Source :- LIVE HINDUSTAN
Tata Sons Result: टाटा संस को लेकर एक अच्छी खबर सामने आ रही है। इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026 कंपनी के लिए काफी शानदार रहा है। वैश्विक अनिश्चितता के बीच टाटा संस की कमाई बढ़ी है। रिपोर्ट के अनुसार कंपनी का ऑपरेशनल रेवन्यू 42000 करोड़ रुपये रहा है। वहीं, अनुमानित नेट प्रॉफिट 32000 करोड़ रुपये रहा है। शानदार प्रदर्शन के साथ-साथ कंपनी ने अपने सबसे बड़े शेयरहोल्डर्स टाटा ट्र्स्ट को लगभग दोगुना डिविडेंड का भुगतान किया है। रिपोर्ट के अनुसार कुल 3000 करोड़ रुपये का डिविडेंड टाटा संस ने इस बार टाटा ट्रस्ट को दिया है।
कुछ हफ्ते पहले पीटीआई की रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि टाटा संस के बोर्ड की मीटिंग हुई है। इस बैठक में कंपनियों के नतीजों को रिव्यू किया गया। वहीं, एनुअल अकाउंट्स को अप्रूव किया गया। डिविडेंड देने पर भी इसी मीटिंग में मुहर लगी थी। बता दें, इस मीटिंग में ग्रुप के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा और टाटा ट्रस्ट के वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन के साथ-साथ अन्य सदस्य मौजूदा रहे। यह मीटिंग करीब 4 घंटे चली थी।
टाटा संस में करब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी टाटा ट्रस्ट की है।
क्या टाटा संस का आएगा आईपीओ?
यह सवाल और गहरा गया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बुधवार को एनबीएफसी के पैरामीटर को लेकर बड़ा फैसला किया था। इसी पर सबकी निगाह टिकी हुई थी। सेंट्रल बैंक ने अपर लेयर के एनबीएफसी के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के एसेट लिमिट को बरकरार रखा है। 31 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार टाटा संस के पास कुल 1.75 लाख करोड़ रुपये का एसेट था। ऐसे में कंपनी अपर लेयर एनबीएफसी के दायरे में आ गई। जिसकी वजह से टाटा संस को तीन साल के अंदर शेयर बाजार में लिस्ट होना पड़ेगा। यह स्थिति अक्टूबर 2022 से बनी हुई है।
तीन साल पहले टाटा संस के ऊपर कुल 20,000 करोड़ रुपये का कर्ज था। यह पैसा टाटा संस की तरफ से संघर्ष कर रही कंपनियों के लिए लिया जाता है। ये वो कंपनियों जिनको बैंक की तरफ से आसानी से लोन नहीं मिल पाता है। मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार कंपनी की कर्ज की स्थिति और वित्तीय लेने देने को देखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया टाटा संस की लिस्टिंग चाहता है। ताकि कंपनी को लेकर और पारदर्शिता रहे। वहीं, टाटा संस लिस्टिंग से लगातार बच रहा है। अभी तक स्थिति साफ नहीं हो पाई है।
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