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Facebook-Instagram पर अब गलत खबरों पर लगेगी लगाम? सरकार ने Meta से सिस्टम सुधारने को कहा

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Source :- LIVE HINDUSTAN

केंद्र सरकार ने Facebook और Instagram की पैरेंट कंपनी Meta को अपने कंटेंट रिकमेंडेशन सिस्टम को रीव्यू करने और जरूरी बदलाव करने की सलाह दी है। MeitY चाहता है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यूजर्स को किसी एक तरह की जानकारी या सीमित नजरिए वाला कंटेंट बार-बार न दिखाया जाए।

केंद्र सरकार ने Facebook और Instagram की मालिक कंपनी Meta को अपने कंटेंट रिकमेंडेशन सिस्टम को रीव्यू करने और उसमें जरूरी बदलाव करने की सलाह दी है। सरकार चाहती है कि इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यूजर्स को बार-बार एक ही तरह की जानकारी या किसी एक पक्ष का नजरिया ही न दिखाया जाए। इसके साथ ही सरकार ने पुराने वीडियो को नई घटना बताकर शेयर करने, मिस-लीडिंग क्लेम और लॉ एंड आर्डर से जुड़ी घटनाओं के वीडियो बिना सही जानकारी के ज्यादा लोगों तक पहुंचने पर चिंता जताई है।

Facebook और Instagram पर यूजर्स को कौन-सी पोस्ट, वीडियो या खबर दिखाई देगी, यह काफी हद तक इन प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम पर निर्भर करता है। अब केंद्र सरकार चाहती है कि Meta अपने इस सिस्टम की समीक्षा करे, ताकि लोगों को किसी एक तरह की जानकारी बार-बार न दिखाई जाए और भ्रामक कंटेंट को जरूरत से ज्यादा बढ़ावा न मिले।

सरकार क्यों चाहती है Facebook-Instagram के सिस्टम में बदलाव?

आज Facebook और Instagram पर यूजर्स को दिखाई देने वाली पोस्ट सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करती कि उन्होंने किन लोगों को फॉलो किया है। प्लेटफॉर्म का एल्गोरिदम भी यह तय करने में भूमिका निभाता है कि कौन-सा वीडियो, पोस्ट या अन्य कंटेंट यूजर की फीड में ज्यादा दिखाई देगा। सरकार की चिंता है कि अगर रिकमेंडेशन सिस्टम किसी खास तरह की जानकारी को बार-बार आगे बढ़ाता है, तो लोगों तक घटनाओं की पूरी तस्वीर नहीं पहुंच सकती। ऐसे में यूजर्स को अलग-अलग नजरिए और भरोसेमंद जानकारी मिलने की संभावना कम हो सकती है।

पुराने वीडियो को नई घटना बताने वालों पर नजर

सरकार ने ऐसे कंटेंट को लेकर खास चिंता जताई है, जिसमें पुरानी, असंबंधित या एडिट की गई तस्वीरों और वीडियो को मौजूदा घटना के रूप में पेश किया जाता है। उदाहरण के लिए, किसी पुराने प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर इस तरह शेयर किया जा सकता है, मानो वह किसी दूसरे शहर में उसी दिन हुई घटना का हो। इसी तरह, किसी वीडियो के कुछ हिस्से काटकर या उसके साथ गलत जानकारी जोड़कर लोगों को मिस-लीड किया जा सकता है। MeitY ने ऐसे दावों को लेकर भी सावधानी बरतने को कहा है, जिनमें बिना पुष्टि के इमरजेंसी लागू होने, पाबंदियां लगने या पुलिस कार्रवाई जैसी बातें कही जाती हैं। इस तरह की पोस्ट तेजी से फैलने पर लोगों में डर या भ्रम पैदा हो सकता है।

क्या Facebook और Instagram यूजर्स पर पड़ेगा असर?

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि हर यूजर की फीड में तुरंत कोई बड़ा बदलाव दिखाई देगा। लेकिन अगर Meta अपने रिकमेंडेशन सिस्टम में बदलाव करता है, तो यूजर्स को दिखाई देने वाली पोस्ट, वीडियो और अन्य कंटेंट की प्राथमिकता प्रभावित हो सकती है। मिसाल के तौर पर, किसी पब्लिक इवेंट से जुड़ा पुराना वीडियो अगर नए घटनाक्रम के नाम पर फैल रहा है, तो प्लेटफॉर्म उसकी पहुंच लिमिट कर सकता है। इसी तरह, किसी भ्रामक दावे को बार-बार सुझाए जाने से रोकने के लिए भी सिस्टम में बदलाव किए जा सकते हैं।

हालांकि, इस एडवाइजरी का मतलब यह नहीं है कि Facebook या Instagram पर सरकार की आलोचना करने वाला हर कंटेंट हटा दिया जाएगा। सरकार ने भी कहा है कि एडवाइजरी के तहत उठाए जाने वाले कदम Information Technology Act, 2000, IT Rules 2021 और अन्य लागू कानूनों के मुताबिक होने चाहिए। अब Meta को अपने कंटेंट रिकमेंडेशन और रैंकिंग सिस्टम की समीक्षा कर जरूरी कदम उठाने हैं और मंत्रालय को कार्रवाई की जानकारी देनी है। कंपनी की ओर से इस मामले पर प्रतिक्रिया सामने आने पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि वह सरकार की सलाह पर क्या बदलाव करने की प्लानिंग कर रही है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN