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अमेरिका ने चीनी सामानों की ट्रांसशिपमेंट जोखिम वाले देशों में भारत को भी चिन्हित किया

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भारत को अमेरिका ने चीनी वस्तुओं के ट्रांसशिपमेंट को सुगम बनाने वाले शीर्ष जोखिम वाले देशों में शामिल किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब Washington शुल्कों से बचने के प्रयासों पर अंकुश लगाने के लिए अपनी कोशिशें तेज कर रहा है। White House की रिपोर्ट में 40 से अधिक देशों को उस गतिविधि में शामिल बताया गया है, जिसे वह “Great Transshipment Scam” कहता है। इस घटना को व्यापार कानून की विश्वसनीयता और अमेरिकी बाजार के हितों के लिए खतरे के रूप में देखा जा रहा है।

## “Diversified Scale Leaders” में भारत की ऊंची रैंकिंग

भारत रिपोर्ट की शीर्ष श्रेणी, Tier 1: “Diversified Scale Leaders” में शामिल है। इस श्रेणी में Canada, European Union, Japan, South Korea, Taiwan, Israel और Mexico जैसी उन्नत अर्थव्यवस्थाएं भी शामिल हैं।

यह वर्गीकरण चीन के साथ आर्थिक संबंधों के पैमाने, औद्योगिक विविधता और आर्थिक परस्पर जुड़ाव पर आधारित है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि ये देश जानबूझकर शुल्क चोरी को सुगम बना रहे हैं। फिर भी, इससे यह संकेत मिलता है कि ऐसे देशों में उन व्यापार प्रवाहों का जोखिम अधिक है, जिनमें माल को दूसरे मार्ग से भेजकर और दोबारा लेबल लगाकर उसके वास्तविक मूल को छिपाया जा सकता है। भारत का शामिल होना इस अमेरिकी चिंता को दर्शाता है कि चीनी निर्यात मजबूत व्यापार प्रणालियों वाले मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिका में प्रवेश कर रहे हैं।

अन्य श्रेणियों में शामिल हैं:
– **Tier 2**: चीन के साथ महत्वपूर्ण आर्थिक एकीकरण वाले देश—Brazil, Indonesia, Malaysia, Thailand, Turkey और Vietnam।
– **Tier 3**: छोटे और अवसरवादी लक्ष्य वाले देश—Bangladesh, Cambodia, Philippines, Singapore, Sri Lanka और UAE।

## किन गतिविधियों पर अमेरिका की नजर है?

कई व्यापारिक गतिविधियां जांच के दायरे में हैं:

– **मार्ग बदलना और दोबारा लेबल लगाना:** शुल्कों से बचने के लिए चीन से आए सामान को किसी तीसरे देश का उत्पाद बताया जाता है।
– **असेंबली में न्यूनतम प्रोसेसिंग:** घटकों में केवल मामूली बदलाव किए जाते हैं—जैसे चीन में बने इलेक्ट्रिक मोटरों को फर्नीचर में लगाना—या सामान को उन असेंबली इकाइयों में जोड़ा जाता है, जिन्हें अमेरिकी अधिकारी “screwdriver factories” कहते हैं, ताकि उत्पाद के मूल देश का सतही स्वरूप बनाया जा सके।
– **झूठी घोषणाएं:** शुल्क प्रवर्तन से बचने के लिए मूल देश से जुड़े लेबल में हेरफेर किया जाता है।

ये तरीके उत्पादों के “substantial transformation” की उस आवश्यकता को चुनौती देते हैं, जिसके तहत मूल देश की स्थिति बदलने के लिए उत्पाद में पर्याप्त रूपांतरण होना जरूरी है। व्यापार कानूनों के अनुसार, केवल वे उत्पाद ही वैध रूप से पुनर्वर्गीकृत किए जा सकते हैं, जिनमें पर्याप्त रूपांतरण हुआ हो।

## अमेरिकी प्रतिक्रिया: योजनाएं, दंड और व्यापार रणनीति

कथित ट्रांसशिपमेंट दुरुपयोग से निपटने के लिए अमेरिका कई रणनीतियां लागू करने की योजना बना रहा है:

– **Executive order:** व्यापार नियमों को अधिक सख्ती से लागू करने के लिए U.S. Customs and Border Protection की शक्तियों को बढ़ाना।
– **AI-driven monitoring system (“detective border”):** ऐसा तंत्र, जिसे अमेरिकी तटों पर पहुंचने से पहले उच्च जोखिम वाली खेपों का अनुमान लगाने के लिए तैयार किया गया है।
– **Anti-transshipment clauses:** ये भविष्य के व्यापार समझौतों में मानक शर्त बन सकती हैं; India का उल्लेख ऐसे साझेदार के रूप में किया गया है, जहां ये शर्तें लागू हो सकती हैं।

अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि ट्रांसशिपमेंट में शामिल कंपनियों पर उल्लंघन पाए जाने की स्थिति में पिछली खेपों पर भी पूर्वव्यापी शुल्क लगाया जा सकता है—यह अवधि एक वर्ष तक हो सकती है।

## प्रतिक्रियाएं, प्रभाव और व्यापार वार्ताएं

वरिष्ठ व्यापार सलाहकार Peter Navarro ने India और Vietnam को विशेष रूप से चेतावनी दी है कि वे अमेरिकी व्यापार नियमों को दरकिनार करने वाली वस्तुओं को सक्षम न बनाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब शुल्क अधिक हों, तब देशों को नियमों का पालन करना चाहिए, न कि खामियों का फायदा उठाना चाहिए।

Navarro ने कहा, “अमेरिकी बाजार तक प्राथमिकता वाली पहुंच किसी और के निर्यात को वैध दिखाने का लाइसेंस नहीं है।”

ये घटनाक्रम पारस्परिक शुल्क ढांचे को लेकर जारी U.S.-India वार्ताओं के बीच सामने आए हैं। जिस समय Washington, Russia के साथ India के ऊर्जा और व्यापार संबंधों को लेकर चिंता जता रहा है, उसी समय ट्रांसशिपमेंट को लेकर आशंकाएं राजनयिक जटिलता को और बढ़ा सकती हैं।

## ट्रांसशिपमेंट क्यों महत्वपूर्ण है?

ट्रांसशिपमेंट का अर्थ है अंतिम गंतव्य तक पहुंचने से पहले माल को तीसरे देशों के जरिए भेजना। यह हमेशा अवैध नहीं होता और वैध वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं का हिस्सा भी हो सकता है। हालांकि, Washington की चिंता उन परिस्थितियों को लेकर है, जहां चीनी उत्पादों में केवल सतही बदलाव या बहुत कम प्रोसेसिंग की जाती है, ताकि उनका मूल छिपाया जा सके और इस तरह अमेरिकी शुल्कों से बचा जा सके।

रिपोर्ट में ऐसे उदाहरण दिए गए हैं, जिनमें Vietnam में निर्मित रिक्लाइनर में चीनी इलेक्ट्रिक मोटरों का इस्तेमाल किया गया, या ऐसी फैक्ट्रियां शामिल हैं जो निर्यात के लिए केवल न्यूनतम असेंबली करती हैं। इन गतिविधियों को मूल देश की स्थिति को कानूनी रूप से बदलने के लिए अपर्याप्त माना गया है।

व्यापार साझेदार के रूप में India की भूमिका की गहन समीक्षा यह दर्शाती है कि Washington व्यापार अनुपालन मजबूत करने और मूल देश से जुड़ी घोषणाओं में केवल कार्यप्रणाली के बजाय मंशा को लागू करने पर अधिक ध्यान दे रहा है। पूर्वव्यापी शुल्क लागू करने, AI निगरानी और बातचीत में प्रभाव जैसे संभावित नीतिगत साधनों के साथ Washington अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मूल देश साबित करने के तरीके को बदलने की दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है।

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