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अंडों के डर, स्वतंत्रता सेनानी टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट से महुआ मोइत्रा को राहत नहीं

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भारत के Supreme Court ने Trinamool Congress सांसद Mahua Moitra की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े एक मामले में जांच अधिकारी के समक्ष वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने की अनुमति मांगी थी। Justices Dipankar Datta और Sheel Nagu की पीठ ने शुक्रवार की सुनवाई के दौरान उनकी याचिका खारिज करते हुए संभावित खतरों को लेकर उनकी आशंका पर तीखे सवाल उठाए।

## व्यक्तिगत रूप से पेश होने की चुनौती खारिज

जून में BJP नेता की शिकायत के बाद Moitra के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने Facebook पर भड़काऊ वीडियो पोस्ट किए थे। विवाद तब और बढ़ गया जब BJP समर्थक कथित तौर पर Krishnanagar की एक अदालत के बाहर एकत्र हुए। इनमें से कुछ लोग उन पर फेंकने के लिए अंडे और टमाटर लेकर आए थे।

पिछले महीने Calcutta High Court ने उन्हें अस्थायी राहत देते हुए FIR पर रोक लगा दी थी और उन्हें 14 अगस्त को जांच अधिकारी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया था।

Supreme Court में सुनवाई के दौरान Moitra की ओर से Senior Advocate Gopal Sankaranarayanan ने आग्रह किया कि उन्हें थाने में वर्चुअल माध्यम से पेश होने की अनुमति दी जाए। उन्होंने व्यक्तिगत सुरक्षा का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें पहले धमकियां मिल चुकी हैं और पिछली पेशियों के दौरान वास्तव में उन पर अंडे भी फेंके गए थे।

## Supreme Court की कड़ी प्रतिक्रिया

Supreme Court ने तीखी टिप्पणियों के साथ प्रतिक्रिया दी। Justice Datta ने उनके डर की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा: “You are a member of parliament? Having taken the plunge into politics, you fear eggs? When our freedom fighters have taken bullets on their chest?”

पीठ ने कहा कि केवल डर के आधार पर विशेष व्यवहार का अधिकार नहीं मिल सकता, खासकर राजनेताओं को। पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि सार्वजनिक जीवन का हिस्सा होने के कारण विरोध या शत्रुता का सामना करना पड़ता है।

## अदालत का फैसला और अगले कदम

Moitra की सुरक्षा संबंधी चिंताओं से अदालत के संतुष्ट न होने पर Sankaranarayanan ने सुनवाई के दौरान याचिका वापस ले ली। इसके बाद Supreme Court में दायर याचिका को वापस ली गई याचिका के रूप में खारिज कर दिया गया।

पीठ ने यह भी कहा कि Calcutta High Court पहले ही Moitra को जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दे चुका है। High Court के आदेश के पैराग्राफ 19 का हवाला देते हुए Supreme Court ने संकेत दिया कि अनुपालन न करने पर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं: “You don’t appear. And then face the music before the High Court. If you are aggrieved, then come.”

## कौन-कौन मौजूद था

Senior Advocate Sankaranarayanan के अलावा, Moitra की ओर से advocates Kaustubh Chaturvedi, Harshit Anand, Shourya Dasgupta, Siddharth Venugopal और Kavya Venkatesh पेश हुए। पीठ की अध्यक्षता Justices Datta और Nagu ने की।

## व्यापक प्रभाव और संदर्भ

यह मामला राजनीतिक पद, सार्वजनिक सुरक्षा और जांच का सामना कर रहे व्यक्तियों के कानूनी दायित्वों के बीच तनाव को उजागर करता है। एक सार्वजनिक व्यक्ति के रूप में Moitra के दूरस्थ रूप से पेश होने के अनुरोध ने इस सवाल को जन्म दिया है कि अदालतें भीड़ की धमकियों के आरोपों और कानूनी कार्यवाही में व्यक्तिगत जवाबदेही की अपेक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाती हैं।

इसके अलावा, Supreme Court की स्वतंत्रता सेनानियों से की गई तुलना एक प्रतीकात्मक मानक को रेखांकित करती है: सार्वजनिक सेवा करने वालों या राजनीतिक उद्देश्यों के लिए खड़े होने वालों से अक्सर शत्रुता सहने की अपेक्षा की जाती है। अदालत का यह फैसला भविष्य के उन मामलों को प्रभावित कर सकता है, जहां कानूनी आदेशों के साथ धमकियां, विरोध प्रदर्शन या शत्रुता जुड़ी हो और संबंधित पक्ष किसी अपवाद की मांग कर रहे हों।

सुनवाई पूरी होने के बाद अब Moitra को High Court के पहले के निर्देश के अनुसार 14 अगस्त को जांच अधिकारी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होना आवश्यक है। Supreme Court के फैसले के बाद दूरस्थ रूप से पेश होने के संबंध में उनके लिए High Court या apex court का कोई लंबित आदेश नहीं बचा है।

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