Source :- LIVE HINDUSTAN
UN Security Council Election 2027 में पाकिस्तान का कार्यकाल खत्म होने के बाद किर्गिज़स्तान पहली बार गैर-स्थायी सदस्य चुना गया। जानिए UN चुनाव के नतीजे, जर्मनी की हार और भारत की प्रतिक्रिया।
संयुक्त राष्ट्र (UN) सुरक्षा परिषद में एक महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। 3 जून 2026 को हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के कड़े चुनावों में किर्गिस्तान को सुरक्षा परिषद (UNSC) के गैर-स्थायी सदस्य के रूप में चुना गया है। एशिया-प्रशांत समूह से यह देश अब पाकिस्तान की जगह लेगा। पाकिस्तान की यूएन से छुट्टी हो चुकी है। यानी भारत के पड़ोसी मुल्क का दो साल का कार्यकाल 2026 के अंत में समाप्त हो रहा है।
किर्गिस्तान का यह नया कार्यकाल 1 जनवरी 2027 से शुरू होकर 31 दिसंबर 2028 तक यानी पूरे दो साल चलेगा। 1992 में संयुक्त राष्ट्र में शामिल होने के बाद यह इतिहास में पहला मौका है जब किर्गिस्तान को विश्व की सबसे शक्तिशाली सुरक्षा परिषद की मेज पर बैठने का अवसर मिला है।
कांटे की हुई टक्कर, 5 नए सदस्य देश
एशिया-प्रशांत सीट के लिए किर्गिस्तान और फिलीपींस के बीच बेहद कड़ा मुकाबला देखने को मिला। पूरे चार राउंड की वोटिंग के बाद, किर्गिस्तान ने 142 वोटों के भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज की, जबकि फिलीपींस को 49 वोट मिले।
किर्गिस्तान के अलावा ऑस्ट्रिया, पुर्तगाल, त्रिनिदाद और टोबैगो, तथा जिम्बाब्वे को भी 2027-2028 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद का नया गैर-स्थायी सदस्य चुना गया है।
किन 5 देशों की हुई छुट्टी?
वर्तमान में पाकिस्तान सुरक्षा परिषद का गैर-स्थायी सदस्य है, लेकिन उसका कार्यकाल 2026 के अंत में समाप्त हो जाएगा। इसके बाद एशिया-प्रशांत समूह की सीट पर किर्गिज़स्तान परिषद में शामिल होगा। नए पांच नए देश 2026 के अंत में अपना कार्यकाल पूरा कर रहे सदस्य देशों- पाकिस्तान, डेनमार्क, ग्रीस, पनामा और सोमालिया को रिप्लेस करेंगे।
जर्मनी को लगा बड़ा झटका
पश्चिमी यूरोपीय और अन्य देशों के समूह (WEOG) में ऑस्ट्रिया (131 वोट) और पुर्तगाल (134 वोट) ने जीत दर्ज कर ली, जबकि बड़े दावेदार माने जा रहे जर्मनी (104 वोट) को इस चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा।
क्या है संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का गणित?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, UN का सबसे प्रभावशाली अंग है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा बनाए रखने और युद्ध रोकने की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। इसमें कुल 15 सदस्य होते हैं। 5 स्थायी सदस्य यानी वीटो पावर वाले देश हैं- अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस। वहीं 10 गैर-स्थायी सदस्य होते हैं। इन्हें संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 2 साल के सीमित कार्यकाल के लिए चुना जाता है। भौगोलिक प्रतिनिधित्व बनाए रखने के लिए हर साल 5 नए गैर-स्थायी सदस्य चुने जाते हैं।
भारत की प्रतिक्रिया
भारत ने इन चुनाव नतीजों का स्वागत किया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश पर्वथानेनी ने किर्गिस्तान सहित सभी नए सदस्यों को बधाई दी और उनके आगामी कार्यकाल में भारत की ओर से पूर्ण सहयोग का भरोसा जताया। भारत स्वयं 2021-22 में सुरक्षा परिषद का गैर-स्थायी सदस्य रह चुका है और उसने 2028-29 कार्यकाल के लिए अपनी उम्मीदवारी भी घोषित कर दी है।
क्या है इस चुनाव का संदेश?
इस चुनाव ने दिखाया है कि संयुक्त राष्ट्र में देशों की कूटनीतिक स्वीकार्यता कितनी महत्वपूर्ण होती है। जहां किर्गिजस्तान पहली बार सुरक्षा परिषद तक पहुंचने में सफल रहा, वहीं जर्मनी जैसे प्रभावशाली देश को हार का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर, पाकिस्तान का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उसकी जगह अब किर्गिजस्तान वैश्विक सुरक्षा और शांति से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में भागीदारी करेगा।
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