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IRDA के इस प्रपोजल से बीमा कंपनियों के शेयर क्रैश, ₹1.12 लाख करोड़ स्वाहा

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Source :- LIVE HINDUSTAN

बीमा कंपनियों के शेयरों में गुरुवार, 24 सितंबर को जमकर बिकवाली देखने को मिल रही है। HDFC Life हो SBI Life, ICICI Prudential हो या LIC,या फिर ICICI Lombard और PB Fintech ही क्यों न हों, सबकी पिटाई हो रही है। क्योंकि, भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने बीमा वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए दो हिस्सों वाला कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। बीमा खरीदने और बेचने के तरीके में बड़े बदलाव की तैयारी है। इसमें बीमा कंपनियों के खर्च, एजेंट और वितरकों के कमीशन, बैंक के जरिए बीमा बिक्री, मिस-सेलिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े कई प्रस्ताव रखे गए हैं।

₹1.12 लाख करोड़ स्वाहा

इस बिकवाली से 12 फाइनेंशियल स्टॉक्स की मार्केट कैपिटलाइजेशन में लगभग ₹1.12 लाख करोड़ की कमी आई, जिसमें बजाज फाइनेंस, PB फिनटेक, HDFC बैंक और एक्सिस बैंक की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही।

बजाज फाइनेंस की मार्केट वैल्यू में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। इससे कंपनी को लगभग ₹29,000 करोड़ का नुकसान हुआ। इसके बाद PB फिनटेक को लगभग ₹20,000 करोड़ जबकि HDFC बैंक और एक्सिस बैंक को क्रमशः लगभग ₹15,000 करोड़ और ₹14,000 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा। वहीं, HDFC लाइफ को ₹7,000 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ।

इन स्टॉक्स के अलावा, मैक्स फाइनेंशियल की मार्केट कैपिटलाइज़ेशन में ₹6,800 करोड़ की कमी आई, जबकि ICICI प्रूडेंशियल लाइफ को ₹3,000 करोड़ का नुकसान हुआ। इसके अलावा, एलएंडटी फाइनेंस की मार्केट वैल्यू में ₹6,200 करोड़ की गिरावट आई, जबकि इंडसइंड बैंक, IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में से हर एक को लगभग ₹3,000 करोड़ का नुकसान हुआ।

सबसे ज्यादा कौन गिरा?

TurtleMint सबसे बड़ा लूजर रहा। यह 20% के लोअर सर्किट पर ₹109.10 पर आ गया। पीबी फिनटेक भी 10% के लोअर सर्किट पर 1,701 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस 7.6% गिरकर दिन के निचले स्तर ₹448 पर आ गया। HDFC Life 5.6% टूटकर ₹530.15 पर पहुंचा। एसबीआई लाइफ 3.2% गिरकर ₹1,700 पर आया। ICICI Lombard 2.5% फिसलकर ₹1,466.05 पर रहा। LIC में 2% की गिरावट आई और यह ₹399 पर आ गया।

IRDAI क्या बदलाव चाहता है?

नियामक ने प्रबंधन खर्च (EoM) की लिमिट, कमीशन के ढांचे और गलत तरीके से बीमा बेचने से बचाव को लेकर बदलाव प्रस्तावित किए हैं।इस फ्रेमवर्क में EoM की सीमा घटाने और बीमा प्रोडक्ट तथा डिस्ट्रीब्यूशन चैनल के हिसाब से कमीशन पर अलग-अलग कैप लगाने की बात कही गई है।

प्रस्तावित नियम बीमा कंपनियों के डिस्ट्रीब्यूशन खर्च और अलग-अलग चैनलों पर मिलने वाले कमीशन के तरीके को बदल सकते हैं। IRDAI ने डिजिटल और ज्यादा पारदर्शी तरीके से बीमा खरीदने पर भी जोर दिया है।

कमीशन को लेकर क्या प्रस्ताव है?

प्रस्ताव का मकसद है कि बीमा कमीशन प्रोडक्ट की जटिलता और उसे बेचने में लगने वाली मेहनत के हिसाब से तय हो। साथ ही, प्रोडक्ट और डिस्ट्रीब्यूशन चैनल के हिसाब से अलग-अलग कैप लगाए जाएं। ‘ओपन आर्किटेक्चर’ मॉडल के तहत बेचे जाने वाले प्रोडक्ट्स, जिनमें ब्रोकर और बैंकों से बिकने वाले बीमा शामिल हैं, पर कम कमीशन का प्रस्ताव है। बैंक और ब्रोकर हेल्थ, मोटर और लाइफ इंश्योरेंस बेचने के बड़े चैनल हैं।

थर्ड-पार्टी मोटर बीमा कमीशन न देने का प्रस्ताव रखा

नियामक ने थर्ड-पार्टी मोटर बीमा जैसे जरूरी कवर पर बहुत कम या बिल्कुल कमीशन न देने का प्रस्ताव रखा है। बैंक और लेंडर जो लोन के साथ बीमा बेचते हैं, उनके कमीशन को प्रोडक्ट के हिसाब से 2% से 5% तक सीमित किया जा सकता है। साथ ही, लोन के साथ बीमा को जबरन जोड़कर बेचने पर रोक लगाने की बात कही गई है।

IRDAI ने इंडिविजुअल लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए तय प्रीमियम भुगतान अवधि यानी PPT के हिसाब से अलग-अलग कमीशन का प्रस्ताव दिया है। यह लिंक्ड और नॉन-लिंक्ड दोनों तरह की पॉलिसी पर लागू होगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN