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World Mental Health Day: खुद से जुड़ने के लिए रोजाना लगाएं ध्यान, मन को मिलेगा सुकून

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Source :- LIVE HINDUSTAN

हेल्दी रहने के लिए मन की शांति बहुत जरूरी है। खुद से फिर से जुड़ने और मन को शांत करने के लिए सबसे जरूरी है कि आप रोजाना ध्यान लगाएं। जानिए ये खुद से जुड़ने में कैसे मददगार साबित हो सकता है।

बिजी लाइफ शेड्यूल में अक्सर लोग परिवार की जरूरतें और अपनी जिम्मेदारियों को निभाते-निभाते लोग अक्सर खुद से दूर हो जाते हैं। जिसकी वजह से समय के साथ मेंटल हेल्थ पर असर होता है। जब कोई व्यक्ति मानसिक रूप से ठीक नहीं होता है, तो उसके व्यवहार और शरीर में कुछ बदलाव दिखाई देते हैं, जैसे खान पान में बदलाव, एनर्जी की कमी, मूड में उतार चढ़ाव वगैराह। अक्सर लोग इन्हें इग्नोर करते हैं जिसकी वजह से आगे चलकर बड़ी हो जाती है। जिसके बारे में लोग खुलकर बात नहीं करते हैं। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने, लोगों को खुलकर अपनी बात रखने और समय पर सही मदद मिलने की जरूरत कोसमझाने के लिए हर साल 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है।

आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में खुद को खुश करने का सबसे अच्छा और जरूरी तरीका है मन को शांत करना। इसे शांत रखने और खुद से दोबारा खुद से जुड़ने के लिए ध्यान एक बेहतरीन और असरदार तरीका हो सकता है। रोजाना कुछ मिनट ध्यान लगाने से न केवल तनाव कम करने में मदद मिलती बल्कि मानसिक सुकून पाने के लिए ये बेहतरीन है। ध्यान से रोजाना अपने विचारों और फीलिंग्स को बेहतर ढंग से समझने का मौका मिलता है। आइए जानते हैं कि कैसे रोजाना ध्यान को अपने रूटीन का हिस्सा बनाकर आप मन को शांत कर सकते हैं।

खुद से जुड़ने में कैसे मददगार हो सकता है ध्यान

मेडिटेशन आपके ‘असली रूप’ और उन चीजों के बीच थोड़ी जगह बनाता है जिनका बोझ आपके कंधे पर है। अक्सर जिम्मेदारियां, उम्मीदें, चिंताएं, रिश्ते और रोजाना की जिंदगी का के ये विचार खुद को सुनना और यह समझना मुश्किल बना देते हैं कि आप असल में क्या महसूस कर रहे हैं। लेकिन जब आप मेडिटेशन करते हैं, तो आप खुद को रुकने और ‘अभी’ में जीने का मौका देते हैं। ऐसा करके आप खुद के साथ दोबारा जुड़ सकते हैं।

कैसे करें मेडिटेशन

  • इसे करने के लिए पहले किसी आरामदायक जगह पर बैठें। अपने कंधों को ढीला छोड़ें और धीरे-धीरे कुछ सांसें लें। कुछ पल के लिए सब कुछ करना बंद कर दें।
  • अब अपनी सांस और शरीर पर ध्यान दें। बिना किसी बदलाव की कोशिश किए, तनाव, बेचैनी या शांति, जो भी महसूस हो, उस पर ध्यान दें।
  • जब ध्यान की स्थिति में पहुंच जाएं तब खुद से पूछें कि ‘अभी कैसा महसूस हो रहा’ बिना खुद को जज किए, जो भी फीलिंग मन में आए, उसे महसूस होने दें। बेहतर और सोच-समझकर जीने के लिए रोजाना अपनी स्थिति के प्रति जागरूक रहें।
  • धीरे से पूछें ‘अभी मुझे अपनी जिंदगी में किस चीज की ज्यादा जरूरत है?’ जवाब के लिए जबरदस्ती न करें। बस देखें कि मन में क्या आता है।
  • अगर आरामदायक लगे, तो अपना हाथ दिल पर रखें। ऐस करने के बाद खुद को याद दिलाएं, कि जरूरी नहीं कि सब कुछ पहले से तय हो। मैं अभी जिस स्थिति में हूं, उसी में खुद को अपना सकता हूं।

डिस्क्लेमर- इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN