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PM मोदी मार्च रुकने के बाद E20 पेट्रोल नीति पर AAP विरोध, केजरीवाल-सिसोदिया धरने बैठे

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दिल्ली में मंगलवार को उस समय नाटकीय गतिरोध देखने को मिला, जब आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें Arvind Kejriwal और Manish Sisodia शामिल थे, ने Firoz Shah Road पर धरना दिया। पुलिस ने उन्हें प्रधानमंत्री Narendra Modi के आवास की ओर जाने से रोक दिया था। इस विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य केंद्र की E20 पेट्रोल नीति के खिलाफ देशभर के नागरिकों से प्राप्त 230,000 याचिकाएं सौंपना था। इस नीति के तहत ethanol-मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल अनिवार्य है।

## AAP ने विरोध क्यों किया

E20 नीति को Union government ने पेट्रोल में ethanol blending को बढ़ावा देने के लिए आधिकारिक रूप से मंजूरी दी है, लेकिन AAP के अनुसार, इसने वाहन मालिकों में असंतोष पैदा किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह नीति वाहनों को नुकसान पहुंचा रही है और उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना blended fuel के इस्तेमाल को मजबूर कर रही है।

प्रदर्शन के दौरान Arvind Kejriwal ने दो प्रमुख मांगों पर जोर दिया:

1. लोगों को शुद्ध पेट्रोल और E20 fuel के बीच चयन का अधिकार मिलना चाहिए।
2. यदि E20 को बढ़ावा दिया जा रहा है, तो इसे कम कीमत पर बेचा जाना चाहिए।

दबाव बनाने के लिए AAP देशभर में हस्ताक्षर अभियान चला रही है और “Ethanol Town Hall” बैठकें आयोजित कर रही है। Kejriwal ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर सीधे अपनी चिंताएं रखने के लिए बैठक का अनुरोध भी किया।

## घटनाक्रम की समयरेखा

– मार्च की शुरुआत करीब 100 समर्थकों के साथ हुई, जो पूरे भारत से एकत्र की गई याचिकाओं के बंडल लेकर चल रहे थे।
– जैसे ही समूह Firoz Shah Road के पास पहुंचा, पुलिस ने हस्तक्षेप किया और प्रधानमंत्री के आवास वाले क्षेत्र की ओर आगे बढ़ने से रोक दिया। एक पुलिस सूत्र ने कहा, “5, Firoz Shah Road से आगे किसी को जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी,” और इसके लिए पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों से जुड़े सुरक्षा उपायों का हवाला दिया।
– नाकेबंदी के बाद Kejriwal, Sisodia, Jasmine Shah और कई कार्यकर्ता सड़क पर बैठकर विरोध करने लगे।

## विपक्ष की प्रतिक्रिया: BJP का दृष्टिकोण

Bharatiya Janata Party (BJP) ने इस विरोध प्रदर्शन को राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया और Kejriwal पर “विफल राजनीति” करने का आरोप लगाया। BJP के राष्ट्रीय महासचिव Tarun Chugh ने कहा कि मार्च और याचिका अभियान किसानों के हितों के लिए खतरा है, क्योंकि ethanol का उत्पादन maize और sugarcane जैसी प्रमुख फसलों को समर्थन देता है।

Chugh ने यह भी कहा कि E20 नीति को कठोर वैज्ञानिक आधार और उचित नियामकीय मंजूरी के बाद लागू किया गया है तथा वाहनों को नुकसान पहुंचने के दावों को खारिज किया। उन्होंने Kejriwal के रुख को दिखावटी और कृषि क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के लिए नुकसानदेह बताया।

## संदर्भ: E20 नीति के पीछे क्या है

सवालों के घेरे में आई इस नीति के तहत पेट्रोल में 20% ethanol होना अनिवार्य है, जिसे E20 कहा जाता है। Union government इसे उत्सर्जन कम करने और biofuel के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम मानती है। जहां ethanol blending से पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े लाभ मिल सकते हैं, वहीं AAP और कुछ वाहन मालिकों का मानना है कि इसके मौजूदा क्रियान्वयन में गंभीर कमियां हैं। इनमें शामिल हैं:

– अधिक ethanol content के लिए अनुकूलित नहीं किए गए वाहनों में इंजन या fuel system के घिसने की आशंका।
– पारंपरिक पेट्रोल का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के बीच अनिश्चितता।
– blended fuel का विरोध करने वालों के लिए कीमत में लाभ या चयन का विकल्प नहीं होना।

## विरोध प्रदर्शन और नीति के बीच

जहां विरोध प्रदर्शनों को सार्वजनिक स्तर पर अधिक दृश्यता मिली है, वहीं BJP का कहना है कि E20 को उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए लागू किया गया है और इसके पीछे वैज्ञानिक आधार तथा नियामकीय निगरानी मौजूद है।

वहीं Kejriwal और Sisodia केंद्र सरकार के साथ सीधे संवाद की मांग कर रहे हैं। उनका उद्देश्य ethanol blend की अनिवार्यता से असंतुष्ट लोगों की आवाज को मजबूती से उठाना और नीति में संशोधन के लिए दबाव बनाना है।

## आगे क्या होगा

AAP दबाव बनाए रखने के लिए तैयार दिख रही है। एकत्र की गई याचिकाएं प्रधानमंत्री कार्यालय में सौंपने और हस्ताक्षर अभियानों तथा सोशल मीडिया के माध्यम से जनसंपर्क जारी रखने की योजनाएं बनाई जा रही हैं।

सरकार, विशेष रूप से BJP, ethanol के व्यापक पर्यावरणीय और आर्थिक लाभों पर जोर देते हुए जवाब दे सकती है। E20 को सही ठहराने के लिए case studies, cost-benefit analysis और वैश्विक उदाहरण भी प्रस्तुत किए जा सकते हैं। दोनों पक्षों के अपने-अपने रुख पर कायम रहने के बीच E20 पर बहस निकट भविष्य में राष्ट्रीय विमर्श में प्रमुख बनी रहने की संभावना है।

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