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क्विक कॉमर्स सेक्टर की तेजी से बढ़ती कंपनी जेप्टो (Zepto) अपने आईपीओ (IPO) को लेकर चर्चा में है। कंपनी ने बाजार नियामक के पास अपडेटेड ड्रॉफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया है, जिसके तहत करीब 8,010 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू लाने की योजना है। हालांकि, कंपनी की तेज ग्रोथ और बढ़ते कारोबार के बीच कुछ ऐसे महत्वपूर्ण जोखिम भी सामने आए हैं, जिन पर निवेशकों को ध्यान देना चाहिए। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

ED की पूछताछ बनी चर्चा का विषय

कंपनी के सह-संस्थापक आदित पालीचा और कैवल्य वोहरा को इस साल अप्रैल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पूछताछ के लिए बुलाया गया था। यह मामला विदेशी निवेश, वित्तीय लेन-देन और कंपनी के बिजनेस मॉडल से जुड़ी जानकारी हासिल करने से संबंधित बताया गया है। दोनों संस्थापकों ने एजेंसी को आवश्यक दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध कराई है, लेकिन भविष्य में किसी भी जांच या कानूनी प्रक्रिया का असर कंपनी की इमेज और कारोबार पर पड़ सकता है।

ऑडिट और आंतरिक नियंत्रण में कमियां

कंपनी के वित्तीय दस्तावेजों में कुछ ऐसी कमियां भी सामने आई हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। ऑडिट रिपोर्ट में आईटी सिस्टम और डेटा प्रबंधन से जुड़े कंट्रोल को लेकर चिंता जताई गई है। कुछ मामलों में अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर में ऑडिट ट्रेल जैसी सुविधाएं पूरी तरह एक्टिव नहीं थीं, जिससे पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।

सहायक कंपनियों का घाटा

Zepto की कई सहयोगी कंपनियां अभी भी घाटे में चल रही हैं। इनमें सबसे बड़ा नुकसान जेप्टो (Zepto Marketplace) ने दर्ज किया है। इन कंपनियों को संचालन जारी रखने के लिए लगातार वित्तीय सहायता की आवश्यकता पड़ रही है। अगर भविष्य में घाटा बढ़ता है, तो इसका असर कंपनी की कुल वित्तीय स्थिति पर पड़ सकता है।

उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े आरोप

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने कंपनी और उसकी एक यूनिट को नोटिस जारी किया है। आरोप है कि प्लेटफॉर्म पर कुछ ऐसी रणनीतियों का इस्तेमाल किया गया, जिनसे ग्राहकों को भ्रमित किया जा सकता है। इनमें कार्ट में अतिरिक्त सामान जोड़ना या अंतिम भुगतान तक कुछ शुल्क छिपाकर रखना जैसी शिकायतें शामिल हैं।

ब्रांड और ट्रेडमार्क से जुड़े विवाद

हालांकि, Zepto नाम कंपनी के पास रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क है, लेकिन इसके कई प्राइवेट लेबल ब्रांड्स को लेकर कानूनी चुनौतियां बनी हुई हैं। कई ट्रेडमार्क आवेदनों पर आपत्तियां दर्ज की गई हैं और कुछ मामलों में मंजूरी अभी पेंडिंग है। इससे भविष्य में ब्रांड विस्तार की योजनाओं पर असर पड़ सकता है।

नए श्रम कानून बढ़ा सकते हैं खर्च

सरकार द्वारा लागू किए जाने वाले नए सामाजिक सुरक्षा नियमों का असर भी कंपनी पर पड़ सकता है। अगर डिलीवरी पार्टनर्स को औपचारिक श्रमिक कैटेगिरी में शामिल किया जाता है, तो कंपनी को बीमा, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ देने पड़ सकते हैं। इससे ऑपरेशन लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

Zepto भारत के सबसे तेजी से बढ़ते क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स में से एक है और इसका कारोबार लगातार विस्तार कर रहा है। लेकिन, किसी भी आईपीओ में निवेश करने से पहले केवल ग्रोथ स्टोरी नहीं, बल्कि उससे जुड़े जोखिमों को भी समझना जरूरी होता है। कंपनी की वित्तीय स्थिति, नियामकीय चुनौतियां, घाटे में चल रही यूनिट और कानूनी मामलों पर नजर रखना निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।

एक्सपर्ट का मानना है कि जेप्टो (Zepto) का आईपीओ बाजार में बड़ी दिलचस्पी पैदा कर सकता है, लेकिन निवेश का फैसला लेने से पहले DRHP में बताए गए सभी जोखिमों को ध्यान से पढ़ना और समझना जरूरी है।

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