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ईरान को अंतिम डील से पहले अमेरिका का बड़ा तोहफा, खोल दिए तेल कारोबार के रास्ते

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Source :- LIVE HINDUSTAN

Iran US Relation: दशकों पुराने दुश्मनी के बीच अमेरिका ने सोमवार को ईरान को तेल बेचने की अनुमति दे दी। अंतिम शांति समझौते की दिशा में चल रही बातचीत के बीच वाशिंगटन ने तेहरान पर लगाए प्रतिबंधों में बड़ी ढील दी है।

अमेरिका ने सोमवार को ईरान को तेल निर्यात की अनुमति प्रदान कर दी है। इस फैसले से दशकों पुराने प्रतिबंधों में महत्वपूर्ण ढील दी गई है। वाशिंगटन परमाणु निरीक्षण और हॉर्मुज स्ट्रेट में मुक्त नौवहन सुनिश्चित करने के बदले तेहरान के साथ अंतिम शांति समझौते की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अमेरिकी वित्त विभाग द्वारा जारी सामान्य लाइसेंस के तहत 21 अगस्त तक ईरानी मूल के कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री की इजाजत दी गई है।

लाइसेंस में स्पष्ट किया गया है कि बिक्री, वितरण या अनलोडिंग के लिए आवश्यक होने पर ईरानी तेल का अमेरिका में आयात भी किया जा सकता है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से अमेरिका ने ईरान से तेल का कोई बड़ा आयात नहीं किया था। वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि स्विट्जरलैंड में चल रही सार्थक वार्ताओं के अनुरूप ईरान ने हॉर्मुज स्ट्रेट में स्वतंत्र और खुला पारगमन सुनिश्चित करने तथा अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को अपने देश में आने की अनुमति देने की प्रतिबद्धता जताई है।

60 दिन का अस्थायी लाइसेंस

इस समझौते के तहत अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने ईरानी तेल के उत्पादन, वितरण और बिक्री को अधिकृत करने वाला 60 दिन का अस्थायी सामान्य लाइसेंस जारी किया है। पिछले सप्ताह वाशिंगटन और तेहरान के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन में अमेरिका ने ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों तथा संबंधित सेवाओं (बैंकिंग, बीमा और परिवहन) के लिए पूर्ण छूट देने पर सहमति जताई थी। लाइसेंस के अनुसार, ईरान को भुगतान अमेरिकी डॉलर में भी किया जा सकता है। हालांकि, क्यूबा, उत्तर कोरिया और क्रीमिया को इस छूट से बाहर रखा गया है।

प्रतिबंधों का इतिहास

अमेरिका ने 1979 में ईरान पर पहली बार प्रतिबंध लगाए थे, जब क्रांतिकारी छात्रों ने तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर राजनयिकों को बंधक बना लिया था। उसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम और आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने के आरोप में कई दौर के अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए गए। प्रतिबंधों के बावजूद ईरानी तेल के सबसे बड़े खरीदार स्वतंत्र चीनी रिफाइनर रहे हैं, जिन्होंने भारी छूट पर खरीदारी की। 2018 में अमेरिकी प्रतिबंधों के फिर से लागू होने से पहले भारत, दक्षिण कोरिया, जापान, इटली, ग्रीस, ताइवान और तुर्की भी ईरानी कच्चे तेल के प्रमुख आयातक थे।

मध्यस्थों ने बताया कि अंतिम शांति समझौते के लिए शुरू हुई वार्ता के पहले दौर में दोनों पक्षों ने ‘उत्साहजनक प्रगति’ दर्ज की है। ये वार्ताएं पिछले सप्ताह हुए समझौता ज्ञापन के आधार पर चल रही हैं, जिसमें अप्रैल से लागू अनिश्चितकालीन युद्धविराम को कम से कम 60 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है। बता दें कि ईरान द्वारा हॉर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी की धमकी के बाद तेल की कीमतों में तेज उछाल आया था। अमेरिका ने इसके जवाब में ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी कर दी थी। अंतरिम समझौते के बाद तेल की कीमतें 28 फरवरी को अमेरिकी-इजरायली हमलों से पहले के सबसे निचले स्तर पर आ गई हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN