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भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का सबसे चर्चित आईपीओ (IPO) अब हकीकत बनने जा रहा है। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने बाजार नियामक सेबी (SEBI) के पास अपना ड्रॉफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर दिया है। इस कदम के साथ ही NSE का आईपीओ लॉन्च होने की संभावना काफी बढ़ गई है। मार्केट एक्सपर्ट का मानना है कि यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ साबित हो सकता है। बता दें कि एक्सचेंज (NSE) ने अपने प्रस्तावित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए 20 इन्वेस्टमेंट बैंकों को बुक रनिंग लीड मैनेजर (BRLM) के तौर पर नियुक्त किया है। यह किसी एक पब्लिक ऑफरिंग के लिए अब तक की सबसे बड़ी नियुक्तियों में से एक है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

5 सरकारी संस्थाएं बेचेंगी 2.37 करोड़ शेयर

इस प्रस्तावित आईपीओ में नई पूंजी जुटाने की बजाय केवल मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। इस तरीके को ऑफर फॉर सेल (OFS) कहा जाता है। दस्तावेजों के अनुसार, SBI, IDBI बैंक, SBI कैपिटल मार्केट्स, IFCI और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसी 5 सरकारी संस्थाएं मिलकर लगभग 2.37 करोड़ शेयर बेचने की योजना बना रही हैं। इन संस्थाओं में IDBI बैंक सबसे बड़ा हिस्सेदार है, जो करीब 74 लाख शेयर बेच सकता है। इसके बाद SBI लगभग 64 लाख शेयर, SBI कैपिटल मार्केट्स 53 लाख शेयर, IFCI 34 लाख शेयर और बैंक ऑफ बड़ौदा लगभग 11 लाख शेयर बेचने की तैयारी में हैं।

LIC और D-Mart का बड़ा फैसला

दिलचस्प बात यह है कि कुछ बड़े निवेशकों ने इस आईपीओ में अपनी हिस्सेदारी बेचने से इनकार कर दिया है। एलआईसी (LIC), प्रेमजी इन्वेस्ट (Wipro) और दिग्गज निवेशक राधाकिशन दमानी (D-Mart) अपने शेयर बनाए रखेंगे। इसे बाजार में NSE के भविष्य को लेकर सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

बिक्री के लिए 14.89 करोड़ इक्विटी शेयर

आईपीओ के तहत कुल 14.89 करोड़ इक्विटी शेयर बिक्री के लिए पेश किए जाएंगे, जो NSE की कुल चुकता पूंजी का लगभग 6 प्रतिशत हिस्सा है। बाजार में NSE का अनुमानित मूल्यांकन करीब 5 लाख करोड़ रुपये बताया जा रहा है। अगर यह मूल्यांकन बरकरार रहता है, तो आईपीओ का आकार लगभग 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यह भारत के अब तक के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल होगा।

भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज?

NSE सिर्फ भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज ही नहीं है, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े इक्विटी डेरिवेटिव्स एक्सचेंजों में भी शामिल है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में इसके प्लेटफॉर्म पर 36 अरब से अधिक डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स का कारोबार हुआ। इसके अलावा नकद बाजार (Cash Market) में भी NSE भारत का सबसे बड़ा एक्सचेंज बना हुआ है।

वित्तीय प्रदर्शन कैसा है?

वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो NSE की स्थिति बेहद मजबूत है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में कंपनी का ऑपरेशन रेवेन्यू बढ़कर 16,601 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि नेट प्रॉफिट 10,302 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। हालांकि, पिछले साल की तुलना में मुनाफे में कुछ कमी आई, लेकिन कंपनी की कमाई और नकदी प्रवाह अब भी मजबूत बने हुए हैं।

टेक्निकल पार्ट भी मजबूत

टेक्निकल क्षमता के मामले में भी NSE सबसे आगे है। मार्च 2026 तक इसका सिस्टम प्रतिदिन औसतन 12 से 14 अरब मैसेज प्रॉसेस कर रहा था। यही वजह है कि इसे दुनिया के सबसे एडवांस ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स में गिना जाता है।

साल का सबसे बड़ा IPO

एक्सपर्ट का मानना है कि NSE का आईपीओ भारतीय पूंजी बाजार के लिए ऐतिहासिक अवसर साबित हो सकता है। अब निवेशकों की निगाहें सेबी की मंजूरी और आईपीओ की अंतिम तारीख पर टिकी हुई हैं। अगर सब कुछ योजना के अनुसार चलता है, तो यह साल का सबसे बड़ा और सबसे चर्चित निवेश अवसर बन सकता है।

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