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अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने साफ चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर दोनों देशों के बीच स्थायी युद्धविराम समझौता नहीं हुआ तो अमेरिकी सेना ईरान पर हमले दोबारा शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए अस्थायी रूप से फिर से खोलने के समझौते के बावजूद क्षेत्रीय तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने साफ चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर दोनों देशों के बीच स्थायी युद्धविराम समझौता नहीं हुआ तो अमेरिकी सेना ईरान पर हमले दोबारा शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। रक्षा सचिव हेगसेथ ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि अगर समझौता अंतिम रूप नहीं लेता तो हम अपना सैन्य अभियान फिर से शुरू कर देंगे। हमारे पास पर्याप्त से कहीं ज्यादा भंडार हैं। हम मध्य पूर्व हो या दुनिया के किसी भी हिस्से में, बहुत मजबूत स्थिति में हैं।

भूमिगत मिसाइल भंडारों की बहाली

28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान की सैन्य संरचनाओं को भारी नुकसान पहुंचा था। सड़कें तबाह हो गईं और भूमिगत सुरंगों के प्रवेश द्वार मलबे से ढक गए। लेकिन युद्धविराम के बावजूद तेहरान अब इन क्षतिग्रस्त ठिकानों को तेजी से सक्रिय करने में जुटा हुआ है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, सैटेलाइट तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि ईरानी इंजीनियरिंग टीमें बुलडोजर, डंप ट्रक और भारी मशीनरी का इस्तेमाल कर भूमिगत मिसाइल भंडारण स्थलों को साफ कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल प्रवेश द्वार नष्ट करने से ईरान की मिसाइल क्षमता पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकती, क्योंकि तेहरान ने अपनी भूमिगत सुविधाओं को बेहद मजबूत और विस्तृत नेटवर्क के रूप में विकसित किया है।

8 अप्रैल युद्धविराम के बाद अभूतपूर्व तेजी

8 अप्रैल को युद्धविराम लागू होने के बाद इन भूमिगत स्थलों पर खुदाई के प्रयासों में तेजी आई है। जेम्स मार्टिन सेंटर फॉर नॉनप्रोलिफरेशन स्टडीज के रिसर्च एसोसिएट सैम लेयर ने सीएनएन को बताया कि ईरान के पास अभी भी विशाल मिसाइल भंडार मौजूद हैं। लॉन्चर और प्रशिक्षित चालक दल उपलब्ध होने तक वे हमले जारी रख सकते हैं। रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि ईरान ने 18 प्रमुख भूमिगत मिसाइल स्थलों पर स्थित कुल 69 सुरंगों में से 50 के प्रवेश द्वारों को दोबारा खोलने में सफलता हासिल कर ली है।

क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरा

वहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर स्थायी समझौता नहीं हुआ तो पूरे पश्चिम एशिया में एक बार फिर बड़े पैमाने पर संघर्ष छिड़ सकता है। इजरायल पहले ही चेतावनी दे चुका है कि वह ईरान की बढ़ती मिसाइल क्षमता को बर्दाश्त नहीं करेगा। वहीं ईरान का दावा है कि उसके कदम पूरी तरह रक्षात्मक हैं और वह किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है। फिलहाल स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। राजनयिक प्रयास जारी हैं, लेकिन दोनों पक्षों की सैन्य तैयारियां भी तेज हो गई हैं। कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में होने वाले फैसले निर्णायक साबित हो सकते हैं।

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