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कच्चा तेल, RBI ब्याज दर, बॉन्ड, TCS के नतीजों से तय होगी शेयर बाजार की दिशा, क्या मार्केट करेगा रिकवर?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • Stock Market Outlook: घरेलू शेयर बाजार में इस समय काफी हलचल है
  • पिछले 8 सप्ताह से बाजार में गिरावट देखने को मिल रही है
  • इस हफ्ते क्रूड ऑयल, आरबीआई ब्याज आदि पर बाजार की निगाह रहेगी

Stock Market Outlook: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का ब्याज दर पर फैसला, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के तिमाही नतीजे, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक बॉण्ड पर प्रतिफल इस सप्ताह शेयर बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे। विश्लेषकों ने यह राय जताई है। एक्सपर्ट्स ने कहा कि व्यापक आर्थिक आंकड़ों की घोषणाएं और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार के रुख को प्रभावित करेंगी।

क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट

रेलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट (रिसर्च) अजित मिश्रा ने कहा, ‘आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक पर करीबी नजर रहेगी। नीतिगत रुख, मुद्रास्फीति का परिदृश्य और वृद्धि के अनुमान निकट अवधि में घरेलू ब्याज दरों और वित्तीय बाजारों की दिशा के बारे में महत्वपूर्ण संकेत देंगे।’ उन्होंने कहा कि इस सप्ताह कंपनियों के तिमाही नतीजों का सत्र भी शुरू होगा। सूचकांक में अधिक भार रखने वाली कंपनी टीसीएस और खुदरा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी डीमार्ट समेत कई प्रमुख कंपनियां अपने नतीजे घोषित करेंगी।

मिश्रा ने कहा कि आंकड़ों के मोर्चे पर भारत के सितंबर के अंतिम एचएसबीसी सेवा खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) और संयुक्त पीएमआई के आंकड़े छह अक्टूबर को जारी किए जाएंगे। टीसीएस आठ अक्टूबर को सितंबर तिमाही के नतीजे घोषित करेगी।

क्रूड ऑयल का रेट बढ़ा रहा है चिंता

ऑनलाइन कारोबार और संपत्ति प्रौद्योगिकी कंपनी एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा, ‘कच्चा तेल फिलहाल सबसे तत्काल व्यापक आर्थिक चिंता बना हुआ है। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहने से भारत के बाह्य संतुलन और मुद्रास्फीति के परिदृश्य पर दबाव बढ़ रहा है। वहीं, लगातार बनी भू-राजनीतिक अनिश्चितता से ऊर्जा कीमतों में जोखिम प्रीमियम के ऊंचे बने रहने का खतरा है।’ उन्होंने कहा कि वैश्विक बॉण्ड पर प्रतिफल भी निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक होगा।

पोनमुडी ने कहा कि अमेरिकी ट्रेजरी पर प्रतिफल में कमी से उभरते बाजारों की परिसंपत्तियों पर दबाव कम हो सकता है और विदेशी निवेश के लिए बेहतर माहौल बन सकता है। इसके विपरीत, प्रतिफल में और वृद्धि होने से अमेरिकी परिसंपत्तियां अपेक्षाकृत अधिक आकर्षक हो सकती हैं और उभरते बाजारों से निवेश के दूसरे बाजारों की ओर जाने का सिलसिला जारी रह सकता है।

लगातार 8वें हफ्ते नीचे गिरा शेयर बाजार

विदेशी निवेशकों की बिकवाली, रुपये में कमजोरी, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक बॉण्ड पर बढ़ते प्रतिफल के कारण भारतीय शेयर बाजार लगातार आठवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ।

पिछले सप्ताह सेंसेक्स में 1,986.04 अंक यानी 2.68 प्रतिशत की गिरावट रही, जबकि निफ्टी 718.55 अंक यानी 3.10 प्रतिशत नीचे आया। सितंबर में बीएसई सेंसेक्स 4,476.98 अंक यानी 5.81 प्रतिशत और निफ्टी 1,459.95 अंक यानी छह प्रतिशत नीचे रहा।

शोध विश्लेषक कंपनी एचएसटी वेल्थ के संस्थापक एवं सीईओ हरिसेल्वन राधाकृष्णन ने कहा, ‘आरबीआई का नीतिगत फैसला घरेलू स्तर पर सबसे प्रमुख कारक होगा। इसके बाद अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की बैठक के ब्योरे से यह संकेत मिलेगा कि सितंबर में दर बढ़ाए जाने के बाद मौद्रिक नीति को और सख्त करने के पक्ष में अमेरिकी नीति-निर्माताओं के बीच कितना समर्थन है।’

(यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार जोखिमों के अधीन है। यहां प्रस्तुत एक्सपर्ट्स के विचार निजी हैं। लाइव हिन्दुस्तान इस आधार पर शेयरों को खरीदने और बेचने की सलाह नहीं देता है।)

SOURCE : LIVE HINDUSTAN