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Pakistan News today: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बड़े चुनावी उलटफेर के साथ प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन सरकार बनाने की मजबूत स्थिति में पहुंच गई है।
पाकिस्तान के अवैध कब्ले वाले कश्मीर (PoK) में बड़ा चुनावी उलटफेर देखने को मिला है। दो पूर्व प्रधानमंत्रियों के पारंपरिक गढ़ हारने के बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन अगली सरकार बनाने की मजबूत स्थिति में पहुंच गई है। सोमवार को चार विधानसभा क्षेत्रों में हुए मतदान के बाद ये नतीजे सामने आए। तीसरे चरण की चार सीटों में से पीपीपी ने दो सीटें जीतीं, जबकि पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और आवामी दस्त-ओ-बाजू पार्टी ने एक-एक सीट हासिल की। आवामी दस्त-ओ-बाजू पार्टी को जमात-ए-इस्लामी और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) दोनों का समर्थन प्राप्त है।
अब तक आए नतीजों के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री और मुस्लिम कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सरदार अतीक अहमद खान (जिन्हें पीएमएल-एन का समर्थन था) वेस्टर्न बाग के धीरकोट क्षेत्र में आवामी दस्त-ओ-बाजू पार्टी के उम्मीदवार सरदार साजिद इकबाल से हार गए हैं। यह सीट 1985 से मुस्लिम कॉन्फ्रेंस/पीएमएल-एन के पास रही है। सेंट्रल बाग में पीपीपी के जिया कमर ने पीएमएल-एन उम्मीदवार मुश्ताक मिन्हास को हराकर सीट बरकरार रखी।
पूर्व प्रधानमंत्री सरदार तनवीर इलियास, जो इस्तेहकाम-ए-पाकिस्तान पार्टी में शामिल हो चुके थे, को महज कुछ हजार वोट ही मिले। ईस्टर्न बाग में 12 पोलिंग स्टेशनों पर दोबारा मतदान के आदेश के बावजूद नतीजे लंबित हैं। वहां उपलब्ध 174 पोलिंग स्टेशनों के नतीजों के आधार पर पीएमएल-एन उम्मीदवार सरदार मीर अकबर आगे चल रहे हैं, जबकि पीपीपी उम्मीदवार सरदार कमरज जमान खान दूसरे स्थान पर हैं।
बता दें कि ये चुनाव ऐसे समय में हुए जब पाकिस्तानी सरकार ने पीओके में महीनों से चल रहे विरोध आंदोलन के प्रति अपना रुख बदला है। मतदान के अंतिम चरण से कुछ दिन पहले रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने प्रदर्शनकारियों को ‘पाकिस्तान का दुश्मन’ करार देते हुए बातचीत से इनकार कर दिया था। लेकिन प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने बाद में कहा कि जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) से जुड़े 99 प्रतिशत लोग ‘देशभक्त भाई’ हैं। उन्होंने वादा किया कि पीएमएल-एन सरकार इस समूह से बात करेगी और उनकी मांगों के समाधान की कोशिश करेगी।
25 सीटें जीत चुकी है पीएमएल-एन
बयान में यह बदलाव तब आया जब पीएमएल-एन चुनाव में बड़ी ताकत के रूप में उभरी और क्षेत्र में अगली सरकार बनाने की ओर बढ़ रही है। अब तक सीधे चुनी गई 45 सीटों में से पार्टी ने 25 पर जीत हासिल की है, जबकि पीपीपी को 12 और आवामी दस्त-ओ-बाजू पार्टी को एक सीट मिली है। 27 जुलाई और 2 अगस्त को हुए पहले दो चरणों में भी हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए और बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगे। दोनों प्रमुख दलों ने एक-दूसरे पर चुनावी गड़बड़ी का आरोप लगाया। कई पोलिंग स्टेशनों पर समर्थकों के बीच झड़पें भी हुईं।
गौरतलब है कि जेएएसी जून की शुरुआत से पूरे इलाके में प्रदर्शन कर रहा है। इसकी प्रमुख मांगों में 12 रिफ्यूजी सीटों को खत्म करना शामिल है। कमेटी का आरोप है कि इन सीटों का इस्तेमाल पीओके में सरकार बनाने में हस्तक्षेप के लिए किया जा सकता है। जेएएसी का दावा है कि पहले चरण की हिंसा में 40 से अधिक लोग मारे गए और विरोध शुरू होने के बाद से अब तक करीब 400 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है। पाकिस्तानी सरकार ने इन आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया बताते हुए खारिज कर दिया है, जबकि सनाउल्लाह ने स्वीकार किया कि अशांति में हुई मौतें ‘दोहरे अंकों’ में थीं।
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