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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत दौरे में बताई पाकिस्तान की अहमियत

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Source :- BBC INDIA

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो

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पढ़ने का समय: 6 मिनट

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 19 से 22 अक्तूबर तक भारत के दौरे पर हैं. इस दौरे में वह मुंबई और जामनगर रहेंगे. मंगलवार को मुंबई में उनकी मुलाक़ात भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से हुई.

इस दौरे में मार्को रुबियो ने कुछ इंटरव्यू भी दिए और उनमें अहम सवालों के जवाब दिए हैं. ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में पाकिस्तान की अमेरिका से क़रीबी बढ़ी है. भारत के पत्रकारों ने रुबियो से अमेरिका और पाकिस्तान से जुड़े सवाल भी पूछे.

सीएनएन न्यूज़ 18 के राहुल जोशी ने मार्को रुबियो से पूछा, ”एक और सवाल पाकिस्तान को लेकर अमेरिका के रुख़ पर है. आपने 2025 में सीनेटर रहते हुए कहा था कि अगर पाकिस्तान भारत के ख़िलाफ़ आतंकवाद को बढ़ावा देता है, तो आप पाकिस्तान को दी जाने वाली अमेरिकी सुरक्षा सहायता में कटौती के लिए एक बिल पेश करेंगे. क्या आपका रुख़ बदला है? क्या इस नीति में कोई बदलाव हुआ है?”

इसके जवाब में रुबियो ने कहा, ”हम दुनिया में कहीं भी होने वाले आतंकवाद के ख़िलाफ़ हैं. हम उन सभी लोगों और देशों के ख़िलाफ़ हैं, जो आतंकवाद को प्रायोजित करते हैं.

मेरी नई भूमिका में, अब मैं सीनेटर नहीं हूँ, बल्कि विदेश मंत्री हूँ. मुझे अमेरिका की विदेश नीति का संचालन करना है. इसके लिए हमें विभिन्न देशों के साथ संबंध बनाए रखने होते हैं, जिनमें वे देश भी शामिल हैं, जिनके साथ हमारे कुछ मुद्दों पर मतभेद हो सकते हैं.

पाकिस्तान के मामले में, यह एक ऐसा देश है, जिसके साथ हमें संबंध बनाए रखने होंगे. उसके पास परमाणु हथियार हैं. भौगोलिक स्थिति के लिहाज़ से भी हमें उसके साथ बातचीत और संपर्क बनाए रखने की ज़रूरत है.

ठीक उसी तरह, जैसे भारत को ईरान के साथ संबंध रखने पड़ते हैं और वह वहाँ के नेताओं से मुलाक़ातें भी होती हैं.”

एक तरीक़े से मार्को रुबियो ने अमेरिका के लिए पाकिस्तान की अहमियत बता दी है और ये बताने की कोशिश की है कि उसके हित में जो होगा, वही करेगा.

इस यात्रा का कारण बताते हुए रुबियो ने कहा, “पहली बात तो यह है कि भारत दुनिया का सबसे ज़्यादा आबादी वाला देश है. यह दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र है. यह अमेरिका का एक मज़बूत जियोपॉलिटिकल साझेदार भी है…मुझे लगता है कि हम भारत का दौरा काफ़ी कम करते हैं. मुझे सच में लगता है कि हमें यहाँ और ज़्यादा आना चाहिए.”

हालांकि कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि मार्को रुबियो की मौजूदा यात्रा का मुख्य मक़सद ऊर्जा सुरक्षा है, शायद इसीलिए उन्होंने अपने दौरे के लिए मुंबई और गुजरात के जामनगर रिफ़ाइनरी को चुना.

पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर क्या कहा

मार्को रुबियो

हाल के दिनों में, ख़ासकर भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद से पाकिस्तान के नेताओं, ख़ासकर फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर को लेकर ट्रंप प्रशासन का भरोसा बढ़ा है.

मार्को रुबियो ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में इन सवालों का जवाब दिए.

उनसे पूछा गया था कि भारत में कुछ लोग इसे निक्सन-किसिंजर के दौर की वापसी के तौर पर भी देखते हैं, जब अमेरिकी प्रशासन पाकिस्तान के सैन्य शासकों का समर्थन करता था.

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, “मैं 1970 के दशक का उदाहरण नहीं दूंगा, क्योंकि आज की दुनिया उस दौर से बिल्कुल अलग है. उस समय शीत युद्ध चल रहा था और कई तरह की दूसरी परिस्थितियां थीं, जो अब मौजूद नहीं हैं.”

“दूसरी बात, दुनिया के किसी भी देश के साथ हमारे संबंध किसी भी तरह से भारत के साथ हमारे रिश्तों की क़ीमत पर नहीं हैं. मुझे उम्मीद है कि मेरे भारत दौरे, व्यापार समझौते को लेकर हमारी प्रतिबद्धता, अब तक हुई सभी बातचीत और साथ मिलकर किए जा रहे काम इस बात का सबूत हैं.”

“पाकिस्तान एक ऐसा देश है, जिसके साथ हमारे संबंध हैं और हमें ये संबंध बनाए रखने की ज़रूरत है. कुछ मायनों में, अगर हम ऐसे क़दमों को रोकने में मदद कर सकें, जो आगे चलकर संघर्ष की वजह बन सकते हैं, तो यह सकारात्मक बात होगी. अगर हम अपने प्रभाव का इस्तेमाल सकारात्मक तरीके से कर सकें, तो इससे मदद मिल सकती है.”

“लेकिन भारत में सभी को यह भरोसा होना चाहिए कि पाकिस्तान समेत दुनिया के किसी भी देश के साथ हमारे संबंध भारत के साथ हमारे रिश्तों की क़ीमत पर नहीं होंगे. हम भारत के साथ अपने संबंधों को इस नज़रिए से नहीं देखते.”

भारत पर टैरिफ़ को लेकर क्या बोले

रुबियो ने कहा, “इनमें से कोई भी टैरिफ़ भारत को सज़ा देने या नुक़सान पहुंचाने के लिए नहीं लगाया गया है. ये एक व्यापक विदेश नीति का हिस्सा हैं. दुर्भाग्य से, इस नीति में रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध भी शामिल है, जिसे हम ख़त्म होते देखना चाहते हैं.”

उन्होंने कहा, “आपने देखा होगा कि कांग्रेस की ओर से पास किए गए क़ानून के तहत टैरिफ़ की घोषणा करना ज़रूरी है. लेकिन राष्ट्रपति इसे लागू नहीं करते क्योंकि वो समझते हैं कि इससे भारत के साथ बहुत महत्वपूर्ण रिश्ते को नुकसान पहुंच सकता है.”

उन्होंने कहा, “इसलिए यह विदेश नीति में एक संतुलन का हिस्सा है. यह मुश्किल भी है क्योंकि एक तरफ़ आप युद्धरत पक्षों को बातचीत की टेबल पर लाना चाहते हैं, दूसरी तरफ़ टैरिफ़ लगाने से दूसरे रिश्तों पर भी दबाव बढ़ता है. इसमें संतुलन बनाने की ज़रूरत होती है और राष्ट्रपति पूरी कोशिश कर रहे हैं.”

भारत के ताज़ा दौरे से पहले मार्को रुबियो ने कहा था कि भारत के लिए रूस से एक दिन में (अचानक) ऊर्जा का आयात बंद कर देना मुश्किल होगा.

इससे पहले बीते शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ ऐसे प्रतिबंधों को कुछ समय के लिए टाल दिया है, जिनके तहत रूस से तेल और गैस ख़रीदने के लिए भारत और चार अन्य देशों पर 100 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाए जा सकते थे.

रूबियो के दौरे पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को मुंबई में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो (बाएं) और संयुक्त अरब अमीरात के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन ज़ायेद अल नाहयान के साथ

अमेरिकी विदेश मंत्री के ताज़ा दौरे को लेकर एक्सपर्ट का कहना है कि यह ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार से संबंधित गतिरोध के प्रति अमेरिका के नरम रुख़ को दिखाता है.

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी ने एक्स पर लिखा, “अमेरिका और भारत के राजनीतिक संबंधों में तनाव के बीच, रुबियो के इस दौरे का मक़सद ऊर्जा सुरक्षा, कंपनियों के बीच साझेदारी और व्यापार से जुड़े गतिरोध को दूर करने पर ध्यान देना है.”

“रुबियो ने अपने दौरे के लिए भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई और जामनगर में दुनिया के सबसे बड़े तेल रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स को चुना है. जामनगर में अंबानी परिवार उनकी मेज़बानी करेगा. इससे साफ़ है कि वह कूटनीतिक मतभेदों के बजाय व्यावहारिक सहयोग पर ज़ोर दे रहे हैं.”

उन्होंने आगे लिखा, “इस रुख़ से ऊर्जा, निजी क्षेत्र में निवेश और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है. इससे दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों में सहयोग की गति बनाए रखने में भी मदद मिलेगी.”

थिंक टैंक ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन में सीनियर फ़ेलो तन्वी मदान ने एक्स पर लिखा कि बैठक को लेकर ‘भारत सरकार और अमेरिकी सरकार, दोनों ने ऊर्जा संबंधों का ज़िक्र किया है.’

मुंबई दौरे में यूएई के विदेश मंत्री अब्दुल्लाह बिन ज़ायेद भी शामिल थे.

यूएई विदेश मंत्रालय ने इसे रणनीतिक साझेदारी के मजबूत होने का ज़िक्र किया और कहा कि त्रिपक्षीय साझेदारी विकास और समृद्धि के नए दरवाजे खोलता है.

एक्स पर जारी बयान में कहा गया है, “अब्दुल्ला बिन ज़ायद ने मुंबई में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ त्रिपक्षीय बैठक में हिस्सा लिया.”

“बैठक में भारत, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात के बीच आर्थिक, व्यापारिक, निवेश, तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्रों में साझेदारी और सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हुई. इसके साथ ही, साझा रणनीतिक पहलों और क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा और स्थिरता बढ़ाने के प्रयासों पर भी बातचीत हुई.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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