Home rss business hindi NSE के प्री-ओपन सेशन नियमों में होगा बदलाव, ट्रेडिंग करने वालों के...

NSE के प्री-ओपन सेशन नियमों में होगा बदलाव, ट्रेडिंग करने वालों के लिए है अपडेट

3
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

अगर आप शेयर बाजार में ट्रेडिंग करते हैं तो ये खबर आपके लिए है। दरअसल, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के प्री-ओपन सेशन के नियमों में 7 सितंबर से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। NSE के मुताबिक नए नियमों का मकसद बाजार में ऑर्डर और प्राइस डिस्कवरी की प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित करना है। आइए डिटेल में जान लेते हैं कि क्या बदले हैं नियम।

क्या हुए हैं बदलाव?

मुख्य बदलाव में ऑर्डर-एंट्री के समय को दो चरणों में बांटना और दूसरे चरण के दौरान मार्केट ऑर्डर पर पाबंदियां लगाना शामिल है। 7 सितंबर से प्री-ओपन सेशन का पहला चरण सुबह 9:00 बजे से 9:05 बजे तक चलेगा। इस दौरान निवेशक लिमिट और मार्केट दोनों तरह के ऑर्डर डाल सकेंगे। ऑर्डर में बदलाव और उसे कैंसल करने की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। इसके बाद दूसरा चरण 9:05 बजे से 9:10 बजे तक चलेगा। इस दौरान केवल लिमिट ऑर्डर डालने, उनमें बदलाव करने या उन्हें कैंसल करने की अनुमति होगी। मार्केट ऑर्डर इस चरण में स्वीकार नहीं किए जाएंगे और उन्हें रिजेक्ट कर दिया जाएगा। NSE अंतिम दो मिनट के दौरान यानी 9:08 बजे से 9:10 बजे के बीच किसी भी समय ऑर्डर कलेक्शन की प्रक्रिया को अचानक बंद भी कर सकता है। इसे रैंडम क्लोजर कहा जाता है। इस बदले हुए स्ट्रक्चर का मकसद प्री-ओपन सेशन को इक्विटी कैश मार्केट में सेबी द्वारा शुरू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के साथ तालमेल बिठाना है।

ऑर्डर-मैचिंग और ट्रेड-कन्फर्मेशन सेशन सुबह 9:10 बजे से 9:12 बजे तक चलेगा। अभी का समय सुबह 9:08 बजे से 9:12 बजे तक है। इस दौरान, ओपनिंग प्राइस तय किया जाएगा, ऑर्डर मैच किए जाएंगे और ट्रेड कन्फर्म किए जाएंगे। इसके बाद सुबह 9:12 बजे से 9:15 बजे तक एक बफर पीरियड होगा ताकि प्री-ओपन सेशन से सामान्य यानी लगातार चलने वाले कारोबार में आसानी से बदलाव किया जा सके। बता दें कि NSE का प्री-ओपन सेशन इक्विटी मार्केट की सभी संबंधित सिक्योरिटीज पर लागू होता है। इसमें SME सिक्योरिटीज, पार्टली पेड-अप शेयर, InvITs और REITs भी शामिल हैं।

NSE बदलाव क्यों कर रहा है?

NSE प्री-ओपन सेशन के फ्रेमवर्क में इसलिए बदलाव कर रहा है ताकि ओपनिंग प्राइस-डिस्कवरी प्रोसेस को 4 अगस्त को इक्विटी कैश मार्केट में शुरू किए गए नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) मैकेनिज्म के साथ जोड़ा जा सके। यह उन कैश-मार्केट स्टॉक्स पर लागू होता है जिनके डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स हैं और इसमें ऑक्शन-बेस्ड मैकेनिज्म का इस्तेमाल होता है, जो क्लोजिंग प्राइस तय करने के लिए खरीदने और बेचने की इच्छा को लिक्विडिटी के एक ही पूल में इकट्ठा करता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN