Home rss entertainment hindi मनोरंजन समाचार आज हिंदी में रिलीज हुई ये हॉरर फिल्म, KGF फेम प्रशांत नील...

आज हिंदी में रिलीज हुई ये हॉरर फिल्म, KGF फेम प्रशांत नील ने किया है प्रोड्यूस, पढ़ें रिव्यू

4
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

https://www.livehindustan.com/lh-img/smart/img/2026/10/23/1200x900/horror_movie_1792741038080_zLEX_1792741049055_dGnz_cdbd10ce-ba8a-45c9-8e5b-dea28be38b84_pa3J.png

418 Movie Review: आज सिनेमाघरों में साउथ की एक हाॅरर फिल्म रिलीज हुई है। खास बात यह है कि यह फिल्म हिंदी में आई है और इसे KGF फेम प्रशांत नील ने प्रोड्यूस किया है।

आज सिनेमाघरों में एक ऐसी हॉरर फिल्म रिलीज हुई है, जिसकी कहानी एक मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल और उसके एक रहस्यमयी कमरे के इर्द-गिर्द घूमती है। यहां एक तरफ छात्रों की जिंदगी है, तो दूसरी तरफ एक ऐसी इमारत का डरावना अतीत, जिसके बारे में जानकर किसी के भी होश उड़ सकते हैं। फिल्म की शुरुआत काफी दमदार है, लेकिन क्या यह अंत तक दर्शकों को डराने और बांधे रखने में कामयाब होती है? क्या इसमें भूत है और कमरा नंबर 418 का रहस्य क्या है? आइए, जानते हैं इस फिल्म का रिव्यू।

क्या है फिल्म की कहानी?

फिल्म ‘418’ का निर्देशन कीर्तन नादगोड़ा ने किया है। इसकी कहानी विवेक शंकर (सूर्य राज वीरबाथिनी) की है, जो एक मिडिल क्लास परिवार से आता है। उसके माता-पिता उसकी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए अपना घर तक गिरवी रख देते हैं। विवेक का दाखिला कर्नाटक के एक मेडिकल कॉलेज VIMS में होता है, जहां वह नए रेनोवेट हुए हॉस्टल में रहने लगता है।

पहली नजर में यह हॉस्टल किसी दूसरे हॉस्टल जैसा ही लगता है, लेकिन इसकी इमारत का अतीत बेहद डरावना है। करीब 15 साल तक बंद रही इस इमारत में कभी मानसिक अस्पताल हुआ करता था। हॉस्टल में महिलाओं के आने पर पाबंदी है और कमरा नंबर 418 में किसी को जाने की इजाजत नहीं है। शुरुआत में विवेक इन बातों को सामान्य समझकर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ता है, लेकिन कुछ ही दिनों में उसे अजीबोगरीब अनुभव होने लगते हैं। धीरे-धीरे हॉस्टल का रहस्य उसके सामने आने लगता है और कहानी डरावना मोड़ लेने लगती है।

कैसी है फिल्म की शुरुआत और निर्देशन?

फिल्म की शुरुआत काफी दमदार है। निर्देशक कीर्तन नादगोड़ा पहले ही दृश्य से दर्शकों को डरावने माहौल में ले जाते हैं। खून से लथपथ एक महिला का अपने ही लोगों पर हमला करना फिल्म के शुरुआती दृश्यों को प्रभावशाली बनाता है। इसे देखकर लगता है कि आगे भी डर और रोमांच का अच्छा मेल देखने को मिलेगा।

हालांकि, शुरुआती प्रभाव के बाद फिल्म की रफ्तार धीमी पड़ने लगती है। कहानी हॉस्टल की जिंदगी, रैगिंग और दूसरे किरदारों से जुड़े सबप्लॉट में उलझ जाती है। इन हिस्सों में हॉरर का असर कुछ कम हो जाता है और कहानी अपनी मुख्य दिशा से भटकती हुई महसूस होती है। विवेक को जब हॉस्टल में कुछ असामान्य अनुभव होने लगते हैं, तब फिल्म एक बार फिर दिलचस्प हो जाती है। इसके बाद दर्शकों की उत्सुकता बढ़ती है कि आखिर इस इमारत और कमरा नंबर 418 का रहस्य क्या है।

इंटरवल के बाद कैसी हो जाती है कहानी?

इंटरवल के बाद फिल्म की कहानी देविका (चैइत्रा जे आचार) के अतीत की ओर बढ़ती है। इसी हिस्से में कमरा नंबर 418 को बंद रखने की वजह और इस जगह के डरावने इतिहास से जुड़े कई राज सामने आते हैं। कहानी का यह हिस्सा फिल्म के रहस्य को समझने के लिहाज से अहम है और दर्शकों को कई सवालों के जवाब भी मिलते हैं।

लेकिन यहीं फिल्म की एक बड़ी कमी भी सामने आती है। जिस रहस्य को धीरे-धीरे खोलकर दर्शकों को चौंकाया जा सकता था, उसे और प्रभावशाली तरीके से पेश करने की गुंजाइश थी। दूसरा हिस्सा कई सवालों के जवाब तो देता है, लेकिन हर खुलासा अपने साथ नया रोमांच पैदा नहीं कर पाता। कुछ जगहों पर कहानी जरूरत से ज्यादा खिंची हुई लगती है।

हॉरर फिल्म में डर और तनाव का लगातार बने रहना जरूरी है, लेकिन ‘418’ इस मामले में हर बार सफल नहीं होती। कहानी में कई ऐसे मौके हैं, जहां रहस्य को और मजबूत बनाया जा सकता था। इसके बावजूद, कमरा नंबर 418 से जुड़ी घटनाएं फिल्म को आगे देखने की उत्सुकता बनाए रखती हैं।

डराने के लिए जंप स्केयर्स का सहारा

हॉरर फिल्मों में अचानक सामने आने वाले डरावने दृश्य यानी जंप स्केयर्स दर्शकों को चौंकाने का अच्छा तरीका होते हैं। ‘418’ भी कई जगह इसी तकनीक का सहारा लेती है। तेज आवाज और अचानक सामने आने वाली डरावनी चीजों के जरिए दर्शकों को डराने की कोशिश की गई है। कुछ दृश्यों में यह तरीका काम करता है, लेकिन बार-बार इसी तकनीक का इस्तेमाल होने से डर का असर कम होने लगता है।

फिल्म ऐसा माहौल बनाने की कोशिश करती है, जिसमें दर्शकों को हर वक्त किसी अनहोनी का अंदेशा रहे। हालांकि, इसका साउंड डिजाइन कई जगह डर को धीरे-धीरे बढ़ाने के बजाय अचानक चौंकाने पर ज्यादा निर्भर नजर आता है। यही वजह है कि कुछ दृश्य प्रभाव छोड़ते हैं, जबकि कुछ उतने डरावने नहीं बन पाते, जितनी उनसे उम्मीद की जाती है।

सिनेमैटोग्राफी और संगीत कैसा है?

तकनीकी पक्ष की बात करें तो दिनेश दिवाकर की सिनेमैटोग्राफी फिल्म के डरावने माहौल को बनाने में मदद करती है। हॉस्टल की इमारत, उसके सुनसान हिस्से और बंद कमरे से जुड़ी रहस्यमयी दुनिया को पर्दे पर प्रभावी ढंग से दिखाया गया है। कई दृश्यों में कैमरे का इस्तेमाल कहानी के तनाव को बढ़ाता है और दर्शकों को उस माहौल से जोड़ता है।

वेंकी जीजी का संगीत भी फिल्म के माहौल के हिसाब से ठीक बैठता है। हालांकि, संपादन के मामले में फिल्म थोड़ी कमजोर पड़ती है। अकुल अविनाश की एडिटिंग में कुछ जगहों पर ‘KGF’ और ‘सालार’ जैसी फिल्मों की शैली की झलक महसूस होती है, लेकिन यहां वह अंदाज हर बार कहानी के पक्ष में काम नहीं करता। कुछ दृश्यों को छोटा किया जा सकता था, जिससे कहानी की रफ्तार बेहतर रहती और हॉरर का असर भी लंबे समय तक बना रहता।

क्या फिल्म कोई गंभीर बात भी कहती है?

‘418’ सिर्फ भूत-प्रेत और डरावनी घटनाओं तक सीमित रहने की कोशिश नहीं करती। कहानी में महिलाओं की पीड़ा, उनके साथ होने वाले अन्याय और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं को भी जगह दी गई है। चिंता और डिप्रेशन जैसी समस्याओं को कहानी से जोड़ने की कोशिश की गई है।

फिल्म यह दिखाना चाहती है कि किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति और उसके अनुभवों को समझे बिना उन्हें खारिज कर देना सही नहीं है। यह पहलू कहानी को केवल डराने वाली घटनाओं से आगे ले जाने की कोशिश करता है। हालांकि, इन विषयों को और गहराई से पेश किया जाता, तो फिल्म का भावनात्मक असर ज्यादा मजबूत हो सकता था।

देखें या नहीं?

कुल मिलाकर, ‘418’ हॉरर जॉनर में एक ठीक-ठाक कोशिश है। इसकी दमदार शुरुआत, डरावना माहौल और हॉस्टल के रहस्य से जुड़ी कहानी दर्शकों की दिलचस्पी जगाती है। फिल्म में कुछ ऐसे दृश्य भी हैं, जो डराने में कामयाब होते हैं। इसके अलावा, मानसिक स्वास्थ्य और महिलाओं की तकलीफों जैसे मुद्दों को कहानी में शामिल करना भी इसकी अच्छी बात है। अगर आपको हॉरर फिल्में पसंद हैं और आप डरावने दृश्यों के साथ रहस्य से भरी कहानी देखना चाहते हैं, तो ‘418’ को मौका दे सकते हैं। लेकिन अगर आप ऐसी फिल्म की उम्मीद कर रहे हैं, जो शुरुआत से अंत तक लगातार डर और रोमांच बनाए रखे, तो यह आपको थोड़ा निराश कर सकती है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN