Source :- LIVE HINDUSTAN
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आयुष्मान खुराना और सारा अली खान की फिल्म उड़ता तीर आज यानी 23 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। ये एक एक्शन कॉमेडी स्पाई फिल्म है। फिल्म की कहानी एक ऐसे स्पाई की कहानी है जिसे देशभक्ति तो याद है, लेकिन देश नहीं। आइए जानते हैं कैसी है उड़ता तीर?
फिल्म में नहीं डबल मीनिंग जोक्स
उड़ता तीर को आकाश कौशिक ने डायरेक्ट किया है। इस फिल्म में आपको कॉमेडी का डोज यकीनन मिलने वाला है। लंबे वक्त बात सिनेमाघरों में ऐसी कोई फिल्म आई है जो आपको जमकर हंसने का मौका देती है, वो भी बिना किसी घटिया या डबल मीनिंग जोक्स के।
फिल्म: उड़ता तीर
कास्ट: आयुष्मान खुराना, सारा अली खान और राम कपूर
डायरेक्टर: आकाश कौशिक
रेटिंग: 3.5 स्टार्स
क्या है उड़ता तीर का प्लॉट?
उड़ता तीर के प्लॉट की बात करें तो फिल्म की कहानी बिलाल/विक्रांत के इर्द-गिर्द घूमती है जो कि एक पाकिस्तानी जासूस है और भारत की आतंकवाद रोकने वाली यूनिट में काम कर रहा है। एक दिन उसकी याददाश्त चली जाती है और वो पाकिस्तान के टेरर नेटवर्क को तोड़कर भारत के लिए काम करना शुरू कर देता है।
मजेदार है उड़ता तीर का फर्स्ट हाफ
उड़ता तीर आकाश की डायरेक्टर के तौर पर डेब्यू फिल्म है और आकाश ने शानदार काम किया है। डायरेक्टर होने के साथ-साथ आकाश फिल्म के लेखक भी हैं। उन्होंने फिल्म के पहले हाफ को काफी मजबूत रखा है। फिल्म का रफ्तार भी बिल्कुल सही है, फिल्म में मजेदार वनलाइनर्स और स्थितियां हैं जो दर्शकों को लगातार हंसने का मौका देती हैं। फिल्म में पाकिस्तान की आलोचना भी दिखाई गई है, लेकिन इन आलोचनाओं के लिए भी मजेदार व्यंग इस्तेमाल किए गए हैं, न की भारी-भरकम डायलॉग्स। फिल्म इसलिए मजेदार है क्योंकि डायरेक्टर को पता है कि कब कहां मजाक उड़ाना है और कहां पर रुकना है।
सेकेंड हाफ में धीमी है फिल्म की रफ्तार
जब पहला हाफ मजेदार होता है, तो फिल्म के सेकंड हाफ से उम्मीदें अपने आप बढ़ जाती हैं। लेकिन इस फिल्म का सेकंड हाफ आपको निराश कर सकता है। सेकंड हाफ में फिल्म अपनी दिशा बदल लेती है और यहीं पर उसका खेल खराब हो जाता है। सेकंड हाफ जैसे-जैसे आगे बढ़ता है, फिल्म गंभीर होती जाती है। इस वजह से फिल्म का मजा भी थोड़ा कम हो जाता है। सेकंड हाफ में फिल्म की रफ्तार भी थोड़ी धीमी पड़ने लगती है।
उड़ता तीर देखें या नहीं?
आप सोच रहे हैं कि ये फिल्म देखें या नहीं? तो इसका जवाब है कि आपको फिल्म देखनी चाहिए। फिल्म में आपको हंसाने के लिए बहुत कुछ है। आयुष्मान खुराना बिलाल के किरदार के लिए बिल्कुल फिट हैं। एक्टर ने कन्फ्यूजन और कॉमेडी के बैलेंस को बिल्कुल सही तरीके से पकड़ा है। दिवंगत मुकुल देव ने आयुष्मान खुराना को कड़ी टक्कर दी है। बिलाल के रसोइए के रूप में संदीप आनंद बहुत मजेदार लगे हैं, और बिलाल के सबसे अच्छे दोस्त के रोल में सुहेल नय्यर ने भी शानदार काम किया है। सारा अली खान ने बिलाल की पत्नी का रोल निभाया है। उन्होंने अच्छा काम किया है।
फिल्म के म्यूजिक को सचिग-जिगर ने तैयार किया है। वहीं, अमिताभ भट्टाचार्या ने गानों के बोल लिखे हैं। फिल्म का म्यूजिक भी आपको पसंद आएगा। फिल्म का पहला हाफ मजेदार है, लेकिन सेकंड हाफ थोड़ा धीमा हो जाता है। इसके बावजूद भी फिल्म आपको मजेदार लगने वाली है।
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