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UPI से भुगतान अब नहीं रहेगा फ्री? ग्राहकों और दुकानदारों के लिए आया अपडेट, सरकार ने बताई सच्चाई

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Source :- LIVE HINDUSTAN

UPI Payment new rule: बीते एक हफ्ते से इस बात की चर्चा जोरों पर है कि क्या आने वाले समय में यूपीआई से पेमेंट करने पर कोई चार्ज वसूला जाएगा। इस बहस की शुरुआत पेमेंट एंड सेटलमेंट एक्ट में किए गए बदलाव के बाद हुई है। जिसमें मर्चेंट से यूपीआई ट्रांजैक्शन पर बैंक के द्वारा पैसा लेने पर लगाया गया प्रतिबंध हट गया है।

इससे पहले बुधवार RBI के गवर्नर ने UPI पर पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा कि किसी को तो खर्च उठाना ही पड़ेगा। बता दें, लोगों के बीच उठ रहे सावालों को देखते हुए शनिवार को सरकार की तरफ से यूपीआई पेमेंट को लेकर बयान जारी किया गया है।

1- क्या यूजर्स को देना होगा यूपीआई से भुगतान पर पैसा

नहीं, यूजर्स पहले की तरह अब भी बिना किसी ट्रांजैक्शन चार्ज के पेमेंट कर पाएंगे। यानी उनसे कोई भी पैसा कहीं भी नहीं वसूला जाएगा।

2- एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पैसा भेजने पर देना होगा पेमेंट?

नहीं, व्यक्ति से व्यक्ति तक यूपीआई ट्रांजैक्शन पूरी तरह से फ्री रहेगा। यानी आप किसी दूसरे व्यक्ति या खुद के दूसरे अकाउंट में पहले की तरह ही फ्री यूपीआई पेमेंट कर पाएंगे।

3- कुछ व्यापारियों को देना पड़ सकता है पैसा

शुल्क लागू होने पर व्यापारियों को मामूली ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) लागू होगा। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘एमडीआर केवल एक निश्चित सीमा से ऊपर, एक सीमित संख्या में व्यापारी लेनदेन पर मामूली दर से लागू होंगे, जो डेबिट या क्रेडिट कार्ड के एमडीआर की तुलना में बहुत कम होगा।’ छोटे दुकानदार जैसे किराना, सब्जी आदि इस दायरे से बाहर ही रहेंगे।

क्यों लिया गया है फैसला

वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि वास्तव में यह संशोधन यूपीआई की दीर्घकालिक स्थिरता, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और उभरते खतरों के खिलाफ लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। बयान में कहा गया कि लेनदेन की अत्यधिक मात्रा के साथ प्रणाली को साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी की रोकथाम और बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण व निरंतर सुधार की आवश्यकता है।

जुलाई 2026 के महीने में ही 2366 करोड़ यूपीआई ट्रांजैक्शन हुए हैं। इस दौरान कुल 29.90 लाख करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन हुआ। इसमें से 95 प्रतिशत ट्रांजैक्शन 2000 रुपये से भी कम का है। ऐसे में नियमों में संशोधन से ग्राहक प्रत्यक्ष तौर पर दूर रहेंगे। लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यूपीआई पर किसी भी तरह का शुल्क लगाया गया तो उसका असर ग्राहकों पर भी पड़ेगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN