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आसमान से धरती पर गिर रही ‘मुसीबत’, बचाने में जुटा NASA; करोड़ों का फंड जारी

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Source :- LIVE HINDUSTAN

यह मिशन बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें पृथ्वी की कक्षा में मौजूद एक सक्रिय अंतरिक्ष दूरबीन को सुरक्षित तरीके से शिफ्ट करना शामिल है। मालूम हो कि स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी को साल 2004 में लॉन्च किया गया था। 

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के दूरबीन को पृथ्वी पर गिरने से बचाने के लिए विशेष बचाव अभियान शुरू किया गया है। इस मिशन के तहत नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन ने कटालिस्ट स्पेस टेक्नोलॉजीज के तीन भुजाओं वाले लिंक नामक अंतरिक्ष यान को प्रशांत महासागर स्थित मार्शल द्वीप से लॉन्च किया। पेगासस रॉकेट को विमान से हवा में ले जाकर छोड़ा गया, जिसके बाद उसने लिंक अंतरिक्ष यान को कक्षा में स्थापित किया। अनुमान है कि लगभग एक महीने में लिंक स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी तक पहुंचेगा और उसे पकड़कर सुरक्षित ऊंचाई पर ले जाने का प्रयास करेगा।

यह मिशन बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें पृथ्वी की कक्षा में मौजूद एक सक्रिय अंतरिक्ष दूरबीन को सुरक्षित तरीके से शिफ्ट करना शामिल है। स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी को साल 2004 में लॉन्च किया गया था और इसका मुख्य उद्देश्य ब्रह्मांड में होने वाले सबसे शक्तिशाली विस्फोटों जैसे गामा-रे विस्फोट और सुपरनोवा जैसी घटनाओं का अध्ययन करना है। हाल के वर्षों में बढ़ी सौर गतिविधियों और सौर तूफानों के कारण पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल का विस्तार हुआ है, जिससे कक्षा में मौजूद उपग्रहों और दूरबीनों पर वायुमंडलीय घर्षण बढ़ गया है।

ऊंचाई पहले की तुलना में तेजी से कम हो रही

रिपोर्ट के मुताबिक, इसी वजह से स्विफ्ट की ऊंचाई पहले की तुलना में तेजी से कम हो रही है और उसके अक्टूबर में पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर नष्ट होने की आशंका जताई गई थी। इस खतरे को देखते हुए नासा ने लगभग 3 करोड़ डॉलर की लागत से यह बचाव मिशन शुरू किया है। फिलहाल स्विफ्ट की वैज्ञानिक गतिविधियों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है ताकि उसकी मौजूदा कक्षा को अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सके।

फिलहाल करीब 1.6 टन वजनी स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी पृथ्वी से लगभग 360 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्कर लगा रही है। लिंक अंतरिक्ष यान का लक्ष्य इसकी कक्षा को लगभग 240 किलोमीटर और ऊपर उठाकर करीब 600 किलोमीटर तक पहुंचाना है, जहां से इसने अपने मिशन की शुरुआत की थी। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान लिंक के थ्रस्टर बहुत धीरे-धीरे काम करेंगे, ताकि दूरबीन को किसी तरह का तेज झटका न लगे और उसके संवेदनशील वैज्ञानिक उपकरण सुरक्षित रहें।

नासा ने मिशन के बारे में क्या बताया

अगर यह अभियान सफल रहता है तो सितंबर तक स्विफ्ट फिर से अंतरिक्ष में खोज शुरू कर सकेगा। इस मिशन को केवल 9 महीनों में तैयार किया गया, क्योंकि नासा के अनुसार यदि इसमें और देरी होती तो स्विफ्ट को बचाना संभव नहीं रह जाता। कटालिस्ट स्पेस टेक्नोलॉजीज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी घोनही ली ने लॉन्च से पहले कहा कि यह जोखिम वाला मिशन है। सबसे बड़ा खतरा यह था कि अगर समय पर लॉन्च नहीं होता तो स्विफ्ट को वायुमंडल में जलकर नष्ट होने से बचाया नहीं जा सकता था। मौसम खराब होने और तकनीकी दिक्कतों के कारण इस मिशन की लॉन्चिंग कई बार टालनी पड़ी, लेकिन आखिरकार इसे सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN