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जानिए कौन थे जसवंत सिंह खालड़ा? इन्हीं पर बनी है दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज, नदी में मिली थी लाश

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Source :- LIVE HINDUSTAN

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दिलजीत सिंह दोसांझ की फिल्म सतलुज पसंद की जा रही है। असली घटना पर बनी ये फिल्म जसवंत सिंह खालड़ा पर बेस्ड है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर ये कौन थे? नदी में मिली थी लाश।

इन दिनों दिलजीत सिंह दोसांझ की फिल्म सतलुज खबरों में बनी हुई है।लंबे समय से अटकी इस फिल्म का नाम पहले पंजाब 95 था। ये फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा पर बेस्ड एक असली कहानी है। फिल्म में पंजाब के उस दौर को दिखाया गया है जब पुलिस का अत्याचार आम लोगों पर हावी था। कई लोगों को जान से मारा जा रहा था। सरकारी दस्तावेज और मारे गए लोगों की संख्या आपस में मेल नहीं खाती थीं। ऐसे में जसवंत सिंह खालड़ा ने पुलिस के खिलाफ आवाज उठाई थी। इस लंबी लड़ाई में एक दिन खुद जसवंत सिंह खालड़ा भी गायब हो गए।

पुलिस के खिलाफ उठाई आवाज

1952 में जन्में जसवंत सिंह जसवंत सिंह खालड़ा अमृतसर की एक बैंक में काम करते थे। समाजसेवी थे और मानव के अधिकारों के बचाव के लिए काम करते थे। 80 और 90 के दशक में उन्हें पता चला कि राज्य में बड़ी संख्या में सिखों पर अत्याचार हो रहा है। उनको गैर क़ानूनी तरीके से हिरासत में लेकर फर्जी मुठभेड़ में मारा जा रहा है। लापता बता कर उनका अंतिम संस्कार दिया जा रहा है। ये आंकड़ा 25 हजार से ज्यादा का बताया गया।

पुलिस का अत्याचार

ये मामला 80 के दशक का है जब पंजाब में आतंकवाद बढ़ रहा था। मामले की शुरुआत। ऑपरेशन ब्लू स्टार और इंदिरा गांधी की हत्या के बाद से हुई थी। 1984 के सिख दंगों ने राज्य में शांति भंग कर दी थी। उस समय पुलिस का अधिकार था कि संदिग्ध या शक होने पर किसी को भी हिरासत में लेकर जांच की जा सकती है। लेकिन इसी अधिकार के आड़ में पुलिस ने कई फर्जी मुठभेड़ की और हजारों पंजाबियों को मौत के घाट उतारा। India Who Killed The Sikhs डॉक्यूमेंट्री में बताया गया है कि उस समय पुलिस राज्य के लोगों को उठाकर ले जाती और फिर उन्हें छोड़ने के बदले में पैसे मांगती, कईयों को मार दिया जाता, लापता बता कर उनका अंतिम संस्कार कर दिया जाता।

सतलुज नदी में ,मिली डेथ बॉडी

पुलिस के इस अत्याचार के खिलाफ जसवंत सिंह खालड़ा ने आवाज उठाई। उन्होंने सिविल कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट के चक्कर काटे। ये मुद्दा कनाडा सरकार के सामने भी उठाया। लेकिन 6 सितंबर 1995 को जसवंत सिंह खालड़ा अपने घर से ही किडनैप हो गए। उस दिन वो अपने घर के बाहर गाड़ी धो रहे थे। तभी कुछ लोग उन्हें उठा ले गए। बाद में पता चला कि उनका किडनैप करने वाले लोग पुलिस अधिकारी थे। डेढ़ महीने बाद अक्टूबर में जसवंत सिंह खालड़ा का शव सतलुज नदी में मिला। मामले की सीबीआई जांच हुई।इस जांच में 6 पुलिस अधिकारी के नाम सामने आए। कोर्ट ने उन्हें दोषी पाया और6 में से 4 को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसी पर बनी है फिल्म सतलुज।

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