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खैबर पख्तूनख्वा में बवाल मचा हुआ है। मंगलवार को जिले के बारा में PTI के दर्जनों समर्थक एक बार फिर सड़कों पर उतरे। इसके बाद इलाके में आंसू गैस के गोले दागे जाने की खबरें सामने आई हैं। पाकिस्तान अपने पैर पर खुद कुल्हाड़ी मार रहा?
पाकिस्तान का खैबर पख्तूनख्वा इस वक्त उबल रहा है। पाकिस्तानी हुकूमत ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग की आवाज को दबाने के लिए यहां आपातकाल लागू कर दिया है। मुख्यमंत्री को पूरी कैबिनेट के साथ गिरफ्तार कर लिया गया है। स्कूल बंद कर दिए गए हैं और इंटरनेट ठप पड़ा है। एक वक्त जहां इमरान खान का झंडा सबसे ऊंचा था, आज उसी खैबर पख्तूनख्वा की सत्ता इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) से छिन ली गई है। पाकिस्तानी हुकूमत भले ही इसे इमरान खान के खात्मे की कोशिश में अपनी जीत समझ रहा हो, लेकिन जानकारों की माने तो पाकिस्तानी PM शहबाज शरीफ और सैन्य प्रमुख आसिम मुनीर को यह दांव उल्टा पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ताजा घटनाक्रम पाकिस्तान में अस्थिरता को कम करने के बजाय और भड़का सकता है।
बता दें कि पाकिस्तान के पूर्व PM इमरान खान बीते 3 सालों से जेल में बंद हैं। पाकिस्तान की सरकार ने पहले उनकी रिहाई के सारे रास्ते बंद कर दिए। उन्हें जेल में नजरबंद कर दिया गया और परिवार से मिलने तक पर रोक लगा दी गई। इमरान खान की बहनों और बेटों की उनसे मुश्किल से ही मुलाकात हो पाई है। इस बीच पीटीआई समर्थकों का गुस्सा भड़कता रहा।
बीते कुछ दिनों से 13 सालों से खैबर पख्तूनख्वा में सत्ता में काबिज पीटीआई के हजारों समर्थक इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर इस्लामाबाद की ओर मार्च कर रहे थे। इसे देखकर पाकिस्तान की सरकार डर गई। आनन फानन में इमरजेंसी लागू कर दी गई। पाकिस्तानी सरकार के सूचना मंत्री ने आरोप लगाया कि यहां की सरकार आतंकियों के साथ मिली हुई है। लेकिन वे कोई सबूत नहीं दे पाए। अताउल्लाह तरार ने कहा था कि वे जल्दी ही इसे लेकर ज्यादा जानकारी देंगे। लेकिन वे अब तक गायब हैं।
इधर PTI के नेताओं पर ताबड़तोड़ एक्शन जारी है। कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है। मुख्यमंत्री सुहैल आफरीदी के ठिकाने को लेकर रहस्य बना हुआ है। पीटीआई ने बताया है कि उन्हें गिरफ्तार किया गया है। वहीं पाकिस्तानी सरकार उन्हें प्रोटेक्टिव कस्टडी में रखा गया है। कई नेता डर से अंडरग्राउंड हो गए हैं। हालांकि कुछ नेता अब भी इमरान खान के लिए सड़कों पर उतरे हैं। प्रांत के बारा में मंगलवार को पीटीआई समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया है। लेकिन पाकिस्तान कोई मौका नहीं छोड़ रहा। यहां लोगों पर आंसू गैस के गोले छोड़े जाने की खबर है।
क्यों उल्टा पड़ सकता है यह दांव?
पाकिस्तान के इस कदम को विशेषज्ञों ने खुद के पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा बताया है। पाकिस्तान पहले से ही कई मोर्चों पर लड़ाइयां लड़ रहा है। बलूचिस्तान में जहां लोगों ने खुलेआम पाकिस्तान के खिलाफ बगावत का ऐलान किया है, वहीं अफगान सीमा पर भी तनाव है। अटलांटिक काउंसिल के वरिष्ठ फेलो माइकल कुगेलमैन का कहना है कि अब जनता का गुस्सा और बढ़ सकता है। उन्होंने बीबीसी सा कहा, “सरकार आग से खेल रही है। अगर इस कदम से जनता का गुस्सा और बढ़ा, तो इस्लामाबाद के लिए बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी।”
वहीं कुछ जानकार यह भी कह रहे हैं कि प्रांतीय सरकार को हटाने के बाद अब केंद्र की शरीफ सरकार सीधे जनता के निशाने पर आ जाएगी क्योंकि विफलता के लिए आरोप मढ़ने वाला ‘बफर’ अब मौजूद नहीं होगा। चाथम हाउस की फेलो फरजाना शेख के मुताबिक, अगर सेना इस इलाके में लंबे समय तक रही तो कई जानें जाएंगीं और इससे सेना पर सवाल उठेंगे।
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