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अकाउंट से नहीं कटेंगे पैसे! ऑनलाइन फ्रॉड पर RBI का बड़ा वार, बैंक लगाएंगे ‘डेबिट होल्ड’

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अगर आपके बैंक अकाउंट में कोई संदिग्ध या फ्रॉड वाला ट्रांजैक्शन होता है, तो अब बैंक उस पैसे को तुरंत निकलने से रोक सकता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने साइबर फ्रॉड और मनी म्यूल अकाउंट पर लगाम लगाने के लिए नए नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है। इसके तहत बैंक संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर अस्थायी डेबिट होल्ड (Debit Hold) लगा सकेंगे। यानी बैंक उस रकम को कुछ समय के लिए होल्ड कर देगा, ताकि बिना जांच के पैसा आगे ट्रांसफर या निकाला न जा सके। यह कदम आम बैंक ग्राहकों को साइबर फ्रॉड से बचाने में मदद कर सकता है।

1,000 रुपये या उससे ज्यादा के संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर नजर

आरबीआई के प्रस्तावित नियमों के मुताबिक अगर बैंक के सिस्टम को 1,000 रुपये या उससे ज्यादा का कोई ट्रांजैक्शन संदिग्ध लगता है, तो बैंक उस पर अस्थायी रोक लगा सकता है। बैंक ग्राहक को इसकी जानकारी देगा और पूछेगा कि यह ट्रांजैक्शन किस वजह से हुआ है। यानी अगर आपके अकाउंट में कोई ऐसा पैसा आया है, जिसे बैंक फ्रॉड से जुड़ा मान रहा है, तो उसे तुरंत निकालने या आगे भेजने पर रोक लग सकती है। इससे संदिग्ध रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने में मदद मिलेगी।

ग्राहक को जवाब देने के लिए मिलेंगे 20 दिन

सबसे अहम बात यह है कि बैंक बिना वजह हमेशा के लिए पैसा नहीं रोक सकेगा। ग्राहक को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। डेबिट होल्ड लगाए जाने के बाद खाताधारक को 20 दिन का समय दिया जाएगा कि वह ट्रांजैक्शन सही होने का कारण और जरूरी जानकारी बैंक को दे सके। अगर बैंक ग्राहक की दी गई जानकारी से संतुष्ट हो जाता है, तो वह डेबिट होल्ड हटा देगा।

जवाब मिलने के 10 दिन में बैंक को लेना होगा फैसला

ग्राहक की तरफ से स्पष्टीकरण मिलने के बाद बैंक को ज्यादा लंबा इंतजार नहीं करना होगा। प्रस्तावित नियमों के अनुसार बैंक को 10 दिनों के अंदर फैसला लेना होगा कि रोक हटानी है या जारी रखनी है। अगर ग्राहक की तरफ से कोई जवाब ही नहीं मिलता है, तो बैंक को डेबिट होल्ड लगाए जाने की तारीख से 30 दिनों के अंदर फैसला करना होगा।

फ्रॉड का शक हुआ तो पुलिस तक पहुंचेगा मामला

अगर बैंक को लगता है कि ट्रांजैक्शन साइबर फ्रॉड से जुड़ा है, तो वह मामले को पुलिस या संबंधित जांच एजेंसी के पास भी भेज सकता है। जांच एजेंसी की ओर से कोई अलग निर्देश आने पर बैंक को उसके मुताबिक कार्रवाई करनी होगी। अगर ऐसी कोई अलग हिदायत नहीं आती है, तो प्रस्तावित नियमों के तहत अस्थायी डेबिट होल्ड का अधिकतम पीरियड 60 दिन का हो सकता है।

पूरे अकाउंट पर रोक आखिरी विकल्प

अगर बैंक को सिर्फ एक ट्रांजैक्शन नहीं, बल्कि पूरा अकाउंट मनी म्यूल अकाउंट लगता है, तो पूरे अकाउंट पर भी डेबिट होल्ड लगाया जा सकता है। हालांकि RBI ने साफ किया है कि पूरे अकाउंट को होल्ड करना आखिरी विकल्प होना चाहिए और इसे केवल खास परिस्थितियों में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

ग्राहकों के लिए क्यों फायदेमंद है यह नियम?

इसका सीधा फायदा यह हो सकता है कि अगर किसी खाते में फ्रॉड की रकम पहुंचती है, तो बैंक उसे तुरंत आगे निकलने से रोक सकेगा। इससे साइबर ठगी के पैसे को दूसरे खातों में ट्रांसफर करने या निकालने का मौका कम हो सकता है। साथ ही अगर ट्रांजैक्शन सही है तो ग्राहक को अपना पक्ष रखने और होल्ड हटवाने का मौका भी मिलेगा।

कब से लागू होगा नया नियम?

RBI के मुताबिक ये अभी प्रस्तावित नियम हैं। ड्राफ्ट में इन्हें 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है। अंतिम नियम आने के बाद ही इसकी पूरी तस्वीर साफ होगी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN