Source :- LIVE HINDUSTAN
अगर जिंदगी में कुछ बड़ा करने की ठान लो तो कुछ भी करना असंभव नहीं होता। इस बात को बनारस के रहने वाले गोविंद जायसवाल ने साबित करके दिखाया। उनके पिता रिक्शा चलाते थे और उन्होंने पहले ही प्रयास में UPSC जैसी कठिन परीक्षा पास की। चलिए गोविंद की सक्सेस स्टोरी बताते हैं।
Success Story of Govind Jaiswal: कहते हैं अगर आप कुछ करने की ठान लो तो कुछ भी करना मुश्किल नहीं है। ऐसी ही कहानी है गोविंद जायसवाल की जिन्होंने पहले ही प्रयास में UPSC जैसी कठिन परीक्षा निकाल ली। उनके घर के हालात और स्थिति बिल्कुल भी सामान्य नहीं थे और कई संघर्षों से जूझने के बाद उन्होंने पढ़ाई को जारी रखा। सिर्फ पढ़ाई नहीं पूरी की बल्कि देश का सबसे कठिन एग्जाम निकालकर IAS अधिकार भी बने। आज हम आपको गोविंद की सक्सेस स्टोरी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने मुश्किल हालातों का सामना करते हुए पढ़ाई की और एक अपमान ने उनकी पूरी जिंदगी बदलकर रख दी थी। इस समय गोविंदा जायसवाल दिल्ली के शिक्षा मंत्रालय में हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट में ज्वाइंट सेक्रेटरी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
बनारस में रहते थे गोविंद
बनारस में अपने परिवार के साथ गोविंद जायसवाल रहते थे। उनके पिता रिक्शा चलाते थे और मां गृहणी थी। इसके अलावा तीन बहनें थीं। उनके माता-पिता ने गरीबी होते हुए भी बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी और उन्हें सरकारी स्कूल में पढ़ाया। जब गोविंद 7वीं कक्षा में थे, तब उनकी मां का निधन ब्रेन हेमरेज के कारण हो गया था और इस घटना ने पूरे परिवार को तोड़ दिया था। पिता और 3 बहनों के साथ एक कोठरी में रहना काफी मुश्किल हो गया था और इलाज में हुए खर्च के कारण घर के हालात भी काफी बिगड़ चुके थे।
ऑटो चालक बनाना चाहते थे पिता
गोविंद के पिता चाहते थे कि अब बेटा भी ऑटो चलाने लगे तो कुछ पैसे घर में आने लगेंगे। उन्होंने सोचा कि मैं रिक्शा चलाता हूं और बेटा ऑटो चलाएगा तो कमाई होगी और ऐसे बहनों की शादी कर पाएंगे। हालांकि, गोविंद पढ़कर कुछ बनना चाहते थे वह रिक्शा नहीं चलाना चाहते थे।
अपमान ने बदली जिंदगी
जब गोविंद 11 साल के थे तब वह अपने दोस्त के घर गए हुए थे, वहां पर कुछ लोगों ने उनके पिता के रिक्शा चलाने पर ताने दिए। लोगों ने ये भी कहा कि तुम्हें भी यही काम करना है। बस ये अपमान गोविंद के दिल तक जा पहुंचा और चोट की तरह लगा। इसके बाद ही उन्होंने ठान लिया कि अब कुछ करके ही दिखाना है, रिक्शा नहीं चलाना है।
IAS बनने का फैसला
गांव के एक बुजुर्ग ने उन्होंने यूपीएससी के बारे में बताया और वही से गोविंद ने आईएएस अधिकारी बनने का फैसला किया। पिता ने जमीन बेचकर बेटे को पढ़ने के लिए दिल्ली भेजा। वहां पर मैथ्य की ट्यूशन पढ़ाकर और एक टाइम खाना ना खाकर गोविंद ने पैसे बचाए और उसी से किराए पर कमरा लिया और किताबें खरीदीं। कड़ी मेहनत और लगन के साथ गोविंद ने पहले ही प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा निकाल ली। साल 2006 में गोविंद ने 48वीं रैंक हासिल की और अधिकारी बनकर दिखाया। गोविंद आज लाखों युवाओं की प्रेरणा है और उनकी कहानी बताती है कि अगर आप कुछ ठान लेते हैं, तो उसे पूरा करना ज्यादा मुश्किल नहीं होता, बस आपकी मेहनत और लगन चाहिए होती है।
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