Source :- BBC INDIA

आरसीबी

इमेज स्रोत, ANI

“वक़्त की गर्दिशों का ग़म न करो

हौसले मुश्किलों में पलते हैं”

महफ़ुजुर्रहमान आदिल का ये शेर इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल की फ़्रेंचाइजी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के फैन्स पर फिट बैठता है.

क्योंकि “ई साला कप नामदे” (इस साल कप हमारा होगा) वो लाइन थी जो आरसीबी के फैन्स के लिए ट्रोलिंग की वजह बन गई थी.

17 साल तक मिली नाकामयाबी की वजह से आरसीबी और उसके फैन्स पर सोशल मीडिया में मीम्स की बारिश होती रहती थी.

लेकिन अब कहानी बदल चुकी है. आईपीएल का कप पिछले साल भी आरसीबी का था और इस साल भी.

हालांकि, आरसीबी के लिए चोकर्स से चैंपियन बनने का सफ़र बेहद ही मुश्किल भरा रहा है. पर आरसीबी में पिछले दो साल में क्या बदला उसका जवाब दूसरी बार चैंपियन बनने के बाद टीम के सबसे बड़े स्टार विराट कोहली की एक बात में नजर आता है.

विराट कोहली ने कहा, “खिलाड़ियों का ऐसा ग्रुप होना, जहां आपको यह ना लगे कि टीम के लिए आगे बढ़कर ज़िम्मेदारी उठाने वाले आप अकेले ही हैं, सचमुच बहुत शानदार है.”

स्टार खिलाड़ियों के इर्द-गिर्द रही टीम

विराट कोहली और डिविलियर्स

इमेज स्रोत, Getty Images

जो बात आपकी पहचान हो, वही आपकी कमजोरी भी हो? ये अजीब बात तो है, लेकिन सालों तक आरसीबी के साथ यही दुर्भाग्य जुड़ा रहा.

आरसीबी के पास पहले सीजन से ही विराट कोहली जैसा नि:संदेह लिमिटिड ओवर्स क्रिकेट का स्टार खिलाड़ी रहा है.

इसके अलावा जिन दो खिलाड़ियों ने आरसीबी को आईपीएल में सबसे बड़ा फैन बेस दिलाने में अहम भूमिका निभाई उनके नाम है क्रिस गेल और एबी डिविलियर्स.

किसी टीम के पास टी20 ओवर्स के सबसे कामयाब बल्लेबाजों में से एक नहीं बल्कि तीन खिलाड़ी हों, उसका नाकाम होना किसी को भी खलेगा.

लेकिन इन तीन खिलाड़ियों का होना ही सालों तक आरसीबी का सबसे बड़ा सेटबैक बना रहा है. टीम का फोकस हमेशा इन स्टार खिलाड़ियों पर ही रहा.

इन्होंने सीजन दर सीजन बल्ले से कमाल भी दिखाया. पर आरसीबी 17 साल तक ऐसी प्लेइंग 11 नहीं बन पाई जो खिताब जीत ले.

आरसीबी 2009, 2011 और 2016 में फ़ाइनल तक जरूर पहुंची. पर खिताब उसकी पहुंच से दूर ही रहा.

इसके बाद तो टीम का ऐसा बुरा दौर हुआ कि अगले आठ साल तक टीम फ़ाइनल के आस-पास भी नहीं पहुंची.

इन 17 सालों में टीम के पास कोई ऐसा गेंदबाज़ नहीं रहा जो इन तीन बल्लेबाज़ों से अलग टीम की पहचान बन पाए.

जितेश शर्मा का कोट

टीम में क्या बदला

आरसीबी के टर्न अराउंड का श्रेय काफी हद तक एंडी फ्लावर को जाता है

इमेज स्रोत, Getty Images

टीम के बदलने की असल शुरुआत हुई 2025 के मेगा ऑक्शन से ठीक पहले.

आरसीबी ने अपनी कमियों को पहचाना और मेगा ऑक्शन में उन्हें सुधारने का काम किया.

और इस काम में अहम भूमिका निभाई एंडी फ्लावर नाम के उस शख़्स ने जो जितने बेहतरीन खिलाड़ी रहे, उससे कहीं ज्यादा कामयाब कोच साबित हुए.

एंडी फ्लावर ने टीम के उस स्ट्रक्चर को तोड़ने का काम किया जो टीम को सिर्फ़ एक या दो स्टार खिलाड़ियों पर ही निर्भर रखता था.

2025 के मेगा ऑक्शन से पहले आरसीबी ने विराट कोहली, रजत पाटीदार और यश दयाल को ही रिटेन किया.

इसके बाद मेगा ऑक्शन में आरसीबी ने सिर्फ क्रिकेट की दुनिया के बड़े नामों पर फोकस नहीं किया.

एंडी फ्लावर ने टीम में बल्लेबाजों के अलावा अच्छे ऑलराउंडर और गेंदबाज़ लाने की कोशिश की.

टीम में फिल साल्ट, जितेश शर्मा, देवदत्त पडिक्कल, टिम डेविड, क्रुणाल पंड्या जैसे खिलाड़ियों को लाकर बैटिंग में गहराई लाई गई.

इसके अलावा भुवनेश्वर कुमार, जोश हेजलवुड और रसिख सलाम डार पर दांव लगाना आरसीबी के लिए सबसे बड़ा ‘गेम चेंजर’ पॉइंट साबित हुआ.

2025 में खिताब जीतने के बावजूद आरसीबी ने टीम को और मजबूत करने की कोशिश की.

लियाम लिविंगस्टोन और लुंगी एनगिडी जैसे खिलाड़ियों को रिलीज किया गया और टीम में वेंकटेश अय्यर के साथ जैकब डफी को लाया गया.

इन दोनों खिलाड़ियों का लाना आरसीबी के लिए इस साल साल फ़ायदे का सौदा रहा.

वेंकटेश अय्यर ने इस सीजन में छह पारियों में ही 186 के औसत से 209 रन बनाए.

वहीं जैकब डफी छह मैच में नौ विकेट लेने में कामयाब रहे.

रजत पाटीदार की कप्तानी

रजत पाटीदार

इमेज स्रोत, Getty Images

“मैं कभी नहीं सोचा था कि मैं आरसीबी का कप्तान बनूँगा और खिताब जीतूँगा.”

आरसीबी के दूसरी बार चैंपियन बनने के बाद रजत पाटीदार ने ये बात कही.

लेकिन रजत पाटीदार इतिहास लिख चुके हैं. दो सीजन में वो आरसीबी को दो बार चैंपियन बनाकर आईपीएल के सबसे कामयाब कप्तानों में शुमार हो चुके हैं.

2025 की शुरुआत से पहले जब रजत पाटीदार को आरसीबी का कप्तान बनाया गया था तो क्रिकेट जगत में बड़ी हैरानी जताई गई थी.

लेकिन रजत पाटीदार ने इस सीजन में कप्तानी के साथ बल्लेबाजी में भी कमाल दिखाया है.

बीते साल उन्होंने 15 मैच में 312 रन बनाए, जबकि इस साल रजत पाटीदार के बल्ले से 15 मैच 501 रन निकले.

लेकिन रजत पाटीदार की असल खूबी उनकी कप्तानी में छुपी हुई है.

मुश्किल से मुश्किल स्थिति में रजत पाटीदार को बीते दो सीजन में बेचैन होते हुए नहीं देखा गया. वो मैदान पर कूल बने रहते हैं.

रजत पाटीदार की कप्तानी के बारे में क्रिकेट के दिग्गजों का कहना है उनके पास अपने खिलाड़ियों को उनकी काबिलियत के हिसाब इस्तेमाल करने की क्षमता है.

दोनों ही सीजन के दौरान रजत पाटीदार की फील्ड प्लेसमेंट और बॉलिंग रोटेशन को लेकर क्रिकेट के दिग्गजों ने तारीफ़ की है. इसके साथ ही उन्होंने अपने खिलाड़ियों को बैक भी किया है.

इस बात की झलक फाइनल मैच के बाद दिए गए जितेश शर्मा के बयान में भी नज़र आती है.

उन्होंने कहा, “मैं इस साल परफॉर्म नहीं कर पा रहा था. लेकिन फिर भी मुझे सपोर्ट किया गया. टीम में अच्छे खिलाड़ियों को वैल्यू किया जा रहा है.

”ये मायने नहीं रखता है कि आप बड़े खिलाड़ी हैं या नहीं. उन्हें पता है कि आप टीम में कुछ जोड़ सकते हैं और उस योगदान को सराहा जा रहा है.”

रजत पाटीदार की कप्तानी के बारे में बात करते हुए एक बार विराट कोहली ने यहां तक कहा था, “रजत पाटीदार, ये वो नाम है जिसे आप आने वाले कई सालों तक याद रखेंगे.”

और अब विराट कोहली की यह बात सही साबित होती नजर आ रही है.

हालांकि विराट कोहली का अनुभव भी टीम के लगातार काम आ रहा है. विराट कोहली ने बीते साल 657 रन बनाए और इस साल उनके बल्ले से 675 रन निकले.

विराट कोहली का कोट कार्ड

‘फ़ास्ट एड फ़्यूरियस’

आरसीबी

इमेज स्रोत, Getty Images

हालांकि, ऊपर की तमाम सब बातों के बावजूद आरसीबी में जो सबसे बड़ा बदलाव आया है वो है उसकी गेंदबाज़. खासकर तेज गेंदबाज़ी.

आरसीबी की मौजूदा गेंदबाज़ी यूनिट को ‘फ़ास्ट एंड फ्यू़रियस’ कहना गलत नहीं है.

लंबे समय तक टीम के कप्तान रहे विराट कोहली ने टीम की मौजूदा बॉलिंग लाइनअप को वर्ल्ड क्लास बॉलिंग लाइनअप बताया है.

उनका कहना है कि अब हमारे पास ऐसे गेंदबाज़ हैं जिन पर हम किसी भी हालात में भरोसा कर सकते हैं.

विराट कोहली ने कहा हमारी गेंदबाज़ी को देखिए उसमें हेजलवुड, भुवी, डफी, क्रुणाल और रसिख सलाम डार हैं.

बीते साल आरसीबी के लिए जोश हेजलवुड ने सबसे ज्यादा 22 विकेट लिए.

वहीं 17-17 विकेट लेकर भुवनेश्वर कुमार और क्रुणाल पंड्या ने बखूबी उनका साथ दिया.

इस साल गेंदबाज़ी की अगुआई का जिम्मा भुवनेश्वर कुमार ने संभाला.

भुवनेश्वर कुमार ने ना सिर्फ 28 विकेट हासिल किए बल्कि वो इस सीजन के दूसरे सबसे कामयाब गेंदबाज़ भी रहे.

भुवनेश्वर कुमार ने कमाल का कंट्रोल दिखाते हुए इस सीजन में 378 डॉट बॉल फेंकी.

भुवनेश्वर कुमार का साथ रसिख सलाम डार और हेडलवुड ने दिया.

रसिख ने टीम मैनेजमेंट के भरोसे को सही साबित करते हुए 12 मैच में 19 विकेट लिए.

वहीं जोश हेजलवुड के हिस्से में 15 विकेट आए.

हालांकि क्रुणाल पंड्या ने 14 विकेट लेकर स्पिन गेंदबाज़ी की कमान को संभाले रखा.

इन आंकड़ों से मालूम चलता है कि आरसीबी के पास अब पूरी तरह से कम्प्लिट बॉलिंग यूनिट नजर आती है और यही वजह थी कि सीजन की शुरुआत से पहले ही आरसीबी को इस साल फेवरेट के तौर पर देखा जा रहा था.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS