Source :- LIVE HINDUSTAN
Venezuela Bhukamp: इमारत के ढहे हुए बेसमेंट में जाकर जोस अपनी बची-खुची उम्मीद के सहारे लगातार अपने बेटे का नाम चिल्ला रहे थे। अचानक उन्हें मलबे के नीचे से एक बेहद धीमी फुसफुसाहट सुनाई दी।
Venezuela Bhukamp News: वेनेजुएला के उत्तरी हिस्से में बुधवार को 7.2 और 7.5 तीव्रता की आए दो विनाशकारी भूकंपों ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 920 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 3,000 से अधिक लोग घायल हैं। एक वेबसाइट के अनुसार, करीब 70,000 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। इस मलबे और मलबे के ढेर में तब्दील हो चुकी गगनचुंबी इमारतों के बीच से अपनों की तलाश में जुटे परिवारों के लिए समय तेजी से भाग रहा है। मलबे के नीचे दबी जिंदगी की फुसफुसाहट और मासूमों के रोने की आवाजों ने कई परिवारों को जीवनभर का अनमोल तोहफा दिया है।
18 दिन के नवजात शिशु का चमत्कारी रेस्क्यू
ला गुआरा में आठ मंजिला एक अन्य इमारत के मलबे के नीचे दयाना पटिनो और उनका महज 18 दिन का नवजात बेटा दबे हुए थे। मलबा इतना भारी था कि दयाना हिल भी नहीं पा रही थीं। उन्होंने घंटों तक अपने कलेजे के टुकड़े को सीने से भींचे रखा, लेकिन वे उसे दूध पिलाने की स्थिति में भी नहीं थीं। स्वयंसेवक मेरली एड्रेइना क्विंटरो ने बताया कि वे करीब 12 घंटे से दयाना की तलाश कर रहे थे और मान चुके थे कि वे अब इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन गुरुवार सुबह अचानक मलबे के भीतर से बच्चे के रोने की आवाज और मां की पुकार सुनाई दी।
रेस्क्यू टीम और स्वयंसेवकों ने मिलकर शुक्रवार तड़के 1:00 बजे मां और बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला। जांच में पता चला कि इतने भारी मलबे के बावजूद मां या बच्चे में से किसी को एक भी फ्रैक्चर नहीं आया था। दोनों को इलाज के लिए काराकास के एक क्लिनिक में भेजा गया है। इसलिए कहता हैं ‘जाको राखे साइयां मार सके ना कोई’।
4 साल के बच्चे को भी निकाला
ला गुआरा में ही सात मंजिला अपार्टमेंट बिल्डिंग के पूरी तरह ढह जाने के बाद जोस अल्बर्टो गैलीपोली अपने बेटे जोफ्राम, बहू और 4 साल के पोते की तलाश में भटक रहे थे। भूकंप के समय जोस करीब 20 मील दूर देश की राजधानी काराकास में थे, लेकिन तबाही की खबर सुनते ही वे मलबे और अवरुद्ध रास्तों को पार करते हुए पैदल ही ला गुआरा पहुंच गए।
इमारत के ढहे हुए बेसमेंट में जाकर जोस अपनी बची-खुची उम्मीद के सहारे लगातार अपने बेटे का नाम चिल्ला रहे थे। अचानक उन्हें मलबे के नीचे से एक बेहद धीमी फुसफुसाहट सुनाई दी। यह उनके बेटे जोफ्राम की आवाज थी। यह पूरा परिवार बिना बिजली, पानी और भोजन के 24 घंटे से अधिक समय तक मलबे के नीचे फंसा रहा। बचावकर्मियों ने सूझबूझ से काम लिया और मलबे में एक संकरा रास्ता बनाया। सबसे पहले 4 साल का मासूम बाहर निकला जिसने कहा, “मैं ठीक हूं।” इसके बाद उसके माता-पिता सुरक्षित बाहर आए और अपनों को गले लगा लिया।
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