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मुख्य बातें
- Zerodha ने अपने Kite प्लेटफॉर्म पर US Stocks में निवेश की सुविधा बीटा मोड में शुरू की है
- इसके जरिए पात्र भारतीय निवेशक अपने मौजूदा अकाउंट से करीब 2,000 अमेरिकी कंपनियों और 1,000 ETF में निवेश कर सकते हैं
- निवेशक सिर्फ $1 से शुरू निवेश कर सकेंगे
भारत के शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के लिए अमेरिकी कंपनियों में पैसा लगाने का एक नया विकल्प सामने आया है। ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म जेरोधा (Zerodha) ने अपने Kite ऐप पर US स्टॉक्स में निवेश की सुविधा बीटा मोड में शुरू की है। इसके जरिए पात्र भारतीय निवेशक अपने मौजूदा जेरोधा (Zerodha) अकाउंट से ही अमेरिका की कंपनियों के शेयर और ETF खरीद सकेंगे। इसके लिए अलग से ब्रोकरेज या डिमैट (Demat) अकाउंट खोलने की जरूरत नहीं होगी। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
इस सुविधा के तहत निवेशकों को अमेरिका में लिस्टेड करीब 2,000 कंपनियों और लगभग 1,000 ETF (Exchange-Traded Funds) तक पहुंच मिल सकती है। खास बात यह है कि निवेश के लिए किसी शेयर की पूरी यूनिट खरीदना जरूरी नहीं होगा। फ्रैक्शनल इंवेस्टिंग (Fractional Investing) के जरिए निवेशक सिर्फ $1 से भी शुरुआत कर सकते हैं। हालांकि, फिलहाल यह सुविधा Kite के वेब वर्जन पर बीटा मोड में उपलब्ध है और इसे आगे व्यापक स्तर पर शुरू किए जाने की उम्मीद है।
जेरोधा के जरिए अमेरिकी शेयरों में निवेश कैसे होगा?
जेरोधा (Zerodha) की यह सुविधा BSE के स्वामित्व वाले इंडिया INX ग्लोबल एक्सेस के जरिए उपलब्ध कराई जा रही है। यह प्लेटफॉर्म गुजरात के GIFT सिटी से जुड़ा है। निवेशक अपने मौजूदा जेरोधा (Zerodha) अकाउंट में इंटरनेशनल इंवेस्टिंग सेगमेंट एक्टिवेट करके इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं।
इसके बाद अपने लिंक्ड भारतीय बैंक अकाउंट से पैसे ट्रांसफर करके उन्हें अमेरिकी डॉलर में बदला जा सकता है। निवेशक काइट (Kite) प्लेटफॉर्म पर अमेरिकी शेयरों और ETF को खोज सकते हैं, ऑर्डर दे सकते हैं और अपनी विदेशी होल्डिंग्स को ट्रैक कर सकते हैं। इस सुविधा से निवेशकों को भारतीय शेयर बाजार के अलावा विदेशी बाजारों में भी निवेश का विकल्प मिलता है। हालांकि, अमेरिकी शेयरों में निवेश करने से पहले ब्रोकरेज, करेंसी कन्वर्जन, पैसे भेजने के शुल्क और लागू टैक्स को समझना जरूरी है।
US स्टॉक्स खरीदने पर जेरोधा कितना चार्ज लेगा?
अमेरिकी शेयरों में निवेश करते समय केवल शेयर की कीमत नहीं, बल्कि ट्रांजैक्शन से जुड़े दूसरे खर्चों को भी ध्यान में रखना होगा। जेरोधा (Zerodha) के दिए गए चार्ज के मुताबिक, US स्टॉक्स में खरीदारी और बिक्री दोनों पर ब्रोकरेज लगेगा।
| चार्ज का प्रकार | कितना शुल्क लगेगा? |
|---|---|
| ब्रोकरेज | ट्रांजैक्शन वैल्यू का 0.1% |
| न्यूनतम ब्रोकरेज | $0.01 प्रति ऑर्डर |
| अधिकतम ब्रोकरेज | $10 प्रति ऑर्डर |
| ब्रोकरेज पर GST | लागू दर के अनुसार |
| IFSCA टर्नओवर फीस | लागू दर के अनुसार |
| करेंसी कन्वर्जन | बैंक के लागू FX शुल्क और संबंधित GST के अनुसार |
| अन्य शुल्क | लागू अमेरिकी रेगुलेटरी फीस और रेमिटेंस चार्ज |
अमेरिकी बाजार में शेयर बेचने पर SEC और FINRA से जुड़े शुल्क भी लागू हो सकते हैं। ये शुल्क संबंधित नियमों के अनुसार बदल सकते हैं। इसलिए निवेश करने से पहले जेरोधा (Zerodha) की ताजा फीस लिस्ट देखना जरूरी है।
रुपये नहीं, डॉलर में समझें ब्रोकरेज का गणित
मान लीजिए कि आप अमेरिकी शेयरों में $1,000 का निवेश करते हैं। Zerodha के बताए गए उदाहरण के मुताबिक, इस ट्रांजैक्शन पर खर्च कुछ इस तरह होगा।
| चार्ज का विवरण | रकम |
|---|---|
| शेयर खरीदने की रकम | $1,000 |
| ब्रोकरेज (0.1%) | $1.00 |
| IGST | $0.18 |
| IFSCA टर्नओवर फीस | $0.05 |
| कुल बताए गए शुल्क | $1.23 |
नोट: इसमें करेंसी कन्वर्जन, रेमिटेंस और अन्य लागू शुल्क शामिल नहीं हैं। वास्तविक खर्च अलग हो सकता है।
इसका मतलब है कि $1,000 के ऑर्डर पर सिर्फ ब्रोकरेज और बताए गए अन्य शुल्क ही कुल लागत नहीं हैं। भारत से डॉलर में पैसा भेजने और करेंसी बदलने का खर्च भी आपके निवेश की वास्तविक लागत बढ़ा सकता है।
Zerodha से अमेरिकी शेयर कैसे खरीदें?
स्टेप 1:- US इंवेस्टिंग सेगमेंट एक्टिवेट करें
Kite में लॉग इन करके Marketwatch में जाएं। वहां, इंटरनेशनल विकल्प चुनें और Enable Now या Enable US इंवेस्टिंग पर क्लिक करें। जरूरत पड़ने पर जेरोधा (Zerodha) अकाउंट पोर्टल से भी इसे एक्टिवेट किया जा सकता है।
स्टेप 2: जरूरी वेरिफिकेशन पूरा करें
पात्र निवेशक का भारतीय निवासी होना जरूरी है। आधार से मोबाइल नंबर लिंक होना चाहिए और अकाउंट से जुड़ी जरूरी जानकारी पूरी होनी चाहिए। Zerodha के सपोर्ट डिटेल्स के अनुसार, एक्टिवेशन में लगभग 30 मिनट लग सकते हैं।
स्टेप 3:- ग्लोबल वैलेट में पैसे डालें
अपने रजिस्टर्ड भारतीय बैंक अकाउंट से नेट बैंकिंग के जरिए सपोर्टेड पार्टनर बैंक के माध्यम से फंड ट्रांसफर करें। रकम अमेरिकी डॉलर में बदली जाएगी। इस सुविधा में UPI, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड से फंड ट्रांसफर उपलब्ध नहीं है।
स्टेप 4:- पसंद का शेयर या ETF चुनें
Kite के International सेक्शन में जाकर अमेरिकी कंपनी या ETF खोजें। फ्रैक्शनल इंवेस्टिंग (Fractional Investing) की सुविधा होने से आप शेयर का छोटा हिस्सा भी खरीद सकते हैं।
स्टेप 5:- ऑर्डर लगाएं और निवेश ट्रैक करें
अमेरिकी बाजार के कारोबारी समय के दौरान ऑर्डर दिए जा सकते हैं। इसके बाद Kite पर अपनी विदेशी होल्डिंग्स को भारतीय शेयरों के पोर्टफोलियो के साथ ट्रैक कर सकते हैं।
निवेश का नियम और लिमिट?
जेरोधा (Zerodha) की यह सुविधा फिलहाल पात्र भारतीय व्यक्तिगत निवेशकों के लिए है। सभी प्रकार के अकाउंट होल्डर इसका इस्तेमाल नहीं कर सकते।
- निवेशक:- भारत में रहने वाले ऐसे व्यक्तिगत निवेशक जिनका Zerodha अकाउंट इस सुविधा के लिए योग्य है।
- NRI: फिलहाल इस सुविधा में शामिल नहीं हैं।
- जॉइंट अकाउंट: संयुक्त खाताधारक पात्र नहीं हैं।
- कंपनी और अन्य संस्थाएं: HUF, कंपनियां, LLP और पार्टनरशिप फर्म फिलहाल इस सुविधा का इस्तेमाल नहीं कर सकतीं।
- निवेश का तरीका: यह डिलीवरी आधारित निवेश सुविधा है। इसमें इंट्राडे ट्रेडिंग, मार्जिन ट्रेडिंग और F&O (Futures & Options) उपलब्ध नहीं हैं।
RBI के नियमों के तहत कितने डॉलर भेज सकते हैं?
भारतीय रिजर्व बैंक की LRS (Liberalised Remittance Scheme) के तहत पात्र निवासी व्यक्ति एक वित्त वर्ष में अनुमत उद्देश्यों के लिए कुल $250,000 तक विदेश भेज सकते हैं। यह सीमा केवल अमेरिकी शेयरों में निवेश के लिए अलग से नहीं है, बल्कि LRS के तहत आने वाले सभी पात्र रेमिटेंस पर लागू होती है।
इसलिए अगर आपने उसी फाइनेंशियल ईयर में किसी दूसरे अनुमत उद्देश्य के लिए विदेश पैसा भेजा है, तो वह भी आपकी कुल LRS सीमा में गिना जा सकता है। पैसा ट्रांसफर करने से पहले लागू नियमों और बैंक की शर्तों की जांच कर लें।
निवेश से पहले इन 4 बातों का रखें ध्यान
1- डॉलर और रुपये की विनिमय दर:- अमेरिकी शेयरों से डॉलर में रिटर्न मिलने के बावजूद रुपये के मुकाबले डॉलर की कीमत में बदलाव आपके वास्तविक रिटर्न को प्रभावित कर सकता है।
2- सभी शुल्क जोड़ें:- ब्रोकरेज के अलावा करेंसी कन्वर्जन, रेमिटेंस और लागू टैक्स को भी लागत में शामिल करें।
3- विदेशी बाजार का जोखिम:- अमेरिकी कंपनियों के शेयरों की कीमतें भी गिर सकती हैं। केवल बड़ी या लोकप्रिय कंपनी होने से मुनाफे की गारंटी नहीं मिलती।
4- टैक्स और नियम समझें:- विदेशी शेयरों से होने वाली कमाई, डिविडेंड और विदेशी संपत्तियों की रिपोर्टिंग पर लागू भारतीय टैक्स नियमों को समझना जरूरी है।
निवेशकों के लिए क्या है इसका मतलब?
जेरोधा (Zerodha) की नई सुविधा भारतीय निवेशकों के लिए वैश्विक बाजारों तक पहुंच आसान बनाने की दिशा में एक कदम है। अब पात्र निवेशक अपने मौजूदा अकाउंट के जरिए अमेरिकी शेयरों और ETF में निवेश कर सकते हैं, जबकि फ्रैक्शनल इंवेस्टिंग से छोटी रकम के साथ शुरुआत करने का विकल्प भी मिलता है।
हालांकि, निवेश शुरू करने से पहले कुल लागत, करेंसी जोखिम, टैक्स और LRS के नियम समझना जरूरी है। कम ब्रोकरेज या सिर्फ $1 से निवेश की सुविधा अपने आप में बेहतर रिटर्न की गारंटी नहीं है।
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