Source :- LIVE HINDUSTAN
Tata Sons IPO: RBI के आदेश के बाद अब टाटा संस ने आईपीओ लाने की तैयारी शुरू होने वाली है। इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार फरवरी 2027 में टाटा संस का आईपीओ आ सकता है। अगर टाटा संस का आईपीओ आता है तो यह भारतीय शेयर के इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ में से एक हो सकता है। बता दें, आईपीओ के लिए टाटा संस को पहले इनवेस्टमेंट बैंकर्स और अन्य एडवाइजर्स को नियुक्त करना है।
IPO को एकमत नहीं है लीडरशिप
आईपीओ को लेकर मौजूदा समय में टाटा की लीडरशिप एकमत नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने लिस्टिंग के फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि मौजूदा कानूनी विकल्पों की तलाश की जानी चाहिए। बता दें, टाटा संस में मुख्य शेयरहोल्डर्स टाटा ट्रस्ट्स ही है। इसमें से भी सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के पास 28 प्रतिशत हिस्सा है। और सर रतन टाटा ट्रस्ट के पास 23.60 प्रतिशत हिस्सा है। इसके अलावा जेआरटी टाटा ट्रस्ट के पास 4 प्रतिशत, टाटा एजुकेशन ट्र्स्ट के पास 3.7 प्रतिशत, टाटा सोशल वेलफेयर ट्र्स्ट के पास 3.7 प्रतिशत, आरडी टाटा ट्रस्ट के पास 2.2 प्रतिशत हिस्सा है।
शापूरजी पालोनजी के पास भी टाटा ट्रस्ट में 18 प्रतिशत हिस्सा है। यह ग्रुप लगातार आईपीओ लाने का पुरजोर समर्थन कर रहा है।
20 लाख करोड़ रुपये का हो सकता है वैल्यूएशन
रिपोर्ट के मुताबिक, संभावित आईपीओ भारत के सबसे बड़े आईपीओ में से एक हो सकता है। विभिन्न रिपोर्ट में इसका आकार कम-से-कम पांच अरब डॉलर रहने जबकि कंपनी का मूल्यांकन 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, अंतिम रूप इस पर निर्भर करेगा कि टाटा संस कितनी हिस्सेदारी बेचने की पेशकश करती है।
टाटा संस के ऊपरी स्तर की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में वर्गीकृत किए जाने के कारण सूचीबद्धता की अनिवार्यता पैदा हुई है। आरबीआई ने हाल में यह दर्जा हटाने का कंपनी का अनुरोध स्वीकार नहीं किया, जिससे लिस्टिंग अनिवार्य हो गई है।
ग्रुप की इन कंपनियों के निवेशकों को भी लिस्टिंग से फायदा
टाटा संस की लिस्टिंग से निवेशकों को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर, इंडियन होटल्स और एयर इंडिया जैसी कंपनियों में हिस्सेदारी रखने वाली होल्डिंग कंपनी में सीधे निवेश का अवसर मिलेगा।
हालांकि, सूचीबद्धता से टाटा संस की हिस्सेदारियों की जानकारी और बाजार-आधारित मूल्यांकन अधिक स्पष्ट हो सकता है, लेकिन इसका समय, ढांचा, मूल्यांकन और मौजूदा संचालन व्यवस्था पर प्रभाव अभी तय होना बाकी है।
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