Source :- LIVE HINDUSTAN
भारत में पेट्रोलियम कंपनियों पर रसोई गैस (LPG) की बिक्री का दबाव अभी भी बना हुआ है। हालांकि, हाल के दिनों में कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में नरमी देखने को मिली है और पेट्रोल-डीजल पर होने वाला घाटा भी कम हुआ है, लेकिन घरेलू LPG सिलेंडर पर कंपनियों को अब भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, घरेलू गैस सिलेंडर पर तेल कंपनियों को लगभग 700 रुपये प्रति सिलेंडर का घाटा हो रहा है। दूसरी ओर पेट्रोल पर नुकसान घटकर करीब 3 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 27 रुपये प्रति लीटर रह गया है। यह स्थिति बताती है कि फिलहाल LPG कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है।
सरकार के अनुसार, एक घरेलू LPG सिलेंडर को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की कुल लागत 1,600 रुपये से अधिक हो चुकी है, जबकि ग्राहकों से वसूली जाने वाली कीमत इससे काफी कम है। इसी वजह से हर सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये का अंतर यानी अंडर-रिकवरी हो रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG के लिए इस्तेमाल होने वाला सऊदी CP (Contract Price) फरवरी के बाद से करीब 46 प्रतिशत तक बढ़ चुका है, जिससे कंपनियों की लागत और बढ़ गई है।
दिलचस्प बात यह है कि कुछ समय पहले तक LPG पर होने वाला घाटा करीब 380 रुपये प्रति सिलेंडर बताया जा रहा था, लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव और सप्लाई संबंधी चुनौतियों के कारण यह नुकसान लगभग दोगुना हो गया। सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां लंबे समय से इस अतिरिक्त बोझ को खुद वहन कर रही हैं, ताकि उपभोक्ताओं पर अचानक कीमतों का बड़ा असर न पड़े।
पेट्रोल और डीजल की बात करें तो स्थिति अब पहले की तुलना में बेहतर हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने तथा युद्धविराम जैसी स्थितियों के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। इसका फायदा भारतीय तेल कंपनियों को भी मिला है। हालांकि, मई महीने में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी की गई थी, लेकिन इसके बावजूद कंपनियां पूरी लागत वसूल नहीं कर पाई थीं। एक समय ऐसा भी था, जब पेट्रोल पर करीब 24 रुपये और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर तक का दबाव बताया जा रहा था। अब यह घाटा काफी हद तक कम हो गया है।
पेट्रोल-डीजल और एक्सपोर्ट ड्यूटी से जुड़े प्रमुख फैसले (2026)
| तारीख | कार्रवाई / फैसला |
|---|---|
| 27 मार्च 2026 | पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में ₹10 प्रति लीटर की कटौती की गई |
| 27 मार्च 2026 | पेट्रोल, डीजल और ATF (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) पर निर्यात शुल्क (Export Duty) लगाया गया |
| 15 मई 2026 | पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पहली बढ़ोतरी की गई |
| 19 मई 2026 | ईंधन कीमतों में दूसरी बार बढ़ोतरी हुई |
| 23 मई 2026 | पेट्रोल-डीजल के दामों में तीसरी बढ़ोतरी दर्ज की गई |
| 25 मई 2026 | चौथी बार कीमतें बढ़ीं, कुल बढ़ोतरी ₹7 प्रति लीटर से अधिक हो गई |
| 1 जून 2026 | पेट्रोल, डीजल और ATF पर लगाए गए निर्यात शुल्क में कमी की गई |
मार्च 2026 में सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी, ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। साथ ही पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी भी लगाई गई थी। इसके बाद मई में 4 स्टेप में फ्यूल प्राइस में बढ़ोतरी की गई। फिर जून की शुरुआत में एक्सपोर्ट ड्यूटी में कुछ राहत दी गई, जिससे बाजार में संतुलन बनाने की कोशिश हुई।
फिलहाल, सरकार जल्दबाजी में किसी नए फ्यूल प्राइस संशोधन के मूड में नहीं दिख रही है। अधिकारियों का मानना है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी का फायदा सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा या नहीं। हालांकि, एक राहत की बात यह है कि LPG की सप्लाई व्यवस्था अब काफी हद तक सामान्य हो चुकी है। गैस बुकिंग का बैकलॉग घटकर करीब 3.3 दिन रह गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सप्लाई चेन पर पड़ा दबाव अब कम हो रहा है।
पेट्रोल और डीजल के मोर्चे पर स्थिति सुधरती दिख रही है, लेकिन LPG अभी भी तेल कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल और सरकारी नीतियां तय करेंगी कि उपभोक्ताओं को राहत मिलती है या नहीं।
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