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https://www.livehindustan.com/lh-img/smart/img/2026/10/05/1200x900/phub_1791193678080_xZu3_1791193705944_UTW5_bf3048d6-2912-4961-84b3-feb7901eb87e_nan0.jpgआज हम आपको एक ऐसी साइकोलॉजिकल फिल्म के बारे में बताते हैं जिसे आप अकेले में देखने से पहले सोचें जरूर। ये फिल्म थ्रिल और सस्पेंस से भरी है।
ओटीटी पर कई तरह की फिल्में और सीरीज अवेलेबल हैं जैसे कॉमेडी, सस्पेंस, थ्रिलर, क्राइम। अब अगर आपको साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्में पसंद है तो हम आपको एक ऐसी ही फिल्म के बारे में बताने वाले हैं जिसमें ऐसा सस्पेंस और ट्विस्ट और टर्न्स है जिसे देखकर आपके भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे।
ये एक थ्रिलर फिल्म है। यह फिल्म एक टैलेंटेड आर्टिस्ट की है जिसका नाम महक है, लेकिन एक ट्रॉमेटिक टैक्सी असॉल्ट के बाद उसे एगराफोबिया हो जाता है।
क्या है इसकी स्टोरी
दरअसल, महक एक पार्टी से आते हुए टैक्सी में जाती है, लेकिन इस दौरान टैक्सी ड्राइवर उसका सेक्सुअली असॉल्ट करता है। महक को इसके बाद एक बड़ा ट्रॉमा हो जाता है और वह बाहर जाने से डरने लगती है। महक की दोस्त उसकी मदद करती है और उसे नए अपार्टमेंट में शिफ्ट करती है जहां वह रिकवर कर पाए। लेकिन एगराफोबिया की वजह से वह बाहर जाने से डरती है।
इस बीच महक को फिर पता चलता है कि उसकी जो पिछली किराएदार थी जिया वो अचानक अपार्टमेंट से गायब हो गई थी। अब महक को कुछ विजन आते हैं और उसे आवाजें सुनाई देती हैं। उसे लगता है कि जिया को उसके बॉयफ्रेंड ने मना किया है।
अब महक रियल लाइफ और अपने अंदर के साइकोलॉजिकल राक्षस से लड़ती है। उसकी कहानी में आगे क्या होता है वो आपको फिल्म देखकर पता चलेगा।
कहां देखें फिल्म
अगर आपको साइकोलॉजिकल, थ्रिलर और सस्पेंस से भरी फिल्में देखना है तो आप इसे जी5 में देख सकते हैं।
कितनी है इसकी आईएमडीबी रेटिंग
इस फिल्म की आईएमडीबी रेटिंग की बात करें तो राधिका आप्टे की फोबिया की 6.8 रेटिंग है।
इस फिल्म को पवन कृपलानी ने डायरेक्ट किया है। वहीं पवन ने अरुण सुकुमार, पूजा लढा सूर्ति के साथ इसे लिखा है। फिल्म में राधिका आप्टे के साथ अमृता बाग्ची, निवेदिता भट्टाचार्या लीड रोल में हैं।
बता दें कि इस फिल्म के जरिए राधिका ने पहली बार लीड रोल मूवी की थी। फोबिया में राधिका की परफॉर्मेंस को काफी पसंद किया गया था। क्रिटिक्स ने राधिका की खूब तारीफ की थी।
पीटीआई से बात करते हुए राधिका ने इस पर कहा था कि वह कभी फिल्म का प्रेशर नहीं लेती है। उन्हें पता है कि उन्हें अपना काम अच्छे से करना है और जो ड्यूटी उन्हें दी जाती है उसे वो अच्छे से करती है। अगर कोई उसकी तारीफ करता है तो अच्छी बात है, लेकिन अगर नहीं करता तो वह और बेहतर आर्टिस्ट बनने की कोशिश करता है।
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