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जब भी हम क्राइम थ्रिलर या चोर-पुलिस जैसे शब्द सुनते हैं, तो दिमाग में तुरंत अंधाधुंध गोलियां, खून-खराबा और मार-धाड़ की तस्वीरें उभरने लगती हैं। लेकिन साल 2021 में आई एक वेब सीरीज ने इस घिसे-पिटे फॉर्मूले को पूरी तरह से बदल दिया। डायरेक्टर अजय भुइयां के निर्देशन में बनी ये 11 एपिसोड की सीरीज बाहुबल और बंदूकों के शोर पर नहीं, बल्कि दिमाग के खेल, कमाल के सस्पेंस और भेष बदलने की अद्भुत कला पर टिकी है। ये कहानी रोंगटे खड़े करने वाले एक ऐसे दिमागी खेल की है, जहां हथियार से ज्यादा शातिर दिमाग की कीमत है।
क्या है कहानी?
सीरीज का ताना-बाना मत्स्य थाडा (रवि दुबे) के इर्द-गिर्द बुना गया है, जो अपनी हैरतअंगेज सूझबूझ के दम पर देश का सबसे बड़ा और शातिर कॉन-आर्टिस्ट (ठग) बन जाता है। अतीत में अपने परिवार के साथ हुए एक भयानक अन्याय का बदला लेने की आग में झुलस रहा मत्स्य जब जेल पहुंचता है, तो उसकी जिंदगी का रुख बदल जाता है। वहां उसे मिलते हैं आनंद पंडित (पियूष मिश्रा), जो जेल में उसके गुरु बनते हैं। आनंद उसे हथियार उठाना नहीं, बल्कि महाभारत के कूटनीतिक सूत्रों को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाना सिखाते हैं। जेल की सलाखों से बाहर आते ही मत्स्य कोई छोटी-मोटी चोरी नहीं करता, बल्कि देश के बड़े-बड़े रईसों और भ्रष्ट सिस्टम को अपनी उंगलियों पर नचाना शुरू कर देता है। लेकिन इस बिल्ली-चूहे के खेल में असली भूचाल तब आता है, जब मत्स्य का साम्राज्य ढहाने के लिए एंट्री होती है एसीपी तेजराज सिंह (रवि किशन) की। तेजराज कोई सीधा पुलिसवाला नहीं है, वो अपराधी को पकड़ने के लिए खुद अपराधी की तरह सोचने का माद्दा रखता है। इसके बाद शुरू होता है शह और मात का एक ऐसा हाई-स्टेक्स ड्रामा, जहां हर मोड़ पर सस्पेंस की एक नई परत खुलती है।
महाभारत के धागों से बुनी पटकथा
इस सीरीज की सबसे बड़ी खासियत इसका पौराणिक कनेक्शन है। सीरीज के सभी 11 एपिसोड्स के नाम महाभारत के किरदारों या घटनाओं पर रखे गए हैं (जैसे: अभिमन्यु, भस्मासुर, मोहिनी अवतार, चौसर आदि)। हर एपिसोड में मत्स्य जो ‘कांड’ यानी ठगी को अंजाम देता है, उसका ताना-बाना महाभारत की रणनीतियों से प्रेरित होता है, जो दर्शकों को कहानी से बांधे रखता है।
कलाकारों का दमदार अभिनय
रवि दुबे (मत्स्य थाडा): इस सीरीज को रवि दुबे के करियर का टर्निंग पॉइंट कहा जाए तो गलत नहीं होगा। उन्होंने पूरी सीरीज में करीब 11 अलग-अलग अवतार लिए हैं। प्रोस्थेटिक मेकअप की मदद से वे हर किरदार में इस तरह ढले हैं कि उन्हें पहचानना भी मुश्किल हो जाता है। उनकी बॉडी लैंग्वेज और डायलॉग डिलीवरी कमाल की है।
रवि किशन (एसीपी तेजराज सिंह): रवि किशन ने एक सनकी, अड़ियल और बेहद चालाक पुलिस अफसर के किरदार में जान फूंक दी है। रवि दुबे के शांत और शातिर अंदाज के सामने रवि किशन का आक्रामक और देसी लहजा स्क्रीन पर एक बेहतरीन बैलेंस बनाता है।
पियूष मिश्रा (आनंद पंडित): हमेशा की तरह पियूष मिश्रा ने अपने दार्शनिक और गंभीर अंदाज से स्क्रीन पर एक अलग ही छाप छोड़ी है। उनके बोले गए संवाद सीरीज़ की गहराई को बढ़ाते हैं।
जोया अफरोज और मधुर मित्तल: मत्स्य की टीम के अहम सदस्यों के रूप में जोया (उर्वशी) और मधुर (राजू) ने कहानी को आगे बढ़ाने में बेहतरीन सहयोग दिया है।
क्यों देखनी चाहिए ये सीरीज?
इस सीरीज का नाम ‘मत्स्य कांड’ है। ये सीरीज सिर्फ एक क्राइम स्टोरी नहीं है, बल्कि ये एक हाई-स्टेक्स एंटरटेनर है। जयपुर, मेरठ और दिल्ली के वास्तविक लोकेशंस पर शूट की गई इस सीरीज की सिनेमैटोग्राफी और बैकग्राउंड स्कोर इसके मिजाज से पूरी तरह मेल खाते हैं। हालांकि, कुछ जगहों पर स्क्रीनप्ले थोड़ा खिंचा हुआ जरूर लगता है, लेकिन रवि दुबे और रवि किशन की जबरदस्त टक्कर उस कमी को पूरा कर देती है। यदि आप एक ऐसी वेब सीरीज देखना चाहते हैं जिसमें सिर्फ गोलियों की आवाज न हो, बल्कि दिमाग के घोड़ों को भी दौड़ाना पड़े, तो ‘मत्स्य कांड’ आपके लिए एक बेहतरीन वॉच है।
किस ओटीटी पर है ये सीरीज?
इस सीरीज की आईएमडीबी रेटिंग 8.5 है और आप इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म एमएक्स प्लेयर पर देख सकते हैं।
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