा, ऐसा नहीं कहा जा सकता। असर इस बात पर निर्भर करता है कि भुगतान में कितनी देरी हुई, आपकी क्रेडिट हिस्ट्री कैसी है और संबंधित जानकारी किस तरह रिपोर्ट की गई है।

बैंक के फोन और मैसेज को नजरअंदाज न करें

EMI बकाया होने पर बैंक या NBFC आपको SMS, ईमेल या फोन के जरिए भुगतान की याद दिला सकता है। ऐसे में इन संदेशों को नजरअंदाज करने के बजाय बैंक से संपर्क करना बेहतर है। अगर सैलरी में देरी या किसी जरूरी खर्च के कारण भुगतान नहीं कर पा रहे हैं, तो अपनी स्थिति स्पष्ट रूप से बताएं। कर्जदाता से पूछें कि बकाया किस्त चुकाने के लिए क्या विकल्प उपलब्ध हैं। किसी भी भुगतान व्यवस्था या राहत पर सहमति देने से पहले उसकी शर्तें समझ लें। ध्यान रखें कि भुगतान की तारीख बदलने या राहत मिलने की सुविधा हर लोन में उपलब्ध हो, यह जरूरी नहीं है।

ऑटो-डेबिट फेल होने पर क्या करें?

हर बार EMI मिस होने की वजह पैसों की कमी नहीं होती। कई बार बैंक सर्वर की समस्या, ऑटो-डेबिट मैंडेट में गड़बड़ी या खाते में पर्याप्त बैलेंस नहीं होने के कारण भुगतान फेल हो सकता है। ऐसी स्थिति में सबसे पहले अपना बैंक बैलेंस और खाते से जुड़े ट्रांजैक्शन चेक करें।

अगर खाते में पर्याप्त पैसा होने के बावजूद EMI नहीं कटी है, तो बैंक से संपर्क करके भुगतान फेल होने की वजह पता करें। इसके बाद लोन देने वाली संस्था के आधिकारिक ऐप, वेबसाइट या अन्य स्वीकृत माध्यम से बकाया रकम जमा करें। भुगतान करने के बाद उसकी रसीद सुरक्षित रखें और यह भी जांचें कि लोन खाते में किस्त जमा होने का रिकॉर्ड अपडेट हो गया है या नहीं। ऑटो-डेबिट फेल होने पर भी लागू चार्ज को लेकर बैंक से स्पष्टीकरण मांगें।

आगे EMI मिस होने से कैसे बचें?

अगर आपकी सैलरी हर महीने किसी तय तारीख को आती है, तो EMI की तारीख उसी के हिसाब से चुनने पर विचार करें। बैंक खाते में किस्त से कुछ अधिक बैलेंस बनाए रखें, ताकि ऑटो-डेबिट के समय पैसे की कमी न हो। EMI की तारीख से पहले मोबाइल रिमाइंडर लगाना भी उपयोगी हो सकता है। इसके अलावा अचानक आने वाले खर्चों के लिए अलग इमरजेंसी फंड तैयार करें। कोशिश करें कि इसमें कम से कम कुछ महीनों की जरूरी EMI और घरेलू खर्चों के बराबर रकम हो। इससे नौकरी में बदलाव, मेडिकल खर्च या सैलरी में देरी जैसी परिस्थितियों में किस्त चुकाने में मदद मिल सकती है।

एक EMI मिस होने का मतलब?

याद रखें कि एक EMI मिस होने का मतलब यह नहीं है कि आपका क्रेडिट रिकॉर्ड हमेशा के लिए खराब हो गया। सबसे जरूरी है कि आप देरी की वजह पता करें, बकाया भुगतान जल्द से जल्द करें और आगे की किस्तें समय पर चुकाएं। अगर भुगतान में कोई तकनीकी गड़बड़ी हुई है, तो उसका प्रमाण सुरक्षित रखें और जरूरत पड़ने पर बैंक से शिकायत दर्ज कराएं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN