Home BUSINESS NEWS HINDI ईरान से डील…यहां सस्ता हुआ पेट्रोल, लोगों के चेहरे पर लौटी मुस्कान!

ईरान से डील…यहां सस्ता हुआ पेट्रोल, लोगों के चेहरे पर लौटी मुस्कान!

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Source :- LIVE HINDUSTAN

वैश्विक तेल बाजार पर बना दबाव धीरे-धीरे कम हो रहा है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिल रही है। यही वजह है कि अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों से परेशान लोगों को बड़ी राहत मिली है। कई महीनों बाद देश में गैसोलीन की औसत कीमत 4 डॉलर प्रति गैलन से नीचे आ गई है। अमेरिकी ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (AAA) के अनुसार, देशभर में रेगुलर अनलेडेड पेट्रोल की औसत कीमत 3.999 डॉलर प्रति गैलन दर्ज की गई है। मार्च के बाद यह पहला मौका है, जब कीमतें इस स्तर से नीचे आई हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं को कुछ राहत महसूस हो रही है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

एक्सपर्ट का मानना है कि पेट्रोल की कीमतों में यह गिरावट अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक अंतरिम समझौते के बाद आई है। इस समझौते का उद्देश्य पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को कम करना और वैश्विक तेल आपूर्ति को सामान्य बनाना है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz), जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है, वहां जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। यही कारण है कि कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम हुआ और उसका असर पेट्रोल के दामों पर भी दिखाई देने लगा।

मई 2026 में अमेरिकी पेट्रोल की औसत कीमत 4.50 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर पहुंच गई थी। उस समय पश्चिम एशिया में संघर्ष और तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता ने ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया था। हालांकि, अब हालात में सुधार होने से ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) जैसे प्रमुख कच्चे तेल बेंचमार्क की कीमतें भी घटकर क्रमशः लगभग 78 और 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई हैं। इसके अलावा अमेरिका से रिकॉर्ड स्तर पर ऊर्जा निर्यात, चीन की अपेक्षा से कमजोर डिमांड और वैश्विक सप्लाई चेन में सुधार ने भी तेल बाजार को संतुलित करने में मदद की है।

क्या पूरी तरह स्थायी हैं कीमतें?

फिर भी विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा राहत को पूरी तरह स्थायी नहीं माना जा सकता है। पेट्रोल अभी भी युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर की तुलना में महंगा है और निकट भविष्य में कीमतों का बहुत अधिक नीचे जाना आसान नहीं दिख रहा। अमेरिका में करोड़ों लोग रोजमर्रा की यात्रा और कामकाज के लिए निजी वाहनों पर निर्भर हैं। ऐसे में फ्यूल की ऊंची कीमतों ने घरेलू बजट पर दबाव डाला, महंगाई बढ़ाई और उपभोक्ताओं की खरीदारी क्षमता को प्रभावित किया।

इस बीच पेट्रोल की कीमतों में गिरावट का राजनीतिक असर भी देखा जा रहा है। अमेरिका में आने वाले चुनावों को देखते हुए ईंधन की कीमतें एक अहम मुद्दा बनी हुई हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से दावा करते रहे हैं कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बाद पेट्रोल की कीमतें नीचे आएंगी। अब कीमतों में आई नरमी को उनकी सरकार की उपलब्धि के रूप में भी देखा जा रहा है। प्रशासन ने ऊर्जा लागत को नियंत्रित करने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व से तेल जारी करने और कुछ समुद्री नियमों में अस्थायी छूट जैसे कदम भी उठाए थे।

तेल बाजार पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट अब इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि अमेरिका अपने पेट्रोल भंडार को कितनी तेजी से भर पाता है। फिलहाल, देश में पेट्रोल का स्टॉक पिछले एक दशक के सबसे निचले मौसमी स्तर पर है। अगर आपूर्ति और भंडारण में सुधार जारी रहता है, तो आने वाले हफ्तों में पेट्रोल की कीमतों में और राहत देखने को मिल सकती है। हालांकि, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और तेल निर्यात की स्थिति भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। फिलहाल, अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए यह राहत भरी खबर है कि लंबे इंतजार के बाद पेट्रोल की कीमतें फिर से 4 डॉलर प्रति गैलन के नीचे आ गई हैं।

क्या होता है रेगुलर अनलेडेड पेट्रोल?

रेगुलर अनलेडेड पेट्रोल (Regular Unleaded Petrol) मानक ईंधन है, जो बिना सीसा (Lead) के बनता है और भारत में अधिकांश पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध सामान्य पेट्रोल होता है। इसकी ऑक्टेन रेटिंग (RON) आमतौर पर 91 के करीब होती है, जो रोजमर्रा की बाइक्स और कारों के लिए सबसे उपयुक्त और किफायती है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN