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पाकिस्तान और ईरान के बीच प्रमुख सीमा चौकियों से होने वाला व्यापार लगातार चौथे दिन भी बंद है.
इससे बलूचिस्तान के रास्ते दोनों पड़ोसी देशों के बीच होने वाली व्यापारिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. सीमा के दोनों ओर सामान से लदे सैकड़ों कंटेनर फँसे हुए हैं.
इस्लामाबाद और तेहरान के अधिकारियों ने 17 अक्तूबर, शनिवार को सीमा चौकियां बंद किए जाने की पुष्टि की थी. लेकिन अचानक लिए गए इस फ़ैसले की वजह दोनों देशों की ओर से अलग-अलग बताई गई है.
वैसे, ईरान और पाकिस्तान दोनों देशों ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि व्यापार पर लगी यह रोक अस्थायी है.
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पाकिस्तान ने कहा- तस्करी और सुरक्षा से जुड़ी चिंता
बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता और मुख्यमंत्री के सलाहकार शाहिद रिंद ने 17 अक्तूबर को एक्स पर एक बयान जारी किया था.
उन्होंने कहा था कि सीमा चौकियां बंद करने का मक़सद ‘सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को दूर करना, तस्करी रोकना और सीमा पर कामकाज़ के तरीक़े को अधिक प्रभावी बनाना’ है.
शाहिद रिंद के मुताबिक़, सीमा के दोनों ओर सुरक्षा और प्रशासन से जुड़े मामलों को बेहतर बनाने के लिए यह क़दम उठाना ज़रूरी था.
उन्होंने कहा कि सीमा से जुड़ी प्रशासनिक समस्याओं को सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच ‘सकारात्मक प्रगति’ हो रही है और उम्मीद है कि सीमा चौकियां जल्द दोबारा खोल दी जाएंगी.
दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने व्यापार रोके जाने की वजह कुछ ऐसी ‘तकनीकी समस्याओं’ को बताया है, जिनका उन्होंने विस्तार से ज़िक्र नहीं किया.
उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के कारण ‘तुरंत एहतियाती क़दम’ उठाना ज़रूरी हो गया था.
वैसे, सीमा बंद होने से एक दिन पहले पाकिस्तान सरकार ने ईरान से सामान मंगाने वाले व्यापारियों को दी जा रही एक छूट वापस ले ली थी.
पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्रालय ने 16 अक्तूबर, शुक्रवार को वह आदेश रद्द कर दिया, जिसके तहत ईरान से सामान मंगाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक इंपोर्ट फ़ॉर्म यानी ईआईएफ़ से मिलने वाली छूट को बढ़ाया गया था.
पाकिस्तान सरकार ने यह छूट तीन अक्तूबर को दी थी, लेकिन केवल 13 दिन बाद, 16 अक्तूबर को इसे वापस ले लिया और इसके एक दिन बाद ही सीमा पर व्यापार रोक दिया गया.
पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्रालय ने बीबीसी उर्दू से इस बात की पुष्टि की है कि इलेक्ट्रॉनिक इंपोर्ट फ़ॉर्म से मिलने वाली छूट वापस ले ली गई है.
ये सब ऐसे समय में हुआ है, जब कुछ समय पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान पाकिस्तान गए थे.
उनके इस दौरे के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा था कि दोनों देशों का नेतृत्व आपसी व्यापार को बढ़ाकर 10 अरब डॉलर तक ले जाना चाहता है.
‘पाकिस्तानी व्यापारियों को कभी न भर पाने वाला नुक़सान हो सकता है’
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बलूचिस्तान के ग्वादर ज़िले के रहने वाले और बॉर्डर ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अब्दुल ग़फ़ूर होत कहते हैं कि सीमा व्यापार अचानक बंद होने से व्यापारी परेशान हैं और उन्हें कई मुश्किलें आ रही हैं.
उनके मुताबिक़, पाकिस्तान के संबंधित अधिकारियों ने शनिवार को बताया था कि सीमा व्यापार बहुत जल्द दोबारा शुरू हो जाएगा.
इससे व्यापारियों को उम्मीद थी कि नए सप्ताह की शुरुआत में कारोबार फिर शुरू हो जाएगा. लेकिन सोमवार को तीसरे दिन भी सीमा व्यापार बहाल नहीं हो पाया.
अब्दुल ग़फ़ूर होत कहते हैं कि सीमा के दूसरी ओर से उन्हें बताया गया था कि ईरान की तरफ़ से रास्ता बंद नहीं किया गया है.
वह कहते हैं, “इसी वजह से हमने सीमा अधिकारियों से अपील की कि अगर ईरान की ओर से रास्ता बंद नहीं है, तो कम से कम ताज़े फलों, सूखे मेवों और जल्दी ख़राब होने वाले सामान से लदी गाड़ियों को जाने दिया जाए.”
उनके मुताबिक़, पहले कुछ अधिकारियों ने उनकी मांग मानने पर सहमति जताई थी, लेकिन बाद में गाड़ियों को जाने की अनुमति नहीं दी गई.
अब्दुल ग़फ़ूर होत बताते हैं कि शुरुआत में कहा जा रहा था कि सीमा को कस्टम टैक्स और दूसरी तकनीकी समस्याओं के कारण कुछ समय के लिए बंद किया गया है.
लेकिन वह कहते हैं, “अब ऐसा लग रहा है कि ईरान को लेकर शायद किसी तरह का दबाव है, जिसकी वजह से सीमा बंद की गई है.”
पिछले तीन दिनों से पाकिस्तान के सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर चर्चा हो रही है.
कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने सीमा बंद करने के लिए पाकिस्तान सरकार की ओर से बताई गई वजहों पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि इस फ़ैसले के पीछे दूसरे देशों से जुड़े बड़े राजनीतिक कारण भी हो सकते हैं.
हालांकि, बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री के सलाहकार शाहिद रिंद ने कहा था कि सीमा बंद किए जाने को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफ़वाहों में कोई सच्चाई नहीं है.
उन्होंने लोगों से कहा था कि वे बिना पुष्टि वाली जानकारियों और अफ़वाहों पर ध्यान न दें.
अब्दुल ग़फ़ूर होत का कहना है कि अगर सीमा व्यापार शुरू होने में और देर हुई, तो पाकिस्तानी व्यापारियों को ऐसा नुक़सान हो सकता है, जिसकी भरपाई नहीं की जा सकेगी.
सीमा पर इस समय क्या स्थिति है?
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बीबीसी मॉनिटरिंग के मुताबिक़, व्यापारिक गतिविधियां बंद होने के बाद से सीमा के दोनों ओर सैकड़ों कंटेनर फंसे हुए हैं.
इन कंटेनरों में ज़रूरी खाने-पीने की चीज़ें और लिक्विफ़ाइड पेट्रोलियम गैस यानी एलपीजी भी शामिल है.
सीमा व्यापार से जुड़े शम्सुल हक़ ग्वादर चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं.
उन्होंने बीबीसी उर्दू को बताया कि व्यापारियों से मिली जानकारी के मुताबिक़, इस समय गबद-रीमदान सीमा चौकी पर पाकिस्तान की ओर लगभग 1,500 गाड़ियां खड़ी हैं.
इनमें से क़रीब 600 से 700 गाड़ियों को ईरान के रास्ते मध्य एशियाई देशों तक जाना है.
शम्सुल हक़ के मुताबिक़, पाकिस्तान की ओर खड़े अधिकतर कंटेनरों में चावल लदा है. कई दूसरी गाड़ियों में आलू और केले हैं.
ईरान की ओर एलपीजी से लदी गाड़ियां खड़ी हैं. वहां फंसे कंटेनरों की संख्या लगभग तीन हज़ार बताई जा रही है.
शम्सुल हक़ कहते हैं कि दूसरी सीमा चौकियों पर भी बड़ी संख्या में गाड़ियां रुकी हुई हैं.
उनके मुताबिक़, ये सारा सामान पाकिस्तानी व्यापारियों का है. ईरान की ओर फंसे सामान का भुगतान भी पहले ही किया जा चुका है.
वह कहते हैं कि इस स्थिति ने व्यापारियों को बहुत परेशान कर दिया है.
इलेक्ट्रॉनिक इंपोर्ट फ़ॉर्म से मिलने वाली छूट वापस लेने का क्या मतलब है?
सीमा व्यापार रुकने से एक दिन पहले पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्रालय ने एक पत्र जारी किया था.
इसके ज़रिए वह पुराना आदेश वापस ले लिया गया, जिसमें ईरान से सामान मंगाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक इंपोर्ट फ़ॉर्म से मिलने वाली छूट को बढ़ाया गया था.
पाकिस्तान में विदेशी व्यापार के जानकार इक़बाल ताबिश के मुताबिक़, ईआईएफ़ मुख्य रूप से आयात के भुगतान और बैंक से जुड़े दस्तावेज़ों का एक फ़ॉर्म था.
ईरान से ज़मीनी रास्ते के ज़रिए व्यापार करने वालों को इस फ़ॉर्म से छूट देने का मक़सद सामान मंगाने और कस्टम से उसे पास कराने की प्रक्रिया को आसान बनाना था.
अब सरकार ने यह सुविधा वापस ले ली है.
इक़बाल ताबिश के मुताबिक़, इस फ़ैसले का मुख्य मक़सद शायद सरकार का राजस्व बढ़ाना है.
उनका कहना है कि सरकार ईरान से आने वाले सामान को नियमित आयात व्यवस्था के तहत ला सकती है, ताकि उस पर राजस्व वसूला जा सके.
इसके साथ ही इसका मक़सद पाकिस्तान में बड़ी मात्रा में आ रहे ईरानी सामान पर रोक लगाना भी हो सकता है. उनके मुताबिक़, अब पाकिस्तान में ईरानी लस्सी तक आयात की जा रही है.
आर्थिक मामलों के जानकार डॉक्टर इकरामुल हक़ कहते हैं कि इस सुविधा के तहत टैक्स न लगने से पाकिस्तान के कुछ उद्योगों को नुक़सान हो रहा था, क्योंकि ईरान से सस्ता सामान आ रहा था.
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ईरान से बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक सामान भी पाकिस्तान आ रहा था. इससे पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग से जुड़े लोग परेशान थे.
‘सरकार पर व्यापारियों का दबदबा’
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बद्रुद्दीन काकर क्वेटा चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष रह चुके हैं.
उनके मुताबिक़, दुनिया में जहां भी दो देशों की सीमाएं मिलती हैं, वहां सीमा व्यापार होता है. यह कारोबार सामान के बदले सामान या फिर पैसे देकर किया जाता है.
वह कहते हैं कि ईरान पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे हुए हैं. इसलिए ऐसा दबाव दिखाई देता है कि उसके साथ होने वाला व्यापार बैंकिंग माध्यमों के ज़रिए किया जाए.
लेकिन प्रतिबंधों के कारण ईरानी बैंकों के ज़रिए व्यापार करना संभव नहीं है. इसी स्थिति को देखते हुए ईरान के साथ सीमा व्यापार करने वाले व्यापारियों को कुछ छूट दी गई थी.
बद्रुद्दीन काकर कहते हैं कि प्रतिबंधों की यह तलवार व्यापारियों पर हमेशा लटकती रहती है.
उनके मुताबिक़, ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के अलावा पाकिस्तान के बड़े शहरों के व्यापारियों का दबाव भी सीमा व्यापार को प्रभावित करता है.
वह कहते हैं कि ये व्यापारी अपना दबदबा बनाए रखने के लिए सीमा व्यापार ख़त्म करने का दबाव डालते रहते हैं. इसकी वजह से ईरान के साथ सीमा व्यापार में अब मुश्किलें पैदा हो रही हैं.
किन रास्तों से होता है सीमा व्यापार?
बलूचिस्तान के पांच ज़िले ईरान की सीमा से लगते हैं. इनमें चाग़ी, वाशुक, पंजगुर, केच और ग्वादर शामिल हैं.
इन पांचों ज़िलों में पाकिस्तान और ईरान के बीच कई सीमा चौकियां हैं. लेकिन दोनों देशों के बीच सीमा व्यापार मुख्य रूप से चार रास्तों से होता है.
इनमें ग्वादर से गबद-रीमदान, केच से मंद-रदीग, पंजगुर से चीदगी और चाग़ी से तफ़्तान सीमा चौकी शामिल हैं.
दोनों देशों के बीच ज़्यादातर सीमा व्यापार गबद-रीमदान और तफ़्तान के रास्ते होता है.
पाकिस्तान और ईरान के बीच होने वाले व्यापार के पूरे और प्रामाणिक आंकड़े उस तरह उपलब्ध नहीं हैं, जैसे पाकिस्तान के दूसरे देशों के साथ होने वाले व्यापार के आंकड़े मिलते हैं.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक़, साल 2023-24 के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार क़रीब 2.8 अरब डॉलर का था.
इसमें पाकिस्तान ने ईरान को 68 करोड़ 40 लाख डॉलर का सामान बेचा, जबकि ईरान से 2.1 अरब डॉलर का सामान आयात किया गया.
इस औपचारिक व्यापार के अलावा अनौपचारिक तरीक़ों से बड़ी मात्रा में पेट्रोल और डीज़ल की तस्करी करके उसे ईरान से पाकिस्तान भी लाया जाता है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक़, ईरान से आने वाले मुख्य सामान में एलपीजी, तारकोल, खजूर, लोहे या बिना मिश्रण वाले स्टील की छड़ें, टमाटर, प्याज़, सूखे मेवे, एथिलीन पॉलिमर और एसाइक्लिक हाइड्रोकार्बन शामिल हैं.
पाकिस्तान ईरान को चावल, तिल, आम, केले, खट्टे फल, मवेशी, कपड़े, सर्जरी और दांतों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, जिलेटिन, मांस और दूसरी चीज़ें बेचता है.
व्यापारिक संगठनों के मुताबिक़, इस कारोबार का पूरा आंकड़ा सरकारी रिकॉर्ड में साफ़ तौर पर दिखाई नहीं देता.
इसकी एक वजह यह है कि ईरान भेजे जाने वाले सामान के दस्तावेज़ों में अक्सर मध्य एशियाई देशों का नाम लिखा जाता है, जबकि वास्तव में वह सामान ईरान में ही इस्तेमाल होता है.
इसके अलावा सीमा व्यापार में भुगतान अक्सर पाकिस्तानी रुपये में किया जाता है. यह लेन-देन भी सरकारी व्यापारिक आंकड़ों में शामिल नहीं हो पाता.
‘स्पष्ट नीति आने तक व्यापारी सावधानी बरतें’
सीमा पर व्यापार बंद होने के बाद क्वेटा चैंबर ऑफ़ कॉमर्स ने व्यापारियों से कहा है कि वे फिलहाल ईरान से नई ख़रीदारी और सामान की बुकिंग रोक दें.
चैंबर ऑफ़ कॉमर्स ने अपने बयान में कहा है कि व्यापारी संभावित आर्थिक नुक़सान और कस्टम से सामान पास कराने में आने वाली परेशानियों से बचने के लिए ऐसा करें.
उनसे कहा गया है कि इलेक्ट्रॉनिक इंपोर्ट फ़ॉर्म से मिलने वाली छूट बहाल होने और उसे आगे बढ़ाए जाने तक वे ईरान से सामान न ख़रीदें.
ईरान के साथ व्यापार करने वाले सभी कारोबारियों से अपील की गई है कि वे इन निर्देशों का पालन करें और संबंधित अधिकारियों की ओर से स्पष्ट नीति आने तक सावधानी बरतें.
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