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LIC OFS खुला: सरकार 6.5% तक हिस्सेदारी बेच रही, फ्लोर प्राइस और रिटेल की प्रमुख तारीखें

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भारत सरकार ने Life Insurance Corporation of India (LIC) में अपनी 6.5% तक हिस्सेदारी बेचने के लिए Offer for Sale (OFS) लॉन्च किया है। इसके लिए ₹382 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया गया है। बिक्री प्रक्रिया आज, 4 अगस्त, गैर-रिटेल निवेशकों के लिए शुरू हो रही है, जबकि रिटेल निवेशक 5 अगस्त से इसमें भाग ले सकेंगे।

## क्या जानना जरूरी है: प्रमुख तारीखें और छूट

– **गैर-रिटेल निवेशकों के लिए इश्यू की तारीख**: 4 अगस्त, 2026
– **रिटेल निवेशकों के लिए विंडो**: 5 अगस्त, 2026
– **प्रति शेयर फ्लोर प्राइस**: ₹382, जो 3 अगस्त के क्लोजिंग प्राइस—BSE पर ₹424.35 और NSE पर ₹428.50—से 10% की छूट दर्शाता है।

इस बिक्री के तहत लगभग **82.22 करोड़ शेयरों** की नीलामी का लक्ष्य है, जो पेश की जा रही 6.5% इक्विटी के बराबर है। यदि पूरी तरह सब्सक्राइब किया जाता है, तो इस कदम से सरकार के विनिवेश कोष में लगभग **₹31,000 करोड़** आ सकते हैं।

## अभी क्यों: नियामकीय और स्वामित्व संबंधी नियमों को पूरा करना

वर्तमान में सरकार के पास **LIC की 96.5% हिस्सेदारी** है। यह OFS LIC को Securities and Exchange Board of India (SEBI) द्वारा अनिवार्य **Minimum Public Shareholding (MPS)** की आवश्यकता को पूरा करने में मदद करने के लिए तैयार किया गया है। इसका लक्ष्य 16 मई, 2027 तक 10% पब्लिक फ्लोट हासिल करना है—यह बिक्री इस समयसीमा को तय समय से पहले पूरा करने में मदद करती है।

इस बिक्री में **2.5% हिस्सेदारी** की गारंटीकृत बिक्री शामिल है, जबकि अतिरिक्त **4% ग्रीन शू ऑप्शन** के साथ कुल 6.5% तक हिस्सेदारी बेचने की सुविधा होगी।

## बाजार की प्रतिक्रिया और वैल्यूएशन पर असर

घोषणा के बाद:

– LIC के शेयरों में **8.86% तक की गिरावट** आई और OFS शुरू होने के कुछ ही समय बाद NSE पर यह लगभग **₹390.50** पर कारोबार कर रहा था।
– फ्लोर प्राइस मौजूदा बाजार दरों से काफी नीचे होने के कारण शेयर का मूल्य OFS वैल्यूएशन की ओर समायोजित होने की संभावना है। जब बड़ी मात्रा में नई आपूर्ति बाजार में आती है, तो इस तरह का समायोजन सामान्य माना जाता है।

## विशेषज्ञ की राय: लिक्विडिटी और बाजार की गहराई

INVAsset PMS के Harshal Dasani इस OFS को LIC के नियंत्रण या रणनीति में बदलाव के बजाय मुख्य रूप से **लिक्विडिटी बढ़ाने और बाजार की गहराई मजबूत करने वाला कदम** मानते हैं।

Dasani का कहना है कि हिस्सेदारी बिक्री के बावजूद सरकार के पास LIC का नियंत्रणकारी स्वामित्व बना रहेगा। OFS से जुड़ी अस्थिरता कम होने के बाद LIC के दीर्घकालिक मूल्य के वास्तविक आधार उसके नए कारोबार की वृद्धि, मार्जिन के रुझान, निवेश से मिलने वाला रिटर्न और एम्बेडेड वैल्यू होंगे।

## वित्तीय दांव: पिछले IPO और विनिवेश का रिकॉर्ड

– LIC का पिछला बड़ा सार्वजनिक निर्गम **मई 2022** में हुआ था। उस समय सरकार ने **₹902–₹949** प्रति शेयर के प्राइस बैंड पर अपनी 3.5% हिस्सेदारी बेची थी और करीब **₹21,000 करोड़** जुटाए थे।
– चालू वित्त वर्ष में सात सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से मिले विनिवेश प्राप्तियों और Specified Undertaking of the Unit Trust of India (SUUTI) के योगदान को मिलाकर अब तक लगभग **₹21,082 करोड़** जुटाए जा चुके हैं।

## महत्वपूर्ण OFS प्रक्रिया और निवेशकों को क्या जानना चाहिए

– **फ्लोर प्राइस बनाम तय कीमत**
₹382 का फ्लोर प्राइस बोली की न्यूनतम राशि है। अंतिम आवंटित कीमत—जिसे डिस्कवर्ड या इश्यू प्राइस कहा जाता है—बोलियों के मूल्यांकन के बाद इस स्तर पर या इससे ऊपर तय की जाएगी। रिटेल निवेशक “कट-ऑफ” विकल्प चुन सकते हैं, जिसके तहत वे अंतिम रूप से तय होने वाली कीमत को स्वीकार करते हैं।

– **प्रमुख जोखिम**
मुख्य चिंता LIC के परिचालन प्रदर्शन को लेकर नहीं है; बल्कि यह है कि बाजार छूट पर बेची जा रही बड़ी हिस्सेदारी को किस हद तक समाहित कर पाता है। शेयरों की अतिरिक्त आपूर्ति निकट अवधि में कीमतों को सीमित रख सकती है।

– **इससे क्या नहीं बदलेगा**
OFS से सरकार का राजस्व बढ़ेगा और नियामकीय सीमाएं पूरी होंगी, लेकिन इससे LIC की बैलेंस शीट या आय प्रोफाइल में बदलाव नहीं होगा। कारोबार की बुनियादी स्थिति आगे भी वृद्धि, मार्जिन में सुधार, निवेश के परिणामों और अंतर्निहित मूल्य से तय होगी।

## आगे क्या देखना होगा

– संस्थागत निवेशक कितनी आक्रामकता से भाग लेते हैं
– अंतिम सब्सक्रिप्शन स्तर और कीमतों पर प्रभाव
– 30 जून, 2026 को समाप्त तिमाही के लिए LIC के earnings results को **6 अगस्त** को मंजूरी मिलने की उम्मीद है। उसी दिन **शाम 7:00 बजे IST** earnings call निर्धारित है।

ये संकेतक न केवल LIC की निकट अवधि की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे, बल्कि यह भी निर्धारित करेंगे कि भविष्य में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के विनिवेश किस तरह तैयार किए जाएंगे और बाजार उन्हें किस प्रकार स्वीकार करेगा।

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