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UPI ट्रांजैक्शन के नए नियम में GST का तड़का? अब 18% टैक्स के लिए होगा मंथन

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Source :- LIVE HINDUSTAN

यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लगने वाले एमडीआर (मर्चेन्ट डिस्काउंट रेट) पर जीएसटी लगेगा या नहीं, इस संबंध में जल्द ही फैसला होने वाला है। न्यूज एजेंसी पीटीआई सूत्रों के मुताबिक जीएसटी काउंसिल, यूपीआई ट्रांजैक्शन के एमडीआर के ऊपर जीएसटी लगाने के संबंध में फैसला करेगी। सूत्रों ने कहा कि सेवाओं पर जीएसटी लगता है और इस बारे में फैसला केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली जीएसटी काउंसिल करती है, जिसमें राज्यों के वित्त मंत्री भी शामिल होते हैं। उन्होंने कहा, ”हमें उम्मीद है कि उपभोक्ताओं के व्यापक हित में जीएसटी काउंसिल यूपीआई लेनदेन पर व्यापारियों पर लगने वाले शुल्क पर 18 प्रतिशत जीएसटी पर विचार करेगी। बीमा प्रीमियम के मामले में ऐसा किया जा चुका है।”

बता दें कि जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक सात अक्टूबर को प्रस्तावित है। सूत्रों ने यह भी संकेत दिया कि अगली बैठक में काउंसिल का मुख्य जोर प्रक्रिया सुधार और उसे सरल बनाने पर रहेगा। कर दरों में बदलाव पर विचार नहीं किया जाएगा।

15 अक्टूबर से लगेगा एमडीआर

बता दें कि सरकार ने 15 अक्टूबर से कारोबारियों को किए जाने वाले 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू किया है। वहीं, 75,000 रुपये या इससे अधिक के भुगतान पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये होगा। हालांकि, पर्सन-टू-पर्सन लेनदेन और छोटे भुगतान को शुल्क से बाहर रखा गया है।

18 प्रतिशत जीएसटी?

पंद्रह अक्टूबर से लागू होने वाली एमडीआर व्यवस्था के तहत इसका पेमेंट कारोबारी करेंगे। यह शुल्क पेमेंट सैटलमेंट सर्विसेज के लिए लिया जाएगा। चूंकि पेमेंट नेटवर्क के जरिये डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन के प्रोसेसिंग और सैटलमेंट के लिए इस शुल्क का भुगतान कारोबारी करेंगे, इसलिए जीएसटी कानून के तहत यह सर्विस की श्रेणी में आएगा और इस पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। हालांकि, कारोबारी एमडीआर पर भुगतान किए गए जीएसटी का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) ले सकते हैं। कर विशेषज्ञों के अनुसार, इससे कारोबारियों पर पड़ने वाला कुल कर बोझ कुछ कम हो सकता है।

सरकार को नहीं मिलेगा एक भी पैसा

इस बीच, आधिकारिक सूत्रों ने बताया है कि यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लगने वाले एमडीआर से सरकार को एक भी पैसा नहीं मिलेगा। एमडीआर से प्राप्त राशि यूपीआई से जुड़ी व्यवस्था में बैंकों समेत अलग-अलग पक्षों को मिलेगी।

वहीं, एमडीआर ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा और बैंक इस संबंध में फैली गलतफहमियों को दूर करने के लिए जागरूकता अभियान चलाएंगे। सूत्र बताते हैं कि सरकार छोटे व्यापारियों में यूपीआई एमडीआर को लेकर आशंकाओं को दूर करने के लिए खुदरा व्यापारियों के संगठन कैट (कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स) समेत अन्य व्यापारी संगठनों से बातचीत भी करेगी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN