Source :- LIVE HINDUSTAN
8वें वेतन आयोग को लेकर जम्मू-कश्मीर के कर्मचारी संगठनों ने बड़ा प्रस्ताव पेश किया है। उन्होंने 2.86 से 3.68 फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग की है, जिससे न्यूनतम बेसिक वेतन ₹18,000 से बढ़कर ₹51,480 से ₹66,240 तक पहुंच सकता है। इन मांगों ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।
8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाहें टिकी हुई हैं। इसी बीच जम्मू-कश्मीर के कर्मचारी संगठनों ने वेतन आयोग के सामने ऐसी मांग रखी है, जिसने लाखों सरकारी कर्मचारियों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। ऑल एम्प्लॉइज जॉइंट एसोसिएशन, जम्मू-कश्मीर और ऑल सिख माइनॉरिटी एम्प्लॉइज एसोसिएशन ने 8वें वेतन आयोग से फिटमेंट फैक्टर 2.86 से 3.68 के बीच तय करने की मांग की है। अगर यह डिमांड स्वीकार हो जाती है, तो वर्तमान में ₹18,000 का न्यूनतम बेसिक वेतन बढ़कर ₹51,480 से ₹66,240 तक पहुंच सकता है।
हाल ही में 8वें वेतन आयोग की टीम जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दौरे पर पहुंची थी। इस दौरान कर्मचारी संगठनों ने आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई और अन्य अधिकारियों को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में केवल वेतन वृद्धि ही नहीं, बल्कि पेंशन, महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA), स्वास्थ्य सुविधाओं और टैक्स राहत से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव भी शामिल किए गए।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में महंगाई तेजी से बढ़ी है, जिससे कर्मचारियों की क्रय शक्ति प्रभावित हुई है। ऐसे में 7वें वेतन आयोग के तहत लागू 2.57 फिटमेंट फैक्टर अब पर्याप्त नहीं माना जा सकता। उनका मानना है कि कम से कम 2.86 और अधिकतम 3.68 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाना चाहिए, ताकि कर्मचारियों को वास्तविक राहत मिल सके। उदाहरण के तौर पर अगर 2.86 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो न्यूनतम बेसिक वेतन ₹51,480 हो जाएगा, जबकि 3.68 फिटमेंट फैक्टर लागू होने पर यह बढ़कर ₹66,240 तक पहुंच सकता है।
जम्मू-कश्मीर के कर्मचारी संगठनों ने पेंशनर्स के लिए भी कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। उन्होंने सभी पेंशनर्स के लिए पूर्ण पेंशन समानता (Pension Parity) लागू करने, वेतन निर्धारण से पहले महंगाई भत्ते को मूल वेतन में मर्ज करने और कम्यूटेड पेंशन की बहाली अवधि को 15 साल से घटाकर 12 साल करने की मांग की है। इसके अलावा स्वास्थ्य सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया है।
हाउस रेंट अलाउंस (HRA) को लेकर भी कर्मचारी संगठनों ने विशेष सुझाव दिए हैं। उनका कहना है कि जम्मू और श्रीनगर जैसे शहरी क्षेत्रों में मकानों का किराया लगातार बढ़ रहा है। इसलिए कर्मचारियों को बेहतर HRA दिया जाना चाहिए। साथ ही दूरदराज, सीमावर्ती और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए विशेष भत्ते और अतिरिक्त सुविधाएं भी प्रदान की जानी चाहिए।
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जम्मू-कश्मीर के कर्मचारियों को देश के अन्य हिस्सों की तुलना में अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। दुर्गम पहाड़ी इलाके, खराब मौसम, ऊंची परिवहन लागत, सीमावर्ती क्षेत्रों में सेवा की जिम्मेदारी और कुछ इलाकों में सुरक्षा संबंधी चुनौतियां उनके काम को और कठिन बना देती हैं। इसलिए 8वें वेतन आयोग को इन विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग से राहत देने पर विचार करना चाहिए।
हालांकि, अभी 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशें आना बाकी हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर के कर्मचारी संगठनों की ये मांगें चर्चा का बड़ा विषय बन गई हैं। अगर इनमें से कुछ प्रमुख मांगें भी स्वीकार हो जाती हैं, तो लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की आय में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है। अब सभी की नजर आयोग की अंतिम रिपोर्ट और केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी हुई है।
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